लहसुन की फसल में इस समय रोग नया रोग आया है। इस रोग से बचाव (Garlic Disease Control) के लिए क्या करना होगा, आइए जानते हैं..
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Garlic Disease Control | पश्चिम मध्य प्रदेश के कुछ जिलों में लहसुन की फसल पककर तैयार हो चुकी है। वहीं इस वर्ष अच्छे भाव की उम्मीद में किसानों ने बड़े पैमाने पर लहसुन फसल की बुवाई की, लेकिन लगातार बदलते मौसम और रोग ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है।
कई क्षेत्रों में लहसुन की फसल (Garlic Disease Control) अभी करीब दो से ढाई माह की होने को है, लेकिन पहले पीलिया रोग और अब मुरडिया रोग के प्रकोप ने लहसुन की फसल पर असर पड़ रहा है। इस रोग के कारण पौधे मुड़कर पीले पड़ रहे हैं, बढ़वार रुक गई है और कई स्थानों पर पौधे सूखने की स्थिति में पहुंच गए हैं। फसल को इस रोग से उबारने के लिए क्या उपाय करना होंगे आइए जानते हैं..
फसल में रोग फैला, 50% नुकसान की संभावना | Garlic Disease Control
लहसुन की फसल में इस समय रोग फैलने की स्थिति को देखते हुए कृषि विभाग के अधिकारियों एवं कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि बार-बार बदल रहे मौसम के कारण लहसुन में अलग-अलग रोगों का प्रकोप देखने को मिल रहा है। कृषि अधिकारियों ने बताया कि इस समय लहसुन की फसल कंद बनने की अवस्था है, लेकिन इसी दौरान मुरडिया रोग (पत्ती मरोड़ / पीला पड़ना रोग) का प्रकोप तेजी से देखा जा रहा है। : Garlic Disease Control
मुरडिया रोग से प्रभावित लहसुन के पौधों की बढ़वार रुक जाती है। शुरुआत में पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं, बाद में वे मुड़कर सूख जाती हैं। रोग की गंभीर अवस्था में पौधे में कंद का विकास रुक जाता है या कंद बन ही नहीं पाता। इस समय यदि पौधा कमजोर हो गया तो पूरी फसल प्रभावित हो सकती है। अनुमान है कि समय पर निदान और उपचार नहीं होने पर किसानों को 50 प्रतिशत तक का नुकसान हो सकता है।
फसल में रोग से परेशान हो रहे किसान | Garlic Disease Control
किसानों का कहना है कि मुरडिया रोग की रोकथाम के लिए 3 से 4 बार कीटनाशकों का छिड़काव किया जा चुका है, लेकिन इसके बावजूद रोग खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। खेतों में दिन-ब-दिन हालत बिगड़ती जा रही है। यदि समय रहते प्रभावी उपचार नहीं हुआ तो उत्पादन पर भारी असर पड़ेगा।
किसानों का कहना है कि खाद, बीज, सिंचाई और दवाओं पर पहले ही भारी लागत आ चुकी है, ऐसे में यदि फसल नष्ट हुई तो आर्थिक स्थिति पर बुरा असर पड़ेगा। किसानों ने कृषि विभाग से मौके पर पहुंचकर फसल का निरीक्षण करने और प्रभावी नियंत्रण की मांग की है।
कृषि विशेषज्ञों की निगरानी में करें उपाय | Garlic Disease Control
कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि लहसुन की फसल में फैल रहे रोग का नियंत्रण करने के लिए किसान साथी कृषि विशेषज्ञों की सलाह जरूर लें। अधिकारियों ने बताया कि फसल में इस समय कांड बनने की अवस्था है इसलिए किसान उचित एवं सही कीटनाशक एवं दवाइयां का इस्तेमाल करें।
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लहसुन में इस समय यह स्प्रे करना रहेगा फायदेमंद
Garlic Disease Control | लहसुन और प्याज में झुलसा रोग (Blight) और बैंगनी धब्बा (Purple Blotch) के नियंत्रण के लिए 2026 की सबसे* आधुनिक और प्रभावी दवाएं (Latest Dose) निम्नलिखित हैं। आपकी फोटो में पत्तियों के ऊपरी हिस्से का सूखना और पीलापन स्पष्ट दिख रहा है, जो झुलसा रोग के लक्षण हैं। किसान बेहतर परिणामों के लिए इनमें से किसी भी एक विकल्प को चुन सकते हैं :-
1. एज़ोक्सीस्ट्रोबिन 18.2% + डिफेनोकोनाज़ोल 11.4% SC Amistar Top (Syngenta) 15 – 20 ml
2. टेबुकोनाज़ोल 50% + ट्राइफ्लोक्सीस्ट्रोबिन 25% WG Nativo (Bayer) 10 – 12 gram
3. एज़ोक्सीस्ट्रोबिन 11% + टेबुकोनाज़ोल 18.3% SC Custodia (Adama) / Spectrum 25 ml
4. टेबुकोनाज़ोल 25.9% EC Folicur
किसान इन बातों पर जरूर ध्यान दें | Garlic Disease Control
एंटीबायोटिक का प्रयोग : यदि रोग गंभीर है, तो फंगीसाइड के साथ वैलिडामाइसिन (Validamycin) 25-30 ml या स्ट्रेप्टोसाइक्लिन (Streptocycline) 2-6 ग्राम प्रति पंप मिलाएं…
चिपको (Sticker) : प्याज/लहसुन की पत्तियां चिकनी होती हैं, इसलिए दवा के साथ सिलिकॉन आधारित चिपको (जैसे 5 ml/पंप) जरूर मिलाएं ताकि दवा पत्तियों पर अच्छी तरह चिपके।
थ्रिप्स का ध्यान दें : अक्सर झुलसा रोग थ्रिप्स के हमले के बाद बढ़ता है। यदि पत्तों पर छोटे सफेद धब्बे दिख रहे हों, तो साथ में कोई अच्छा कीटनाशक (जैसे Fipronil 5% SC) भी मिलाएं। : Garlic Disease Control
इस समय यह उर्वरक फसल के लिए रहेगा फायदेमंद
लहसुन की फसल इस समय 80 से 90 दिन की अवस्था में है कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक इस समय में लहसुन में कैल्सियम नाइट्रेट खाद (6kg प्रति बीघा) को यूरिया या वर्मी कंपोस्ट खाद में मिलकर छिड़काव करें। : Garlic Disease Control
(नोट :– यह जानकारी कृषि विशेषज्ञों की सलाह एवं प्रमाणित जानकारी के आधार पर जारी की जा रही है। किसान अपनी फसल में उपयोग करने से पहले एक बार पुनः कृषि विशेषज्ञों से सलाह लें। चौपाल समाचार किसी भी आखरी स्थिति के लिए जिम्मेदार नहीं रहेगा।)
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बहुत अच्छी जानकारी दी