सरकार ने गेहूं खरीदी (Wheat Procurement) के मानकों में बदलाव किया है आईए जानते हैं सरकार द्वारा जारी नई गाइडलाइन..
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Wheat Procurement | मार्च एवं अप्रैल माह के दौरान राजस्थान, मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश सहित देश के कई राज्यों में बे मौसम बारिश, ओलावृष्टि का दौर चला था जिसके कारण गेहूं सहित अन्य रबी फसलों को खासा नुकसान हुआ। इस बे मौसम की बारिश के कारण गेहूं की फसल का दाना खराब हुआ और गेहूं के दोनों की चमक भी प्रभावित हुई यही कारण है कि केंद्र सरकार ने गेहूं खरीदी के मानक में शिथिल किए हैं।
बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि से प्रभावित गेहूं की उपज खरीदने (Wheat Procurement) के लिए केंद्र सरकार ने खरीद के मानकों में शिथिलता के आदेश जारी किए हैं। इससे किसानों को बड़ी राहत मिली है। सरकार द्वारा जारी की गई नई गाइडलाइन देखें..
गेहूं खरीदी के दौरान इन 6 मानकों पर होती है जांच
Wheat Procurement | केंद्र सरकार द्वारा पूर्व में जारी की गई गाइडलाइन के अनुसार बाहरी तत्व, अन्य खाधान, टूटा दाना, टूटा खाद्यान, सिकुड़ा टूटा दाना व विवेल्ड ग्रेन्स आदि मानक जांचे जाते हैं। कृषि अधिकारियों का मानना है कि असमय बारिश और नमी बढ़ने से गेहूं के दाने पूरे विकसित नहीं हो पाते है। कटाई के समय मौसम खराब रहने से दानों में चमक और भराव फिलिंग कम रह गई। इससे दाना पतला और हल्का रह गया। खेतों में नमी और समय पर सुखाई नहीं होने से भी दानों की गुणवत्ता बिगड़ी।
सरकार ने गेहूं खरीदी में यह दी छूट | Wheat Procurement
देश के कई राज्यों में इस समय रबी विपणन वर्ष 2026-27 के तहत न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी हो रही है। इस वर्ष बेमौसम बारिश व ओलावृष्टि के चलते गेहूं की फसल खराब हो गई। जिसके चलते गेहूं की गुणवत्ता व चमक खराब होने से किसान चिंतित हो उठे। किसानों की इसी पीड़ा को देखते हुए केंद्र सरकार ने खरीदी के नियमों में शिथिलता दी है।
केंद्र सरकार ने गेहूं की गुणवत्ता में आई गिरावट को ध्यान में रखते हुए चमक में कमी की सीमा 50 प्रतिशत तक कर दी है। सिकुड़े व टूटे दानों की सीमा 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत की है। इसी तरह क्षतिग्रस्त और आंशिक क्षतिग्रस्त दानों की सीमा 6 प्रतिशत निर्धारित की गई है। इस निर्णय से उन किसानों को राहत मिलेगी, जिनकी फसल बे मौसम बारिश के कारण प्रभावित हुई है। : Wheat Procurement
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इधर किसान अभी भी परेशान, स्लॉट नहीं हो रहे बुक
Wheat Procurement | केंद्र सरकार ने भले ही खरीदी से मानकों में छूट प्रदान कर दी हो, लेकिन इसके बावजूद किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीदी के दौरान अभी भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मध्य प्रदेश में स्लॉट की बुकिंग के दौरान किसानों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। पर्याप्त मात्रा में वेयरहाउस खाली नहीं होने के कारण यह समस्या आ रही है।
राज्य सरकार ने वर्तमान में स्लॉट की बुकिंग छोटे किसानों के लिए उपलब्ध कराई है लेकिन छोटे किसानों को भी Wheat Procurement स्लॉट बुकिंग के दौरान समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर 10 बीघा से अधिक के खाते वालों किसानों के स्लॉट बुक नहीं हो रहे हैं। मालूम हो कि राज्य सरकार इस बार सरकार छोटे किसानों को खरीदी में प्राथमिकता दे रही है छोटे 10 बीघा से कम की कृषि भूमि वाले किसानों के स्लॉट बुक हो रहे हैं।
इसके अतिरिक्त सरकार ने प्रति बिघा उपज खरीदी के लिए सीमा निर्धारित कर दी है। बताया जा रहा है कि प्रति बिघा 8.50 क्विंटल गेहूं अर्थात प्रति हेक्टेयर 42.5 क्विंटल गेहूं की ही खरीदी न्यूनतम समर्थन मूल्य पर की जाएगी। : Wheat Procurement
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नमस्कार किसान साथियों….
मेरा नाम जयदीप मालवीय है और मैं एक कॉलेज छात्र हुं। मुझे 10वीं से ही खेती किसानी पर कंटेंट लिखने में गहरी रुचि है। साथियों, हम देखते है कि कई किसान भाइयों को खेती में कम उत्पादन एवं लागत ज्यादा आती है, जिससे उन्हें मुनाफा कम होता है। इसका प्रमुख कारण अभी भी खेती का परंपरागत तरीका अपनाया जाना है। किसान साथी खेती के परंपरागत तरीके से निकल कर आधुनिक तरीके अपनाएं, तभी खेती मुनाफे का सौदा साबित होगी। किसानों को नई नई जानकारी मिलते रहे और कम लागत में उनकी आय में बढ़ोतरी हो यही मेरा मकसद है। इसी को देखते हुए मैं डिजिटल वेबसाइट के जरिए किसानों को सटीक एवं सही जानकारी देने का प्रयास करता हुं। हमारा तरीका सरल और समझने योग्य होता है, ताकि हमारे किसान भाइयों को आसानी से अच्छी-अच्छी जानकारी मिलती रहे और उन्हें किसी भी प्रकार की कोई तकलीफ ना हो। मैं पिछले 4 साल से किसानों के लिए कंटेंट लिख रहा हूं और यही चाहता हुं की मैं आगे भी ज्यादा से ज्यादा किसानों को नई नई जानकारी से अवगत करवाता रहूं।
आपके साथ के लिए धन्यवाद …






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