संतुलित उर्वरक प्रबंधन से बढ़ेगा उत्पादन; कीट-रोगों की नियमित निगरानी जरूरी, किसान (Mustard cultivation) इन बातों का रखें ध्यान…
Mustard cultivation | रबी सीजन में सरसों की खेती की तैयारी कर रहे किसानों के लिए कृषि विभाग ने उन्नत उत्पादन तकनीक अपनाने की सलाह जारी की है। विभाग के अनुसार सरसों की अच्छी पैदावार के लिए क्षेत्र के अनुसार किस्म का चयन, समय पर बुवाई, संतुलित पोषण, उचित पौध संख्या, सिंचाई प्रबंधन तथा कीट-रोगों की समय पर रोकथाम बेहद महत्वपूर्ण है।
किसानों को सलाह दी गई है कि उर्वरक एवं पौध संरक्षण रसायनों का प्रयोग मिट्टी परीक्षण और वर्तमान स्वीकृत लेबल के अनुसार ही करें। संतुलित उर्वरक प्रबंधन से बढ़ेगा उत्पादन; कीट-रोगों की नियमित निगरानी जरूरी, किसान (Mustard cultivation) इन बातों का रखें ध्यान…
क्षेत्र के अनुसार किस्मों का करे चयन
कृषि विभाग ने सिंचित, असिंचित और सेम-ग्रस्त क्षेत्रों के लिए अलग-अलग किस्मों का चयन करने की सलाह दी है। सिंचित क्षेत्र में RH-1975, RH-0749, RH-1706, RGN-73, RGN-13 और लक्ष्मी (RH-8812) की बुवाई की जा सकती है। Mustard cultivation
असिंचित क्षेत्रों के लिए RH-1424, RH-725 और RH-761 उपयोगी किस्में बताई गई हैं। वहीं सेम-ग्रस्त क्षेत्रों के लिए CS-58, CS-60 और CS-62 किस्मों का चयन करने की सलाह दी गई है।
इन प्रमुख किस्मों में RH-1975 की अवधि 140–143 दिन तथा संभावित उपज 26–28 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक रहती है। इसमें तेल की मात्रा करीब 39.3 प्रतिशत है। Mustard cultivation
RH-1424 लगभग 139 दिन में तैयार होती है और संभावित उपज 26 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तथा तेल 40.5 प्रतिशत तक है। RH-725 की अवधि करीब 141 दिन, उपज 20 क्विंटल और तेल 40.2 प्रतिशत तथा RH-761 की अवधि 141 दिन, उपज 23 क्विंटल और तेल 40.4 प्रतिशत बताई गई है। वास्तविक उपज मिट्टी, मौसम और कृषि प्रबंधन पर निर्भर करेगी।
किसान समय पर करे बुवाई
सरसों की बुवाई के लिए 5 अक्टूबर से 20 अक्टूबर तक का समय बेहतर माना गया है। अक्टूबर माह में बुवाई की जा सकती है, जबकि अंतिम अवधि 10 नवंबर तक बताई गई है। कृषि विभाग ने चेताया है कि अत्यधिक देरी से बुवाई करने पर उत्पादन में कमी आ सकती है। इसलिए किसान खेत की तैयारी पूरी कर समय पर बुवाई करें। Mustard cultivation
बीज मात्रा और कतार दूरी का रखें ध्यान
सरसों की बुवाई में अत्यधिक बीज का प्रयोग करने से पौधों में प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है। विभाग ने 600–700 ग्राम बीज प्रति बीघा की मात्रा रखने तथा कतार से कतार की दूरी करीब 45 सेंटीमीटर यानी डेढ़ फुट रखने की सलाह दी है। बाद में खेत में पौधों की संख्या अधिक होने पर विरलीकरण करना भी जरूरी है। Mustard cultivation
बुवाई से पहले बीजोपचार जरूरी
बीजोपचार को सरसों की शुरुआती फसल सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण बताया गया है। सफेद रोली के प्रबंधन के लिए मेटालेक्सिल 35 एसडी का 6 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज की दर से तथा पेंटेड बग के लिए इमिडाक्लोप्रिड 70 डब्ल्यूएस का 5 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज की दर से बीजोपचार की सलाह दी गई है। रसायनों का प्रयोग करते समय वर्तमान स्वीकृत लेबल और स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह का पालन करना चाहिए। Mustard cultivation
गोबर के साथ संतुलित उर्वरक का प्रयोग करें
प्रति बीघा करीब 40 क्विंटल गोबर की खाद, 62.5 किलोग्राम SSP, 40 किलोग्राम यूरिया और 75 किलोग्राम जिप्सम देने की सलाह दी गई है। गोबर की खाद, SSP और जिप्सम की पूरी मात्रा तथा 20 किलोग्राम यूरिया बुवाई से पहले देने की बात कही गई है। Mustard cultivation
यूरिया की शेष मात्रा पहली सिंचाई के समय दी जा सकती है। SSP में करीब 16 प्रतिशत फास्फोरस, 11 प्रतिशत सल्फर और लगभग 21 प्रतिशत कैल्शियम होता है। इसे सीड-कम-फर्टिलाइजर ड्रिल से देने की सलाह दी गई है। उर्वरकों की वास्तविक मात्रा मिट्टी परीक्षण के आधार पर समायोजित की जानी चाहिए।
शुरुआत में ही खरपतवार नियंत्रण जरूरी
खरपतवार फसल के साथ पोषक तत्व, पानी और प्रकाश के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं। बुवाई के तुरंत बाद पेंडीमेथालिन 38.7 प्रतिशत CS की 485 मिलीलीटर अथवा पेंडीमेथालिन 30 प्रतिशत की 600 मिलीलीटर मात्रा को 150 लीटर पानी प्रति बीघा में प्रयोग करने की सलाह दी गई है। Mustard cultivation
वैकल्पिक रूप से अंतिम जुताई से पहले छिड़काव कर पाटा लगाने के बाद बुवाई की जा सकती है। इसके बाद आवश्यकता के अनुसार एक-दो बार गुड़ाई करने की सलाह है।
इसके साथ ही यदि खेत में पौधों की संख्या अधिक हो जाए तो समय रहते विरलीकरण करें। पौधे से पौधे की दूरी करीब 15 सेंटीमीटर यानी आधा फुट रखने की सलाह दी गई है। इससे पौधों को पर्याप्त हवा और सूर्य का प्रकाश मिल सकेगा तथा रोगों का खतरा कम करने में मदद मिलेगी। Mustard cultivation
फसल की जरूरत के अनुसार करें सिंचाई
तीन सिंचाई उपलब्ध होने पर पहली सिंचाई बुवाई के करीब 35–40 दिन बाद, दूसरी पहली सिंचाई के 35–40 दिन बाद तथा तीसरी फलियां बनना शुरू होने पर 30–35 दिन के अंतराल में करने की सलाह दी गई है। Mustard cultivation
दो सिंचाई की सुविधा होने पर करीब 40–45 दिन और 90–100 दिन पर सिंचाई की जा सकती है। भारी मिट्टी में आवश्यकता से अधिक सिंचाई न करने की सलाह दी गई है, क्योंकि इससे तना गलन का खतरा बढ़ सकता है।
कीटों की नियमित निगरानी
पेंटेड बग के नियंत्रण के लिए मैलाथियॉन 50 EC का 125 मिलीलीटर प्रति 125 लीटर पानी प्रति बीघा की दर से प्रयोग बताया गया है। लीफ माइनर और काला तेला दिखाई देने पर उपलब्ध स्वीकृत विकल्पों में से उपयुक्त कीटनाशक का चयन करने की सलाह दी गई है। विभाग ने कहा है कि कीटों के लक्षण दिखाई देते ही नियंत्रण उपाय शुरू किए जाएं, क्योंकि देर होने पर नियंत्रण कठिन हो सकता है। Mustard cultivation
रोग दिखाई दे तो तुरंत करें प्रबंधन
सफेद रोली/व्हाइट रस्ट के लिए मेटालेक्सिल तथा उसके बाद मेटालेक्सिल 4 प्रतिशत + मैनकोजेब 64 प्रतिशत के प्रयोग की सलाह दी गई है। झुलसा या ब्लाइट के लिए मैनकोजेब 75 WP का प्रयोग और 10–12 दिन बाद आवश्यकता होने पर दूसरा छिड़काव करने की बात कही गई है। Mustard cultivation
इन रसायनों का प्रयोग वर्तमान पंजीकृत फसल-रोग लेबल, निर्धारित मात्रा और प्रतीक्षा अवधि के अनुसार ही किया जाना चाहिए।
तना गलन से बचाव के उपाय
तना गलन में जलसिक्त धब्बे, सफेद रूई जैसी वृद्धि, पौधों का मुरझाना और तना टूटना जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। रोग के बीजाणु मिट्टी में कई वर्षों तक जीवित रह सकते हैं। बचाव के लिए स्वस्थ बीज, उचित सिंचाई, फसल चक्र, फसल अवशेषों का प्रबंधन तथा ट्राइकोडर्मा से भूमि उपचार की सलाह दी गई है। Mustard cultivation
भूमि उपचार के लिए 2.5 किलोग्राम ट्राइकोडर्मा को 50–100 किलोग्राम सड़ी-गली गोबर की खाद में मिलाकर छाया में रखा जाता है। मिश्रण को नम बनाए रखने के बाद बुवाई से पहले खेत की मिट्टी में मिलाने की सलाह दी गई है।
बारानी क्षेत्रों में सूखे की स्थिति में 13:00:45 उर्वरक का 1 प्रतिशत घोल तैयार कर फूल एवं फली अवस्था में एक-एक छिड़काव करने की सलाह दी गई है। छिड़काव सुबह या शाम के समय करना बेहतर बताया गया है। Mustard cultivation
किसानों के लिए कृषि विभाग ने बताएं ‘गोल्डन प्वाइंट’
कृषि विभाग ने किसानों से प्रमाणित और क्षेत्रानुकूल किस्म का चयन करने, 5 से 20 अक्टूबर के बीच समय पर बुवाई करने, अधिक बीज न डालने और उचित पौध संख्या रखने की अपील की है। Mustard cultivation
SSP एवं सल्फर सहित संतुलित पोषण, शुरुआती अवस्था में खरपतवार नियंत्रण, फूल और फली अवस्था में पर्याप्त नमी तथा कीट-रोगों की नियमित निगरानी को सफल सरसों उत्पादन की प्रमुख कुंजी बताया गया है।
विभाग के अनुसार समय पर बुवाई, संतुलित पोषण, उचित पौध संख्या, सही सिंचाई एवं समय पर कीट-रोग प्रबंधन अपनाकर सरसों की उत्पादकता में सुधार किया जा सकता है। Mustard cultivation
किसानों को किसी भी कीटनाशक या फफूंदनाशी के प्रयोग से पहले वर्तमान लेबल, फसल, कीट या रोग, निर्धारित मात्रा और प्रतीक्षा अवधि की जानकारी अवश्य जांचने तथा स्थानीय कृषि अधिकारी या कृषि विश्वविद्यालय की सलाह को प्राथमिकता देने की सलाह दी गई है।
कृषि योजना खेती किसानी, मंडी, भाव लेटेस्ट बिजनेस एवं टेक की जानकारी के लिए आप हमारे व्हाट्सएप चैनल को फॉलो कर सकते है।
व्हाट्सऐप चैनल से जुड़े।
ये भी पढ़े .. किसानों को इन टॉप 3 सरकारी योजनाओं से मिलेगा आर्थिक फायदा, कैसे आप भी उठा सकते है लाभ, जानिए..
केंद्र सरकार ने शुरू की समृद्ध गांव योजना, हर परिवार की जरूरत के अनुसार मिलेगा लाभ, देखें डिटेल…
कस्टम हायरिंग सेंटर योजना की लिस्ट हुई जारी, किन्हें मिला लाभ देखें..
प्रिय किसानों…! चौपाल समाचार में आपका स्वागत हैं, हम कृषि विशेषज्ञों कृषि वैज्ञानिकों एवं शासन द्वारा संचालित कृषि योजनाओं के विशेषज्ञ द्वारा गहन शोध कर Article प्रकाशित किये जाते हैं आपसे निवेदन हैं इसी प्रकार हमारा सहयोग करते रहिये और हम आपके लिए नईं-नईं जानकारी उपलब्ध करवाते रहेंगे। आप हमारे टेलीग्राम एवं व्हाट्सएप ग्रुप से नीचे दी गई लिंक के माध्यम से जुड़कर अनवरत समाचार एवं जानकारी प्राप्त करें।
नमस्कार किसान साथियों….
मेरा नाम जयदीप मालवीय है और मैं एक कॉलेज छात्र हुं। मुझे 10वीं से ही खेती किसानी पर कंटेंट लिखने में गहरी रुचि है। साथियों, हम देखते है कि कई किसान भाइयों को खेती में कम उत्पादन एवं लागत ज्यादा आती है, जिससे उन्हें मुनाफा कम होता है। इसका प्रमुख कारण अभी भी खेती का परंपरागत तरीका अपनाया जाना है। किसान साथी खेती के परंपरागत तरीके से निकल कर आधुनिक तरीके अपनाएं, तभी खेती मुनाफे का सौदा साबित होगी। किसानों को नई नई जानकारी मिलते रहे और कम लागत में उनकी आय में बढ़ोतरी हो यही मेरा मकसद है। इसी को देखते हुए मैं डिजिटल वेबसाइट के जरिए किसानों को सटीक एवं सही जानकारी देने का प्रयास करता हुं। हमारा तरीका सरल और समझने योग्य होता है, ताकि हमारे किसान भाइयों को आसानी से अच्छी-अच्छी जानकारी मिलती रहे और उन्हें किसी भी प्रकार की कोई तकलीफ ना हो। मैं पिछले 4 साल से किसानों के लिए कंटेंट लिख रहा हूं और यही चाहता हुं की मैं आगे भी ज्यादा से ज्यादा किसानों को नई नई जानकारी से अवगत करवाता रहूं।
आपके साथ के लिए धन्यवाद …





