अरहर की बिजाई और खेती के बारे में कृषि वैज्ञानिकों की महत्वपूर्ण सलाह (Pigeon Pea Sowing Advise) देखें..
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Pigeon Pea Sowing Advise | मार्च महीने में रबी फसलों की कटाई हो जाती है और धीरे-धीरे खेत खाली होने लगते हैं। किसान खाली पड़े खेतों में अगली फसल की तैयारी के लिए जुट जाते हैं। मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र में खरीफ सीजन के दौरान सोयाबीन की फसल के लिए खेतों को हंकाई-जुताई करके तैयार किया जाता है। वहीं एमपी राजस्थान महाराष्ट्र हरियाणा पंजाब के किसान कपास अरहर, मूंग, सूरजमुखी, मूंगफली, उड़द की खेती के लिए बिजाई शुरू कर देते हैं।
गर्मी की सीजन के दौरान एमपी के कई जिलों में मूंग की खेती होने लगी है। इधर मध्य मार्च से लेकर जून-जुलाई तक अरहर की बिजाई के लिए भी उपयुक्त समय रहता है। अरहर की कौन सी वेराइटी इस दौरान बोने से अच्छी पैदावार देगी और क्या है अरहर की खेती (Pigeon Pea Sowing Advise) का पूरा गणित आईए कृषि वैज्ञानिकों से जानते हैं..
मध्य-अप्रैल की बिजाई से मिलेगी अधिक उपज
Pigeon Pea Sowing Advise | कृषि वैज्ञानिक बताते हैं कि अरहर की बिजाई मध्य- मार्च से शुरू हो जाती है। इसकी बिजाई मध्य जून तक कर सकते हैं। लेकिन मानक व पारस को मध्य- जुलाई तक बोया जा सकता है। यद्यपि मध्य-अप्रैल की बिजाई से अधिक उपज मिलती है।
कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक बेहतर पैदावार के लिए खेत की सही तैयारी जरूरी है। रबी फसलों की कटाई के बाद बची पदाड़ी को खेत में मिलाकर जुताई करें, इससे कार्बनिक पदार्थ बढ़ता है। प्रति एकड़ 500-600 किलो घन जीवामृत डालें। सब्जी (Pigeon Pea Sowing Advise) न उगाने पर मूंग, उड़द या ढेंचा जैसी हरी खाद अपनाकर मिट्टी की उर्वरता बढ़ाएं।
अरहर की यह वैरायटियां देगी अधिक उत्पादन | Pigeon Pea Sowing Advise
चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बीआर काम्बोज ने बताया कि अरहर की मुख्य उपयुक्त किस्में, यूपीएएस 120 की बिजाई मार्च से जुलाई के प्रथम सप्ताह तक कर सकते हैं। एक एकड़ के लिए 5 से 6 किलोग्राम बीज काफी होता है।
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अरहर की खेती को लेकर जरूरी सलाह | Pigeon Pea Sowing Advise
- अरहर की बिजाई से पहले खेत को तैयार कर लें। इसके उपरांत बिजोपचार करके ही बिजाई करें।
- बिजाई से पहले करें बीजोपचार करना जरूरी है।
- अरहर की बिजाई से पहले बीजों को अरहर के राइजोबियम के टीके से उपचारित करें।
- बिजाई पोरा विधि से करें।
- दो खुडों का फासला 40 सेंटीमीटर रखकर ही बिजाई करें। : Pigeon Pea Sowing Advise
- किसान 1 एकड़ में 5 से 6 किलोग्राम बीज डालें।
अरहर की खेती के लिए उर्वरक प्रबंधन
Pigeon Pea Sowing Advise | कृषि वैज्ञानिक बताते हैं कि अरहर की अच्छी पैदावार लेने के लिए 100 किलोग्राम सिंगल सुपर फास्फेट तथा 18 किलोग्राम यूरिया खाद प्रति एकड़ बिजाई के समय ही पोर दें।
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सूरजमुखी के लिए भी वैज्ञानिकों ने जारी की सलाह
Pigeon Pea Sowing Advise | अरहर की बिजाई के साथ-साथ कृषि वैज्ञानिकों ने सूरजमुखी की फसल के लिए भी सलाह जारी की है। कृषि वैज्ञानिकों द्वारा बताया गया है कि सूरजमुखी की बिजाई के तीन से छह सप्ताह बाद दो निराई करें और उगते बीज को पक्षियों से बचाएं।
कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक सूरजमुखी की फसल को कटुआ सूंडी रात में नुकसान करती है। कीट के नियंत्रण के लिए 10 किलोग्राम फेनवेलरेट 0.4 प्रतिशत धूड़ा प्रति एकड़ खेत में ठीक से मिलाएं या हल्की सिंचाई कर दें। : Pigeon Pea Sowing Advise
इसके अलावा 80 मिलीलीटर फेनवेलरेट 20 ईसी. या 50 मिलीलीटर साइपरमेथ्रिन 25 ईसी. या 150 मिलीलीटर डैकामैथरीन 2.8 ईसी 100 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ भी छिड़क सकते हैं। बीजोपचार 3 ग्राम थाइरम प्रति किलोग्राम बीज की दर से अवश्य करें।
मार्च-अप्रैल में सब्जियों की बुवाई भी लाभकारी
Pigeon Pea Sowing Advise | कृषि विशेषज्ञों के अनुसार मार्च-अप्रैल में खाली खेतों में गर्मी की सब्जियों की बुवाई लाभकारी रहती है, जो 30 से 60 दिन में तैयार होकर अच्छा मुनाफा देती हैं। इसके लिए कृषि वैज्ञानिक सलाह देते हैं कि बेल वाली फसलों के लिए 10 फीट दूरी रखने और स्टैकिंग विधि अपनाने से अधिक फायदा मिलता है।
वहीं सिंचाई के लिए ड्रिप इरिगेशन सबसे बेहतर माना गया है, जिससे पानी की बचत और खरपतवार नियंत्रण होता है। इन फसलों से न केवल आय बढ़ती है, बल्कि मिट्टी की नमी, ऑर्गेनिक कार्बन और सूक्ष्मजीव भी सुरक्षित रहते हैं। किसान मक्का या अरहर की खेती (Pigeon Pea Sowing Advise) कर भी अतिरिक्त लाभ ले सकते हैं।
गर्मियों के लिए इन सब्जियों और फसलों का करें चयन
Pigeon Pea Sowing Advise | किसान खेतों में भिंडी, ग्वार फली, लौकी, तोरई और करेले जैसी सब्जियों की बिजाई कर सकते हैं। इसके अलावा पछेता तरबूज, खरबूजा, ककड़ी और आरिया (कचरी) की मांग बाजार में गर्मियों के दौरान चरम पर रहती है। दलहनी फसलों में मूंग और धनिये की खेती भी एक लाभकारी सौदा है। किसान अब चेरी टमाटर, लेट्यूस, स्टेम ब्रोकली, ऑरेंज गाजर और आल प्याज (हरा प्याज) जैसी विशेष सब्जियों की खेती भी कर सकते हैं।
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