प्याज की रोपाई के बाद गुणवत्तायुक्त व अधिक उत्पादन के लिए अपनाएं यह वैज्ञानिक सलाह..

उचित रोग-कीट प्रबंधन से बढ़ाया जा सकता है प्याज का आकार और वजन, देखें Onion Cultivation को लेकर कृषि वैज्ञानिकों के सलाह..

👉 व्हाट्सऐप चैनल से जुड़े।

Onion Cultivation | प्याज की खेती रबी एवं खरीफ सीजन के साथ-साथ जायद के सीजन में भी की जाती है।प्याज देश की प्रमुख नकदी फसलों में से एक है। इसकी सफल खेती केवल पौध तैयार करने और रोपाई तक सीमित नहीं रहती, बल्कि रोपाई के बाद की देखभाल ही तय करती है कि किसान को कितनी और कैसी उपज मिलेगी। थोड़ी-सी लापरवाही भी उत्पादन और गुणवत्ता दोनों को प्रभावित कर सकती है। प्याज की रोपाई Onion Cultivation के पश्चात किसानों को अधिक उपज देने के लिए किन बातों का ध्यान रखना होगा, आइए कृषि वैज्ञानिकों से जानते हैं..

रोपाई के बाद फसल का ध्यान रखना जरूरी | Onion Cultivation

राष्ट्रीय बागवानी अनुसंधान विकास प्रतिष्ठान (NHRDF) करनाल के वैज्ञानिक चंदन तिवारी के अनुसार, रोपाई के बाद यदि सिंचाई, पोषण और रोग-कीट प्रबंधन पर सही समय पर ध्यान दिया जाए, तो प्याज की गांठ का आकार, वजन और भंडारण क्षमता बढ़ाई जा सकती है। रोपाई के बाद इन वैज्ञानिक सलाहों को अपनाने से पैदावार बढ़ने के साथ ही बाजार में बेहतर दाम भी मिलेंगे। सिंचाई से लेकर उर्वरक एवं रोग प्रबंधन किस प्रकार होना चाहिए जानिए सिलसिलेवार।

इस तरह सिंचाई करना जरूरी

Onion Cultivation | प्याज की रोपाई के तुरंत बाद हल्की सिंचाई आवश्यक है, जिससे पौधे अच्छी तरह जम सकें। इसके बाद मौसम और मिट्टी के अनुसार 7-10 दिन के अंतर पर पानी दें। गांठ बनने की अवस्था में नियमित सिंचाई करें, जबकि खुदाई से 10-15 दिन पहले पानी बंद कर देना चाहिए।

खरपतवार नियंत्रण और निराई-गुड़ाई

प्याज की रोपाई (Onion Cultivation) के बाद जब खेत में नमी हो, तब ऑक्सीफ्लोरोफिन 1 मि.ली. प्रति लीटर पानी में घोलकर पहला छिड़काव करें। फिर 22-25 दिन में पहली निराई- गुड़ाई करना लाभकारी रहता है। खरपतवार पोषक तत्वों के साथ-साथ नमी भी छीन लेते हैं, जिससे फसल कमजोर हो जाती है।

ये भी पढ़ें 👉 लहसुन में लगा रोग, पौधे मुड़कर पीले पड़ रहे हैं, सूखने लगी फसल, इस रोग के निदान के लिए यह करें उपाय..

संतुलित पोषण से बढ़ेगा उत्पादन

रोपाई के 25-30 दिन बाद नाइट्रोजन की पहली टॉप ड्रेसिंग व 40-45 दिन बाद दूसरी मात्रा देना चाहिए। गांठ बनने के समय पोटाश का प्रयोग करने से प्याज का आकार और गुणवत्ता बेहतर होती है। जिंक व बोरॉन जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों का पत्तियों पर छिड़काव करने से फसल और मजबूत बनती है।

प्याज के प्रमुख रोग एवं बचाव

Onion Cultivation | प्याज में झुलसा रोग एक प्रमुख फफूंदजनित रोग है, जो नमी व गर्म मौसम में तेजी से फैलता है। इसके नियंत्रण के लिएमैन्कोजेब (एम-45) कार्बेन्डाजिम (2 ग्राम / लीटर) का 10-15 दिन के अंतर पर छिड़काव करें।

प्याज के प्रमुख कीट एवं बचाव

प्याज में थ्रिप्स रस चूसने वाला प्रमुख कीट है, जो गर्म व सूखे मौसम में ज्यादा फैलता है। इसके नियंत्रण के लिए फिप्रोनिल 5% एससी (1 एमएल /ली.), डेलीगेट (स्पीनेटोरम 11.7% एससी) – 0.5 एमएल / ली. या इमिडाक्लोप्रिड में से किसी एक दवा का 15-20 दिन के अंतर पर छिड़काव करें।

सही समय पर खुदाई और भंडारण | Onion Cultivation

जब लगभग 60-70 प्रतिशत पत्तियां पीली पड़कर जमीन पर झुक जाएं, तब प्याज की खुदाई करनी चाहिए। कटाई के बाद 7-10 दिन छायादार और हवादार स्थान पर सुखाने से गर्दन अच्छी तरह सूख जाती है और भंडारण के दौरान सड़न कम होती है।

कृषि योजना खेती किसानी, मंडी, भाव लेटेस्ट बिजनेस एवं टेक की जानकारी के लिए आप हमारे व्हाट्सएप चैनल को फॉलो कर सकते है।

प्रिय किसानों…! 🙏 चौपाल समाचार में आपका स्वागत हैं, हम कृषि विशेषज्ञों कृषि वैज्ञानिकों एवं शासन द्वारा संचालित कृषि योजनाओं के विशेषज्ञ द्वारा गहन शोध कर Article प्रकाशित किये जाते हैं आपसे निवेदन हैं इसी प्रकार हमारा सहयोग करते रहिये और हम आपके लिए नईं-नईं जानकारी उपलब्ध करवाते रहेंगे। आप हमारे टेलीग्राम एवं व्हाट्सएप ग्रुप से नीचे दी गई लिंक के माध्यम से जुड़कर अनवरत समाचार एवं जानकारी प्राप्त करें.

Leave a Comment