बौना वायरस ने बढ़ाई धान की खेती करने वाले किसानाें की टेंशन, कृषि वैज्ञानिकों ने जारी की यह सलाह..

पिछले साल भारी नुकसान करने वाला Paddy Dwarf Virus इस वर्ष भी दिखाई देने लगा है। इसके नियंत्रण के लिए कृषि वैज्ञानिकों ने क्या सलाह जारी की, जानिए..

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Paddy Dwarf Virus | खरीफ सीजन के दौरान सबसे अधिक धान की खेती की जाती है। धान की हाइब्रिड किस्म में कुछ समय से एक वायरस लगातार नुकसान कर रहा है। पिछले वर्ष इस वायरस की चपेट में आने से धान की फसल को खासा नुकसान हुआ था। इस वर्ष भी यह वाइरस कई क्षेत्रों में दिखाई देने लगा है। इससे किसानों की टेंशन बढ़ गई है। इस वायरस का प्रका पी धीरे-धीरे बढ़ाने की संभावना जताई जा रही है। इसके नियंत्रण के लिए कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों के लिए जरूरी सलाह जारी की है, आईए जानते हैं पूरी डिटेल..

फैलने लगा यह वायरस | Paddy Dwarf Virus

कृषि वैज्ञानिक बताते हैं कि धान उत्पादक क्षेत्रों में एक बार फिर फिजी यानी ड्वार्फ (बौना) वायरस के मामले सामने आने लगे हैं। पिछले साल इस बीमारी से हुए भारी नुकसान के बाद इस बार भी किसानों की चिंता बढ़ गई है। कृषि और किसान कल्याण विभाग और चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, कौल के वैज्ञानिक प्रभावित क्षेत्रों का लगातार निरीक्षण कर रहे हैं और वायरस के फैलाव पर नजर रखे हुए हैं।

हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश के कई क्षेत्रों में इस वायरस (Paddy Dwarf Virus) के लक्षण मिलने की जानकारी सामने आई है। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के क्षेत्रीय निदेशक, राइस रिसर्च स्टेशन, कौल, डॉ. मेहर चंद ने बताया कि यह वायरस पहली बार वर्ष 2022 में क्षेत्र में दर्ज किया गया था। इसके बाद वर्ष 2025 में फिर सामने आया और अब एक बार फिर इसकी मौजूदगी देखी जा रही है।

Paddy Dwarf Virus | कृषि विभाग कर रहा निगरानी

इन राज्यों के कृषि विभाग ने इस वायरस के प्रति चिंता जताते हुए, इसकी निगरानी शुरू कर दी है। कृषि विभाग इन मामलों का सत्यापन कर रहा है। वहीं किसानों का कहना है कि कई खेतों में धान की खड़ी फसल प्रभावित होने लगी है। कुछ किसानों ने संक्रमण फैलने से रोकने के लिए रोपी गई धान की फसल तक नष्ट कर दी है। गौरतलब है कि पिछले साल हरियाणा के कैथल, करनाल, कुरुक्षेत्र, अंबाला, यमुनानगर और जींद में इस वायरस से धान की फसल को व्यापक नुकसान पहुंचा था। इसी वजह से इस बार शुरुआती मामलों ने किसानों की चिंता और बढ़ा दी है।

किसानों ने की वायरस के रोकथाम की मांग

Paddy Dwarf Virus | भारतीय किसान यूनियन के एक नेता ने कहा कि फिजी वायरस की दोबारा दस्तक से किसान चिंतित हैं। उन्होंने कहा कि पिछले साल इस बीमारी के कारण किसानों को भारी नुकसान हुआ था और इस बार भी धान की फसल प्रभावित होने लगी हैं। कुछ किसानों ने संक्रमित फसल को खुद ही नष्ट कर दिया है, उन्होंने सरकार से वायरस के फैलाव को रोकने के लिए तुरंत प्रभावी कदम उठाने की मांग की।

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Paddy Dwarf Virus | धान की रोपाई के बाद वायरस के दिखे लक्षण

कृषि वैज्ञानिक बताते हैं कि रोपाई से पहले कैथल जिले के 10 से 15 गांवों से धान की विभिन्न किस्मों के नमूने लेकर लैब में जांच की गई थी। इस जांच के दौरान वायरस नहीं मिला था, लेकिन रोपाई के बाद करीब 25 गांवों के निरीक्षण के दौरान कुछ खेतों में इस बीमारी जैसे लक्षण दिखाई दिए हैं। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिकों की टीमें पूरे प्रदेश में लगातार नमूनों की जांच कर रही हैं, ताकि संक्रमण की वास्तविक स्थिति का पता लगाया जा सके।

हाइब्रिड और जल्दी बोई धान में अधिक हो रहा असर

Paddy Dwarf Virus | कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक हाइब्रिड और जल्दी रोपी गई फसल में ज्यादा असर दिखाई दे रहा है। कृषि विश्वविद्यालय में कीट विज्ञान विभाग के सहायक वैज्ञानिक डॉ. सुमित सैनी ने बताया कि बीमारी के लक्षण मुख्य रूप से हाइब्रिड किस्मों और 20 जून से पहले रोपी गई धान की फसल में अधिक दिखाई दे रहे हैं। कृषि वैज्ञानिक बताते हैं कि इस वायरस से पौधों की बढ़वार रुक जाती है। पत्तियां गहरे हरे रंग की होकर सीधी खड़ी हो जाती हैं और जड़ें कमजोर व भूरे रंग की होने लगती हैं। इससे उत्पादन पर गंभीर असर पड़ सकता है।

मौसम बना वायरस के फैलाव की वजह | Paddy Dwarf Virus

विशेषज्ञों के अनुसार मई और जून में रुक-रुककर हुई बारिश, मध्यम तापमान और अधिक नमी के कारण व्हाइट-बैक्ड प्लांटहॉपर की संख्या तेजी से बढ़ी। यही कीट इस वायरस को फैलाने का प्रमुख माध्यम है। इसके अलावा हरा चारा, मक्का और पोएसी परिवार की अन्य घासें भी इस कीट के वैकल्पिक आश्रय स्थल बनती हैं।

Paddy Dwarf Virus | कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों के लिए जारी की यह सलाह

कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों से संक्रमित पौधों (Paddy Dwarf Virus) को तुरंत खेत से हटाने, खेतों और नर्सरी को खरपतवार व चारे वाली घासों से मुक्त रखने, जलभराव से बचने और उचित जल निकासी बनाए रखने की सलाह दी है। साथ ही व्हाइट-बैक्ड प्लांटहॉपर के नियंत्रण के लिए अनुशंसित कीटनाशकों का छिड़काव करने और खेतों की नियमित निगरानी करने को कहा गया है ताकि शुरुआती अवस्था में ही बीमारी पर नियंत्रण पाया जा सके।

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