कृषि वैज्ञानिकों ने बताया धान की फसल से बंपर पैदावार का फार्मूला, यूरिया की फिजूलखर्ची पर लगेगा ब्रेक

यूरिया की फिजूलखर्ची पर ब्रेक लगाएं किसान, कृषि वैज्ञानिकों ने निकाला धान (Paddy Crop) से बंपर पैदावार लेने का फार्मूला।

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Paddy Crop | धान की फसल में बिना जांच खाद डालना नुकसानदायक साबित हो सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक मिट्टी परीक्षण, जैविक खाद और यूरिया की सही मात्रा अपनाकर किसान खर्च घटाने के साथ दानों की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों बढ़ा सकते हैं। धान की खेती में बिना सोचे-समझे खाद डालना न सिर्फ पैसों की बर्बादी है, बल्कि इससे हमारी जमीन की सेहत भी खराब हो रही है।

अकेले यूरिया की बात करें तो इसकी कुल खपत का बड़ा हिस्सा सिर्फ धान में इस्तेमाल होता है। इससे किसानों की लागत तो बढ़ ही रही है। साथ ही खेतों का उपजाऊपन भी कम हो रहा है।

इसके अलावा, इन केमिकल खादों के लिए हमें दूसरे देशों पर निर्भर रहना पड़ता है। यही वजह है कि कृषि वैज्ञानिक सलाह दे रहे हैं कि किसान एक खास नीति अपनाएं, जिससे केमिकल खादों का इस्तेमाल कम हो और फसलों की पैदावार भी बेहतर मिले। Paddy Crop

किसानों की लागत बचेगी

बता दें कि, हर खेत की मिट्टी की उर्वरता अलग होती है। इसलिए पैदावार बढ़ाने का सबसे पहला उसूल यह है कि आप अपनी मिट्टी की जांच जरूर करवाएं। सॉइल टेस्ट से यह साफ हो जाता है कि जमीन में किस पोषक तत्व की कितनी कमी है। Paddy Crop

अगर जांच रिपोर्ट में जरूरी तत्व कम पाए जाते हैं तो आम सिफारिश से 25% ज्यादा खाद देने की जरूरत होती है। वहीं, अगर मिट्टी पहले से ही उपजाऊ है तो खाद की मात्रा में 25% तक की कमी की जा सकती है। इस तरीके को अपनाकर किसान न सिर्फ अपनी लागत बचा सकते हैं, बल्कि मिट्टी को भी बीमार होने से बचा सकते हैं।

धान की बेहतर पैदावार के लिए खाद एवं उर्वरक का इतना पैमाना रखें

विशेषज्ञों के अनुसार, धान के पौधों की बेहतर बढ़त और तंदुरुस्ती के लिए नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश (N, P, K) का एक तय संतुलन होना बेहद जरूरी है। मध्यम उपजाऊ मिट्टी के लिए आमतौर पर प्रति हेक्टेयर 105 किलो नाइट्रोजन, 30 किलो फास्फोरस और 30 किलो पोटाश की सलाह दी जाती है। Paddy Crop

इसे खाद के रूप में देखा जाए तो तकरीबन 225 किलो यूरिया, 67.5 किलो डीएपी (DAP) या 187.5 किलो सिंगल सुपर फास्फेट (SSP) और 50 किलो म्युरेट ऑफ पोटाश (MOP) प्रति हेक्टेयर बनता है। मगर ध्यान रहे, अगर आप अपने खेत में डीएपी का इस्तेमाल कर रहे हैं तो यूरिया की कुल मात्रा में से 25 किलो कम कर देना चाहिए।

इस तय पैमाने से खाद देने पर फसल को सही वक्त पर पूरा पोषण मिलता है, जिससे दानों में गजब की चमक और वजन आता है। सिर्फ केमिकल खादों के भरोसे रहकर हम लंबे समय तक अच्छी पैदावार की उम्मीद नहीं कर सकते। Paddy Crop

इसके लिए हमें केमिकल और जैविक खादों के मिले-जुले नुस्खे को अपनाना होगा। खरीफ के मौसम में तेज धूप और नमी की वजह से जैविक खादें मिट्टी में बहुत जल्दी घुल जाती हैं और पौधों को फायदा पहुंचाती हैं।

अगर आप धान की रोपाई से पहले खेत में 15 टन अच्छी तरह से सड़ी हुई गोबर की खाद डालते हैं तो इससे सीधे तौर पर प्रति हेक्टेयर 87 किलो यूरिया की बचत होती है। Paddy Crop

इसी तरह, रोपाई से एक हफ्ता पहले 6 से 8 हफ्ते पुरानी ढैंचा, सनई या लोबिया जैसी हरी खाद को मिट्टी में पलटने से 137 किलो यूरिया की बड़ी बचत की जा सकती है। चीनी मिलों से मिलने वाला प्रेसमड भी 15 टन प्रति हेक्टेयर की दर से डालने पर 137 किलो यूरिया का खर्च बचा देता है।

क्या करें किसान

विशेषज्ञों का कहना है कि अक्सर देखा गया है कि किसान धान की पत्तियों का रंग हल्का होते ही बिना सोचे-समझे यूरिया डाल देते हैं। Paddy Crop

इस आदत को बदलने के लिए ‘लीफ कलर चार्ट (LCC) एक बेहद सस्ता और जादुई औजार साबित हो सकता है। यह प्लास्टिक का एक चार्ट होता है, जिसमें हरे रंग की अलग-अलग पट्टियां बनी होती हैं। Paddy Crop

धान की रोपाई के 14 दिन बाद से हर हफ्ते खेत के अलग-अलग पौधों की ऊपर वाली खुली पत्तियों का मिलान इस चार्ट से छांव में करना चाहिए। अगर 10 में से 6 या उससे ज्यादा पत्तियों का रंग ‘शेड नंबर 4’ से हल्का दिखाई दे, तभी खेत में 62.5 किलो प्रति हेक्टेयर के हिसाब से यूरिया डालना चाहिए। Paddy Crop

जैसे ही धान की फसल में बालियां निकलना या फूल आना शुरू हो जाए, इस चार्ट का इस्तेमाल बंद कर देना चाहिए और उसके बाद यूरिया का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं करना चाहिए।

तीन किश्तों में यूरिया, नहीं होगी बर्बादीफसल की अधिक पैदावार के लिए सूक्ष्म तत्वों का भी अपना एक बड़ा रोल होता है, जिनमें धान के लिए जिंक और लोहा सबसे अहम हैं। Paddy Crop

मिट्टी की जांच में अगर जिंक की कमी पाई जाए तो रोपाई के वक्त ही 21.5% जिंक वाली जिंक सल्फेट खाद 62.5 किलो प्रति हेक्टेयर या 33% जिंक वाली खाद 37.5 किलो प्रति हेक्टेयर की दर से खेत में छिड़कनी चाहिए। इसके उलट, अगर धान में लोहे की कमी दिखे, तो जमीन में लोहा डालने का कोई फायदा नहीं होता।

इसके लिए 1% फेरस सल्फेट के घोल का पत्तों पर हर हफ्ते 3 से 4 बार छिड़काव करना सबसे ज्यादा असरदार तरीका है। खाद से पूरा फायदा हासिल करने के लिए फास्फोरस और पोटाश को हमेशा रोपाई से ठीक पहले जमीन में मिला देना चाहिए। लेकिन यूरिया को कभी भी एक बार में पूरा नहीं डालना चाहिए, बल्कि इसे तीन बराबर किस्‍तों में बांटकर देना चाहिए। Paddy Crop

पहली किस्‍त रोपाई के वक्त, दूसरी किस्‍त 3 हफ्ते बाद और आखिरी तीसरी किस्‍त रोपाई के 6 हफ्ते बाद देनी चाहिए. इस तरकीब से खाद बर्बाद नहीं होती और सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंचती है।

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