भारतीय गेहूं की अंतरराष्ट्रीय बाजार में वापसी, सरकार ने गेहूं के निर्यात को लेकर यह लिया निर्णय..

गेहूं के निर्यात (Wheat Export) पर रोक हटने का किसानों एवं आम लोगों पर क्या पड़ेगा असर जानिए…

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Wheat Export | भारत सरकार ने गेहूं के निर्यात पर लगी रोक हटाकर वैश्विक अनाज बाजार के लिए बड़ा फैसला लिया है। विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) की सोमवार को जारी अधिसूचना के अनुसार, अब भारत से गेहूं, ड्यूरम गेहूं, आटा और अन्य गेहूं उत्पादों के निर्यात की अनुमति होगी। सरकार के इस निर्णय से रूस-यूक्रेन युद्ध और काला सागर क्षेत्र में बढ़ते हमलों के कारण प्रभावित वैश्विक गेहूं आपूर्ति को राहत मिलने की उम्मीद है।

भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गेहूं उत्पादक देश है। ऐसे में भारतीय गेहूं की अंतरराष्ट्रीय बाजार में वापसी से एशिया, अफ्रीका और पश्चिम एशिया के उन देशों को विशेष लाभ मिल सकता है, जो गेहूं और गेहूं उत्पादों के लिए आयात पर निर्भर हैं। वैश्विक बाजार में आपूर्ति बढ़ने से कीमतों पर भी दबाव कम होने की संभावना जताई जा रही है।

2022 से लगी थी व्यापक रोक

भारत ने घरेलू खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने और देश में गेहूं की उपलब्धता बनाए रखने के उद्देश्य से वर्ष 2022 में गेहूं के निर्यात पर बड़े पैमाने पर प्रतिबंध लगाया था। उस समय वैश्विक स्तर पर खाद्य कीमतों में तेजी और घरेलू बाजार में गेहूं की उपलब्धता को लेकर चिंता के बीच सरकार ने निर्यात पर रोक का फैसला किया था। Wheat Export

हालांकि, सरकार समय-समय पर जरूरत के अनुसार कुछ देशों को सीमित मात्रा में गेहूं निर्यात की अनुमति देती रही। इस साल फरवरी में भी सीमित मात्रा में गेहूं भेजने की अनुमति दी गई थी। अब व्यापक स्तर पर निर्यात की अनुमति देकर सरकार ने अपनी निर्यात नीति में महत्वपूर्ण बदलाव किया है।

वैश्विक आपूर्ति पर युद्ध का असर

रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद से वैश्विक अनाज बाजार लगातार दबाव में रहा है। दोनों देश दुनिया के प्रमुख अनाज आपूर्तिकर्ताओं में शामिल हैं। काला सागर क्षेत्र से होने वाली आपूर्ति में किसी भी तरह की बाधा का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार पर पड़ता है। Wheat Export

हाल के दिनों में काला सागर क्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों और बंदरगाहों पर हमले बढ़ने से अनाज की आवाजाही प्रभावित हुई है। इससे प्रमुख निर्यातक देशों से आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ी है। बाजार में आपूर्ति बाधित होने की आशंका के बीच शिकागो गेहूं वायदा दो साल के उच्च स्तर तक पहुंच गया है।

ऐसे समय में भारत का निर्यात बाजार में अतिरिक्त गेहूं उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। भारत के पास पर्याप्त उत्पादन होने की स्थिति में घरेलू जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ कुछ मात्रा में अंतरराष्ट्रीय बाजार में आपूर्ति बढ़ाने की गुंजाइश बन सकती है। Wheat Export

रिकॉर्ड उत्पादन से बढ़ी उम्मीद

भारत में पिछली गेहूं पैदावार रिकॉर्ड स्तर पर रही है। देश में गेहूं का उत्पादन 12.06 करोड़ टन दर्ज किया गया था। उत्पादन का यह स्तर घरेलू खपत के साथ निर्यात की संभावनाओं को भी मजबूत करता है। Wheat Export

गेहूं भारत के प्रमुख रबी फसलों में शामिल है और देश की खाद्य सुरक्षा व्यवस्था में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। सरकार के लिए चुनौती यह होगी कि निर्यात बढ़ने के बावजूद घरेलू बाजार में गेहूं की पर्याप्त उपलब्धता बनी रहे और कीमतों में अनावश्यक तेजी न आए।

प्रतिबंध हटाने का लिया फैसला

सरकार का निर्यात प्रतिबंध हटाने का फैसला ऐसे समय आया है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। भारत से गेहूं की अतिरिक्त आपूर्ति मिलने पर आयातक देशों को वैकल्पिक स्रोत उपलब्ध होगा और उन्हें कुछ हद तक रूस तथा यूक्रेन से होने वाली आपूर्ति पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। Wheat Export

एशिया और अफ्रीका को मिलेगा फायदा

भारत के गेहूं निर्यात बढ़ाने के फैसले का सबसे अधिक असर उन देशों पर पड़ सकता है, जो नियमित रूप से बड़ी मात्रा में गेहूं का आयात करते हैं। एशिया, अफ्रीका और पश्चिम एशिया के कई देशों के लिए खाद्य सुरक्षा एक प्रमुख चुनौती बनी हुई है। Wheat Export

अंतरराष्ट्रीय बाजार में आपूर्ति के नए विकल्प बढ़ने से इन देशों के लिए खरीदारी करना आसान हो सकता है। यदि भारतीय गेहूं प्रतिस्पर्धी कीमत पर उपलब्ध रहता है तो आयातक देश अपने खाद्य भंडार को मजबूत करने के लिए भारत की ओर रुख कर सकते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, निर्यात नीति में बदलाव का असर केवल गेहूं तक सीमित नहीं रहेगा। आटा और अन्य गेहूं उत्पादों के निर्यात की अनुमति मिलने से भारतीय कृषि-आधारित प्रसंस्करण उद्योग और निर्यात कारोबार को भी बढ़ावा मिल सकता है। Wheat Export

घरेलू बाजार पर भी नजर

सरकार के इस फैसले के साथ घरेलू बाजार में गेहूं की कीमतों और उपलब्धता पर नजर रखना भी जरूरी होगा। पिछले वर्षों में निर्यात पर रोक लगाने का प्रमुख कारण घरेलू खाद्य सुरक्षा को प्राथमिकता देना था। अब निर्यात खोलने के बाद सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि अंतरराष्ट्रीय मांग बढ़ने का असर घरेलू उपभोक्ताओं पर अधिक न पड़े। Wheat Export

गेहूं सरकारी खाद्य भंडार और सार्वजनिक वितरण प्रणाली के लिए भी महत्वपूर्ण खाद्यान्न है। इसलिए निर्यात बढ़ाने के साथ पर्याप्त सरकारी स्टॉक और घरेलू आपूर्ति बनाए रखना नीति-निर्माताओं की प्राथमिकता होगी।

फिलहाल सरकार के फैसले से अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत की भूमिका फिर मजबूत होने की उम्मीद है। काला सागर क्षेत्र में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारतीय गेहूं की उपलब्धता वैश्विक खाद्य आपूर्ति के लिए एक महत्वपूर्ण वैकल्पिक स्रोत बन सकती है। यदि निर्यात सुचारु रूप से बढ़ता है, तो इससे भारतीय किसानों, निर्यातकों और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को लाभ मिलने के साथ-साथ दुनिया के कई आयातक देशों को भी राहत मिल सकती है। Wheat Export

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