बिना डीजल एवं मेहनत के चलेगा यह रोबोट (Agricultural Robots) किसानों के लिए खरपतवार का नाश करेगा। जानिए इस रोबोट के बारे में सबकुछ।
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Agricultural Robots | आज के दौर में खेतों में मजदूरों की कमी और लगातार बढ़ती लागत किसानों के लिए एक बहुत बड़ी सिरदर्दी बन चुकी है. इस समस्या का पक्का हल निकालने के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) के वैज्ञानिकों ने एक कमाल की तकनीक विकसित की है। यह भारत का पहला ऐसा आधुनिक कृषि रोबोट है, जिसे खास तौर पर खेतों में उगने वाले अनचाहे खरपतवार को हटाने और सटीक तरीके से बुवाई करने के लिए बनाया गया है। आइये जानते है इस रोबोट (Agricultural Robots) के बारे में सबकुछ…
खरपतवार को रोकेगा यह रोबोट (Agricultural Robots)
बता दें की, इस रोबोट का नाम ‘वर्षा’ है। इस मशीन में एडवांस कैमरा सिस्टम, ऑटोमैटिक स्प्रे करने वाले नोजल और सोलर पैनल जैसी बेहतरीन तकनीकें लगाई गई हैं। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह खेत में केवल उसी जगह दवा छिड़कता है जहां खरपतवार होती है, जिससे खरपतवार नाशकों और रसायनों की भारी बर्बादी रुकती है। इससे हमारी मिट्टी और पर्यावरण को तो फायदा होता ही है, साथ ही किसानों की जेब पर भी खर्च का बोझ काफी कम हो जाता है।
वर्षा रोबोट (Agricultural Robots) की खूबियां
यह ‘वर्षा’ रोबोट सिर्फ दवा छिड़कने वाली मशीन नहीं है, बल्कि इसे एक बुवाई करने वाली मशीन के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इसकी बनावट को इस तरह डिजाइन किया गया है कि इसमें जरूरत के हिसाब से बीज बोने वाली यूनिट, मिट्टी खोदने वाला फरो ओपनर और गहराई तय करने वाले पार्ट्स को आसानी से जोड़ा या हटाया जा सकता है।
जब इस Agricultural Robots से बुवाई के लिए खेत में उतारा जाता है, तो यह हर बीज को एक बराबर दूरी पर और मिट्टी के अंदर सही गहराई पर डालता है। इसके बाद यह बीजों को मिट्टी से अच्छी तरह ढक भी देता है ताकि बीज और मिट्टी का संपर्क बेहतर हो। इसका नतीजा यह होता है कि पौधे बहुत अच्छे और स्वस्थ तरीके से उगते हैं।
इस तरह यह एक ही रोबोट किसानों के दो सबसे थकाऊ कामों—बुवाई और खरपतवार नियंत्रण—को चुटकियों में निपटा देता है। सबसे अच्छी बात यह है कि किसान इसे साल के बारह महीने किसी न किसी काम में इस्तेमाल कर सकते हैं।
इस रोबोट (Agricultural Robots) को बनाने में मैकेनिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स और कंप्यूटर साइंस जैसी कई तकनीकों का बेहतरीन तालमेल किया गया है।
इसे भारतीय खेतों के उबड़-खाबड़ रास्तों और अलग-अलग मौसम को ध्यान में रखकर बेहद मजबूत बनाया गया है।
अगर इसके नाप-तौल की बात करें, तो इसकी लंबाई लगभग 2.0 मीटर, ऊंचाई 2.5 मीटर और वजन करीब 450 किलोग्राम है। इस रोबोट (Agricultural Robots) का जमीन से ऊंचाई 1.0 मीटर रखा गया है, जिसका फायदा यह है कि यह ऊंची सब्जियों या फसलों के ऊपर से बिना उन्हें कोई नुकसान पहुंचाए आराम से निकल जाता है।
इसकी सबसे अनोखी खूबी यह है कि इसकी चौड़ाई को फसल की दो लाइनों के बीच की दूरी के हिसाब से 1.4 मीटर से लेकर 2.8 मीटर तक घटाया या बढ़ाया जा सकता है। यानी फसल चाहे पास-पास बोई गई हो या दूर-दूर, यह रोबोट हर तरह के खेत में आसानी से फिट हो जाता है।
इस रोबोट (Agricultural Robots) में एक बहुत ही पावरफुल रंगीन कैमरा लगा है। यह कैमरा फसल के पौधों और खरपतवार के रंग और आकार के अंतर को तुरंत पहचान लेता है।
जैसे ही इसे किसी जगह पर खरपतवार दिखती है, इसके दोनों तरफ लगी रोबोटिक आर्म्स एक्टिव हो जाती हैं और उनके नोजल से सिर्फ उसी जगह दवा का स्प्रे होता है। इससे फालतू दवा बिल्कुल बर्बाद नहीं होती। इस पूरे सिस्टम को चलाने के लिए किसान को खेत में धूप में घूमने की जरूरत नहीं है, बल्कि वह 1.0 किलोमीटर की दूरी से ही एक रिमोट के जरिए इसे कंट्रोल कर सकता है। रिमोट के अंदर ही एक स्क्रीन लगी होती है, जिसमें रोबोट के फ्रंट कैमरे से लाइव वीडियो दिखाई देता है।
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किसान घर बैठे या पेड़ की छांव में रुककर रोबोट (Agricultural Robots) की स्पीड, उसकी दिशा और स्प्रे को चालू या बंद कर सकता है. यह तकनीक हमारे बुजुर्ग या बीमार किसानों के लिए और तपती गर्मी या खराब मौसम में खेती करने के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।
वर्षा’ रोबोट को चलाने के लिए महंगे डीजल या पेट्रोल की कोई जरूरत नहीं है, क्योंकि यह पूरी तरह से इको-फ्रेंडली सूरज की रोशनी और बैटरी पर काम करता है।
इसके ऊपर 200 वाट के 4 सोलर पैनल लगे हैं जो दिनभर धूप से बिजली बनाकर इसकी लिथियम-आयन बैटरियों को चार्ज करते रहते हैं।
यह Agricultural Robots बैटरी इतनी दमदार है कि एक बार फुल चार्ज होने के बाद रोबोट लगातार 6 घंटे तक बिना रुके काम कर सकता है। अगर आसमान में बादल हों या रात का समय हो, तब भी यह बैटरी बैकअप के दम पर काम करता रहता है।
मटर की किस्म पर किया गया रोबोट का टेस्ट | Agricultural Robots
टेस्टिंग के दौरान देखा गया कि इसके कैमरे ने 90% से ज्यादा सटीकता के साथ खरपतवार को पहचाना, जिससे खेतों में रसायनों की खपत 25% तक कम हो गई। साथ ही, वैज्ञानिकों ने जब पूसा प्रगति मटर की किस्म पर इसका टेस्ट किया, तो 85% बीज बहुत शानदार तरीके से अंकुरित हुए। कुल मिलाकर, यह रोबोट अपनी लागत को महज 2 से 3 सालों में ही वसूल कर देता है और आने वाले समय में किसानों के मुनाफे को दोगुना करने का सबसे बड़ा जरिया बनने वाला है।
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नमस्कार किसान साथियों….
मेरा नाम जयदीप मालवीय है और मैं एक कॉलेज छात्र हुं। मुझे 10वीं से ही खेती किसानी पर कंटेंट लिखने में गहरी रुचि है। साथियों, हम देखते है कि कई किसान भाइयों को खेती में कम उत्पादन एवं लागत ज्यादा आती है, जिससे उन्हें मुनाफा कम होता है। इसका प्रमुख कारण अभी भी खेती का परंपरागत तरीका अपनाया जाना है। किसान साथी खेती के परंपरागत तरीके से निकल कर आधुनिक तरीके अपनाएं, तभी खेती मुनाफे का सौदा साबित होगी। किसानों को नई नई जानकारी मिलते रहे और कम लागत में उनकी आय में बढ़ोतरी हो यही मेरा मकसद है। इसी को देखते हुए मैं डिजिटल वेबसाइट के जरिए किसानों को सटीक एवं सही जानकारी देने का प्रयास करता हुं। हमारा तरीका सरल और समझने योग्य होता है, ताकि हमारे किसान भाइयों को आसानी से अच्छी-अच्छी जानकारी मिलती रहे और उन्हें किसी भी प्रकार की कोई तकलीफ ना हो। मैं पिछले 4 साल से किसानों के लिए कंटेंट लिख रहा हूं और यही चाहता हुं की मैं आगे भी ज्यादा से ज्यादा किसानों को नई नई जानकारी से अवगत करवाता रहूं।
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