नमस्कार किसान साथियों, मेरा नाम राधेश्याम मालवीय है। मैं मूल रूप से मध्यप्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन का निवासी हूं, जहां विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर मंदिर स्थित है। मैं पिछले 14 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं और इसके साथ-साथ उज्जैन जिले के ग्रामीण क्षेत्र में मेरी स्वयं की कृषि भूमि भी है। पत्रकारिता और खेती दोनों से गहरा जुड़ाव होने के कारण मैंने किसानों की वास्तविक समस्याओं और जरूरतों को बहुत करीब से समझा है। आज के समय में पारंपरिक खेती के तरीकों से किसानों की आमदनी बढ़ाना कठिन होता जा रहा है, जबकि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है। ऐसे में किसानों को सही, भरोसेमंद और व्यावहारिक जानकारी की सबसे अधिक आवश्यकता है। इसी सोच और अनुभव के आधार पर chopalsamachar.com की शुरुआत की गई।
ChopalSamachar.com एक किसान-केंद्रित डिजिटल कृषि समाचार और सूचना प्लेटफॉर्म है, जिसका उद्देश्य किसानों तक खेती-किसानी से जुड़ी सटीक, उपयोगी और समय पर जानकारी पहुंचाना है। इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से खेती, फसल उत्पादन, कृषि नवाचार, मंडी भाव, पशुपालन, मौसम, ग्रामीण आजीविका और किसानों के लिए सरकारी योजनाओं से जुड़ी जानकारी सरल और समझने योग्य हिंदी भाषा में उपलब्ध कराई जाती है। यहां प्रकाशित कंटेंट प्रचार से दूर, ज़मीनी अनुभव और विशेषज्ञ सलाह पर आधारित होता है, ताकि किसान सही निर्णय ले सकें और अपनी आय बढ़ा सकें।
भारत एक कृषि प्रधान देश है और देश की बड़ी आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से खेती पर निर्भर है, इसके बावजूद किसानों तक सही जानकारी समय पर नहीं पहुंच पाती। chopalsamachar.com का प्रयास है कि किसानों को एक ही स्थान पर खेती से जुड़ी हर जरूरी जानकारी मिले, जिससे उनकी लागत कम हो, उत्पादन बेहतर हो और खेती को लाभ का व्यवसाय बनाया जा सके। हमारा मानना है कि सही जानकारी ही किसान की सबसे बड़ी ताकत है। किसान हितों से जुड़े समाचारों को प्राथमिकता देना और ग्रामीण भारत की सच्ची आवाज बनना ही chopalsamachar.com का मुख्य उद्देश्य है।
खेती-किसानी से जुड़े सभी विषय हमारे लिए महत्वपूर्ण हैं। किसान, पाठक और कृषि से जुड़े सभी लोग किसी भी समय हमसे संपर्क कर सकते हैं। हम हर संभव प्रयास करते हैं कि किसानों की समस्याओं का समाधान किया जाए और उन्हें भरोसेमंद जानकारी उपलब्ध कराई जाए। chopalsamachar.com किसानों की चौपाल है, जहां जानकारी भी है, अनुभव भी और किसान की आवाज भी।





