बाढ़ और जलभराव वाले इलाकों में गन्ने की फसल (Sugarcane Cultivation) से बंपर पैदावार और अधिक कमाई के लिए अपनाएं यह तरीका..
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Sugarcane Cultivation | परंपरागत खेती की तुलना में आधुनिक तरीके से खेती करने से किसान अधिक फायदा कमा सकते हैं। खास बात यह है कि आधुनिक तरीके से खेती करने के दौरान लागत में कमी भी आती है, इससे मुनाफा और अधिक बढ़ जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार वैज्ञानिक सुझावों को अपनाते हुए किसान बंसतकालीन गन्ने की खेती (Sugarcane Cultivation) करते हैं तो इसके परिणाम काफी बेहतर होते हैं।
गन्ने की खेती के दौरान प्रमुख रूप से यह बात ध्यान रखना होती है कि सही जल निकास और संतुलित खाद का प्रयोग हो। इससे गन्ने की उपज उपज में 20 से 25 प्रतिशत तक की वृद्धि देखी जा सकती है। इससे गन्ना न केवल लंबा और मोटा होगा, बल्कि उसमें चीनी रिकवरी भी बेहतर होगी। इससे चीनी मिलों को अच्छी गुणवत्ता का गन्ना मिलेगा और किसानों को आर्थिक फायदा मिलेगा।
गन्ने की खेती (Sugarcane Cultivation) करने वाले किसानों को फरवरी मार्च के दौरान गाने की बुवाई के समय किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए एवं कौन सी विधि अपनाने से अधिकतम फायदा मिलेगा, आइए जानते हैं
जल जमाव से होता है बड़ा नुकसान
गौरतलब है कि बरसात के मौसम में जब खेतों में लंबे समय तक पानी जमा रहता है तो गन्ने की फसल (Sugarcane Cultivation) के लिए दम घुटने जैसी स्थिति पैदा हो जाती है। मिट्टी के छिद्रों में हवा की जगह पानी भर जाने से ऑक्सीजन का संचार बंद हो जाता है और गन्ने की विकास गति पूरी तरह रुक जाती है। फलस्वरूप पौधा पीला पड़कर सूखने लगता है।
जलभराव के कारण गन्ने में पोक्का बोइंग और लाल सड़न जैसी बीमारियों का हमला तेज हो जाता है, जिससे पूरी की पूरी खड़ी फसल बर्बाद हो सकती है। यह स्थिति विशेषकर उन क्षेत्र में अधिक उत्पन्न होती है जहां पर बाढ़ या अत्यधिक बारिश होती है। इस दौरान परंपरागत तरीके से बोया गया गन्ना गल जाता है और पेड़ी की क्षमता भी समाप्त हो जाती है।
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साधारण विधि की बजाय अपना यह तरीका
किसान अगर वसंतकाल यानी फरवरी-मार्च में (Sugarcane Cultivation) बुआई कर रहे हैं तो साधारण विधि के बजाय ट्रेंच विधि और जलभराव सहनशील किस्मों का चयन करके इन परेशानी से निजात पाकर बेहतर गन्ना उत्पादन ले सकते है। विशेषज्ञों के अनुसार जलभराव की समस्या का सबसे प्रभावी समाधान ट्रेंच बिधि से बुवाई करना है।
ट्रेंच विधि से गन्ने की बुवाई का तरीका
विशेषज्ञ बताते हैं कि परंपरागत समतल बुवाई के बजाय 4 से 5 फीट की दूरी पर गहरी नालियां बनाकर बुआई करनी चाहिए। इसमें मेड़ ऊंची रखी जाती है और गन्ने को 10 इंच गहरी नाली में बोया जाता है। इस विधि का सबसे बड़ा लाभ यह है कि भारी बारिश के दौरान मेड़ें सूखी रहती हैं और अतिरिक्त पानी नालियों के रास्ते बाहर निकाला जा सकता है। विशेषज्ञो के अनुसार, जलभराव वाले क्षेत्रों में 5-7 आंख वाले लंबे टुकड़ों के बजाय दो आंखों वाले उपचारित टुकड़ों का ही प्रयोग करना चाहिए, क्योंकि इनके सड़ने की संभावना बहुत कम होती है और जमाव बेहतर होता है। (Sugarcane Cultivation)
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जलभराव वाले क्षेत्रों में इन किस्मों को बोएं
कृषि विशेषज्ञ बताते हैं कि जलभराव वाले एरिया में गन्ने की खेती (Sugarcane Cultivation) के लिए सही बीज का चुनाव आधी लड़ाई जीतने के बराबर है। जलभराव वाले क्षेत्रों के लिए ऐसी किस्मों का चयन करें जो अधिक पानी और नमी को सहन करने की क्षमता रखती हों जिसकी सलाह अपने गन्ना विशेषज्ञ से लेकर बुवाई करनी चाहिए। कुछ खास किस्में जैसे- CoS 13231, CoP 9301, Co 98014, और CoLk 94184 जैसी किस्में जलभराव क्षेत्रों में सफल पाई गई हैं। बुवाई से पहले मिट्टी के स्वास्थ्य पर ध्यान देना भी जरूरी है। (Sugarcane Cultivation)
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बसंत कालीन गन्ने की खेती के लिए उर्वरक प्रबंधन
कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक प्रति एकड़ 10-15 टन सड़ी हुई गोबर की खाद या प्रेसमड का प्रयोग मिट्टी की संरचना को सुधारता है। पोषक तत्वों के प्रबंधन के लिए 5 बैग एसएसपी, 5 बैग मृदा कल्प और 10 किलो जिंक सल्फेट का संतुलित इस्तेमाल करना चाहिए, ताकि पौधों को मजबूती मिले। (Sugarcane Cultivation)
अधिक लाभ कमाने के लिए यह भी करें
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार गन्ने की दो कतारों के बीच जो खाली जगह होती है, उसका सही उपयोग करके किसान अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं। 4 फीट की दूरी पर बोए गए गन्ने के साथ मूंग या उड़द जैसी दलहनी फसलें लेना बहुत फायदेमंद होता है। यह फसलें न केवल अतिरिक्त मुनाफा देती हैं, बल्कि वायुमंडल से नाइट्रोजन लेकर मिट्टी की उर्वरता भी बढ़ाती हैं।
सहफसली खेती से खेतों में खरपतवार भी कम होते हैं और गन्ने की शुरुआती ग्रोथ अच्छी होती है। यह तकनीक जलभराव के जोखिम के बीच किसानों को एक सुरक्षा कवच प्रदान करती है। कृषि विशेषज्ञ बताते हैं कि पेड़ी रेटून प्रबंधन की आधुनिक विधियों को अपनाकर किसान अगली फसल में भी लागत कम करके अधिक मुनाफा कमा सकते हैं। (Sugarcane Cultivation)
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