मिडिल ईस्ट में चल रही जंग का भारतीय कृषि पर भी असर (US Iran War Impact) पड़ने वाला है आईए जानते हैं पूरी डिटेल..
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US Iran War Impact | मध्य एशिया में अमेरिका और इजरायल के द्वारा ईरान पर ताबड़तोड़ बम बरसाए जा रहे हैं। इस युद्ध का दूरगामी परिणाम भारत पर भी पढ़ने की संभावना व्यक्त की जाने लगी है। इस तनाव की बढ़ती आंच अब भारत के खाद्य तेल और उर्वरक कारोबार तक पहुंचती दिख रही है। इस तनाव US Iran War Impact के चलते भारतीय कृषि पर भी गंभीर असर पड़ेगा। इस तनाव का भारतीय कृषि पर क्या असर पड़ेगा एवं इसके चलते कौन-कौन से कृषि उत्पाद महंगे एवं सस्ते होने की संभावना है आईए जानते हैं..
उर्वरकों के कच्चे माल में होगी बढ़ोतरी | US Iran War Impact
सॉल्युबल फर्टिलाइजर इंडस्ट्री एसोसिएशन के अनुसार अमेरिका और ईरान के मध्य छिड़ी जंग के पश्चात खाड़ी क्षेत्र में बंदरगाहों पर बढ़ती अनिश्चितता से कंटेनरों की कमी और जाम की स्थिति बन सकती है। जिसके कारण उर्वरकों के कच्चे माल की पर्याप्त आपूर्ति में बाधा उत्पन्न होने लगी है।
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मालूम हो कि भारत अपनी सल्फर जरूरतों का बड़ा हिस्सा कतर, यूएई और ओमान से मंगाता है, जो डीएपी और एसएसपी जैसे उर्वरकों के उत्पादन में अहम कच्चा माल है। पर्याप्त मात्रा में कच्चे माल की आपूर्ति नहीं होने पर आने वाले खरीफ सीजन के दौरान सप्लाई चैन बाधित होने की संभावना बनने लगी है। विशेषज्ञ बताते हैं कि जून से शुरू होने वाले खरीफ बुवाई सीजन से पहले यदि सप्लाई चेन प्रभावित हुई तो घरेलू बाजार में दबाव बढ़ सकता है। : US Iran War Impact
महंगा होगा खाद्य तेल, सोयाबीन के बढ़ेंगे भाव
US Iran War Impact | गौरतलब है कि भारत हर साल करीब 1.6 करोड़ टन खाद्य तेल आयात करता है, जिसमें लगभग 20 प्रतिशत हिस्सेदारी सूरजमुखी तेल की है। इसकी आपूर्ति मुख्य रूप से रूस, यूक्रेन और अर्जेंटीना से होती है। अगर जहाजों को लाल सागर मार्ग से हटकर लंबा रास्ता अपनाना पड़ा तो खेपों में देरी और भाड़े में बढ़ोतरी तय मानी जा रही है।
अभी तक सीधा असर नहीं दिखा है, लेकिन उद्योग जगत हालात पर नजर बनाए हुए है। ऊर्जा लागत, मालभाड़ा और बायोफ्यूल बाजार आपस में जुड़े होने के कारण तेल कीमतों में उछाल का असर वनस्पति तेल बाजार पर भी पड़ता है। खाद्य तेल का भाव बढ़ने से सोयाबीन के भाव में बढ़ोतरी होने की संभावना व्यक्त की जाने लगी है। इसका असर भी दिखाई देने लगा है सोया प्लांटों ने सोयाबीन खरीदी के भाव में वृद्धि कर दी है। : US Iran War Impact
अफगानिस्तान के निर्यात पर भी पड़ेगा असर
मिडिल ईस्ट में अमेरिका एवं इजरायल की ईरान से चल रही जंग के साथ-साथ इस समय पाकिस्तान और अफगानिस्तान भी संघर्षरत है। पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच छिड़ी जंग और बढ़ते तनाव ने क्षेत्र में चिंता का माहौल बना दिया है। इसका असर सिर्फ सुरक्षा और राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यापार और जरूरी भारतीय सामानों के निर्यात पर भी पढ़ने लगा है। : US Iran War Impact
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भारत से अफगानिस्तान को खाद्यान्न से लेकर फल-सब्जी, मसाले, बीज और अन्य कृषि सामान बड़ी मात्रा निर्यात किया जाता है। अब जब पाकिस्तान और अफगानिस्तान देशों के बीच युद्ध जैसे हालात हो गए हैं, तो निर्यात पर नकारात्मक असर पड़ने लगा है। इससे व्यापार में रुकावट और कीमतों में बढ़ोतरी जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। निर्यात में रुकावट से इन सामानों के दाम में स्थानीय स्तर पर गिरावट दर्ज होगी।
यूरोप में निर्यात पर भी असर पड़ेगा | US Iran War Impact
इंडियन वेजिटेबल ऑयल प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (IVPA) ने संकेत दिया है कि डॉलर-रुपया विनिमय दर में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक तनाव निकट अवधि में अस्थिरता बनाए रख सकते हैं, वहीं निर्यात क्षेत्र भी अछूता नहीं है। भारत अपने ऑयलमील निर्यात का लगभग 20 प्रतिशत मध्य पूर्व और 15 प्रतिशत यूरोप भेजता है। अगर समुद्री मार्ग बाधित होते हैं तो कृषि, बागवानी और फूल से बने उत्पादों की खेपों पर भी असर पड़ सकता है।
उद्योग संगठनों ने यह दी चेतावनी
US Iran War Impact | मध्य पूर्व से गुजरने वाले समुद्री मार्गों पर शिपिंग कंपनियों ने एहतियातन अतिरिक्त शुल्क लगाना शुरू कर दिया है। फ्रांस की कंटेनर कंपनी CMA CGM ने इस क्षेत्र से गुजरने वाले कार्गो पर प्रति कंटेनर 2,000 से 4,000 डॉलर तक का आपातकालीन कॉन्फ्लिक्ट सरचार्ज लागू किया है।
इससे आयातकों की लागत सीधे बढ़ रही है और आगे बीमा प्रीमियम में इजाफा भी संभव माना जा रहा है। उद्योग संगठनों ने चेतावनी दी है कि अगर हालात लंबे समय तक बिगड़े रहे तो खाद्य तेल आयात, खासकर सूरजमुखी तेल, और खरीफ सीजन से पहले जरूरी उर्वरक कच्चे माल की आपूर्ति पर दबाव बढ़ सकता है। : US Iran War Impact
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