गेहूं कटते ही तत्काल बोएं यह फसल ; 2 महीने में करेगी मालामाल, जानें टॉप किस्मों और खेती की पूरी जानकारी..

गर्मी में मूंग की खेती से अधिक उत्पादन एवं लाभ कैसे प्राप्त करें, मूंग की वैरायटियों एवं खेती (Mung Cultivation) की पूरी जानकारी यहां देखें…

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Mung Cultivation | गर्मियों में मूंग की खेती भरपूर फायदा देने वाली खेती बनती जा रही है। इस फसल की खास बात यह है कि, बनी के पश्चात दो सिंचाई करने पर यह दो से ढाई माह अर्थात 60 से 70 दिन की अवधि में पककर तैयार हो जाती है और मुनाफा भी ज्यादा देती है।

गेहूं की खेती के बाद अधिकतर किसान ग्रीष्मकालीन मूंग एवं उड़द की खेती करते है। ऐसे में आज हम यहां चौपाल समाचार के इस आर्टिकल के माध्यम से ग्रीष्मकालीन मूंग एवं उड़द की उन्नत खेती (Mung Cultivation) के बारे में चर्चा करेंगे। जानिए गर्मियों में मूंग एवं उड़द की खेती से किस प्रकार बेहतरीन उत्पादन प्राप्त कर सकते है…

ग्रीष्मकालीन मूंग एवं उड़द की बुआई का उचित समय

Mung Cultivation | ग्रीष्मकालीन/वसन्त मूंग की बुआई का उपयुक्त समय 10 मार्च से 10 अप्रैल तक है। उड़द की बुआई का उपयुक्त समय 15 फरवरी से 15 मार्च तक है। सरसों, गेहूं, आलू की कटाई के उपरान्त 70 से 80 दिनों में पकने वाली प्रजातियों की बुआई की जा सकती है। किसी कारणवश खेत समय पर तैयार न हो, तो वहां पर मूंग एवं उड़द की 60-65 दिनों में पकने वाली प्रजातियों की बुआई 15 अप्रैल के बाद कर सकते हैं।

यदि किसान मूंग एवं उड़द की बुआई देर से करते हैं, तो नमी की कमी फसल की धीमी वृद्धि, अगली फसल की बुआई में देरी एवं रोगों व कीटों का अधिक प्रकोप की समस्यायें आ सकती हैं। इसकी खेती (Mung Cultivation) के लिए अच्छे जल निकास वाली बलुई-दोमट मृदा उपयुक्त मानी जाती है।

बुआई से पहले खेत में उचित नमी होना अति आवश्यक है। बारीक, भुरभुरा व चूर्णिल खेत मूंग व उड़द की खेती के लिये अच्छा माना जाता है। खेत की 2-3 बार जुताई हैरोइंग पर्याप्त होती है। प्रत्येक जुताई के बाद पाटा अवश्य लगायें, जिससे मृदा की नमी संरक्षित रहे। बुआई का उपयुक्त समय वायुमण्डलीय तापमान, मृदा की नमी व फसल प्रणाली पर निर्भर करता है।

बेहतरीन उत्पादन देने वाली मूंग एवं उड़द की उन्नत किस्में

मूंग व उड़द की अच्छी पैदावार (Mung Cultivation) तथा उत्तम गुणवत्तायुक्त उत्पादन लेने के लिए अच्छी प्रजाति का चयन अत्यन्त महत्वपूर्ण है। इसलिए पानी के साधन, फसलचक्र व बाजार की मांग की स्थिति को ध्यान में रखकर उपयुक्त प्रजातियों का चयन करें।

मूंग की उन्नत किस्में जैसे-पूसा 1431, पूसा 9531. पूसा रत्ना, पूसा 672, पूसा विशाल, के.पी.एम 409-4 (हीरा), वसुधा (आई.पी.एम. 312-20), सुर्या (आई.पी.एम. 512-1), कनिका (आई.पी.एम. 302-2), वर्षा (आई. पी.एम. 2के 14-9) आदि प्रमुख हैं।

उड़द की उन्नत किस्में जैसे-पीडीयू 1 (वसंत बहार), के.यू.जी. 479, मुलुंद्र उड़द 2 (के.पी.यू. 405), कोटा उड़द 4 (के.पी.यू. 12-1735) व सुजाता प्रमुख हैं। | Mung Cultivation

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Mung Cultivation | इस प्रकार करें बीजोपचार

मृदा एवं बीज जनित कई कवक एवं जीवाणुजनित रोग होते हैं. जो मृदा अंकुरण होते समय तथा अंकुरण होने के बाद बीजों को काफी क्षति पहुंचाते हैं। बीजों के अच्छे अंकुरण तथा स्वस्थ पौधों की पर्याप्त संख्या हेतु बीजों को कवकनाशी से बीज उपचार के लिये प्रति कि.ग्रा. बीज को 2.5 ग्राम धौरम तथा । ग्राम कार्यण्डाजिम से उपचार करने के बाद राइजोबियम कल्बर से बीजोपचार करना चाहिए।

बुआई के समय बीज डालने से पहले सल्फर धूल का प्रयोग अवश्य करना चाहिए। इसी प्रकार फॉस्फेट घुलनशील बैक्टीरिया (पीएसबी) से बीज का शोधन करना भी लाभदायक होता है। | Mung Cultivation

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बीज दर व दूरी कितनी रखें?

Mung Cultivation बीज दर का निर्धारण मुख्यतः बीज के आकार, नमी की स्थिति, बुआई का समय, पौधों की पैदावार तथा उत्पादन तकनीक पर निर्भर होता है। ग्रीष्मकालीन मूंग एवं उड़द की बुआई के लिये 20-25 कि.ग्रा. बीज प्रति हैक्टर पर्याप्त होता है। ग्रीष्मकालीन मूंग एवं उड़द की फसल में पंक्तियों से पंक्तियों को दूरी 30 सें.मी. होनी चाहिए। बीज की बुआई कूड़ों में या सीडड्रिल से पक्तियों में की जानी चाहिए तथा बीजों को 4-5 सें.मी. गहराई में बोना चाहिए।

ग्रीष्मकालीन मूंग एवं उड़द में उर्वरक प्रबंधन

मूंग की खेती (Mung Cultivation) में उर्वरकों का प्रयोग मृदा परीक्षण की संस्तुतियों के आधार पर किया जाना चाहिए। मूंग की फसल के लिये 10-15 कि.ग्रा. नाइट्रोजन, 45-50 कि.ग्रा. फॉस्फोरस, 50 कि.ग्रा. पोटाश एवं 20-25 कि.ग्रा. सल्फर/हैक्टर के दर से बुआई के समय कूड़ों में देना चाहिए। जस्ता या जिंक की कमी वाले क्षेत्रों में 20 कि.ग्रा./हैक्टर के दर से प्रयोग करना चाहिए।

उड़द की फसल के लिये नाइट्रोजन, फॉस्फोरस एवं गंधक क्रमशः 15, 45 एवं 20 कि.ग्रा. प्रति हैक्टर की दर से बुआई के समय कूड़ों में देना चाहिए। नवीनतम प्रयोगों से यह सिद्ध हुआ है कि 2 प्रतिशत यूरिया के घोल का पर्णीय छिड़काव यदि फली बनने की अवस्था में किया जाये तो उपज में निश्चित रूप से वृद्धि होती है।

खरपतवार प्रबंधन इस प्रकार करें | Mung Cultivation

बुआई के प्रारंभिक 4-5 सप्ताह तक खरपतवार की समस्या अधिक रहती है। पहली सिंचाई के बाद निराई करने से खरपतवार नष्ट होने के साथ-साथ मृदा में वायु का संचार भी होता है, जो मूल ग्रन्थियों में क्रियाशील जीवाणुओं द्वारा वायुमण्डलीय नाइट्रोजन एकत्रित करने में सहायक होता है। खरपतवारों के रासायनिक नियंत्रण हेतु 2.5-3.0 मिली प्रति लीटर पानी में घोलकर बुआई के 2 से 3 दिनों के अन्दर अंकुरण के पूर्व छिड़काव करने से 4 से 6 सप्ताह तक खरपतवार नहीं निकलते हैं।

चौड़ी पत्ती तथा घास वाले खरपतवार (Mung Cultivation) को रासायनिक विधि से नष्ट करने के लिये एलाक्लोर की 4 लीटर या फ्लूक्लोरालिन (45 ई.सी.) नामक रसायन की 2.22 लीटर मात्रा को 800 लीटर पानी में मिलाकर बुआई के तुरन्त बाद या अंकुरण से पहले छिड़काव कर देना चाहिए। अतः बुआई के 15-20 दिनों के अन्दर कसोले से निराई-गुड़ाई कर खरपतवारों को नष्ट करें।

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