एमपी के किसान MSP पर गेहूं खरीदी MP Wheat Purchases शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं स्लॉट की बुकिंग एवं आगे खरीदी के लिए क्या रहेगी प्रक्रिया जानिए..
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MP Wheat Purchases | न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर गेहूं बेचने के इंतजार में बैठे प्रदेश के किसानों के लिए बड़ा झटका लग सकता है बताया जा रहा है कि प्रदेश में एक बार फिर गेहूं खरीदी की तारीख बढ़ाने वाली है।
इसके पहले प्रदेश सरकार ने तय किया था कि 1 अप्रैल से भोपाल, इंदौर, उज्जैन एवं नर्मदापुरम संभाग में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीदी शुरू होगी। वहीं प्रदेश सरकार द्वारा निर्णय लिया गया था कि प्रदेश के बाकी संभागों जबलपुर, ग्वालियर, रीवा, शहडोल, चंबल और सागर संभाग में 7 अप्रैल से गेहूं की खरीदी का कार्य शुरू किया जाएगा। लेकिन सरकार द्वारा तय की गई तारीख पर खरीदी शुरू होने की संभावना बहुत ही कम लग रही है, इसके लिए मंगलवार 31 मार्च को नई तारीखों का ऐलान हो सकता है।
पूर्व में भोपाल, इंदौर, उज्जैन एवं नर्मदापुरम संभाग में संभागों में गेहूं उपार्जन 16 मार्च से 5 मई के बीच किया जाना प्रस्तावित था। वहीं जबलपुर, ग्वालियर, रीवा, शहडोल, चंबल और सागर संभाग में एमएसपी पर गेहूं का उपार्जन 23 मार्च से 12 मई के बीच होना थी। MP Wheat Purchases
ऐसे में किसानों के बीच यह जिज्ञासा बढ़ गई है कि मध्य प्रदेश में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी का कार्य कब से शुरू होगा एवं क्या रहेगी आगे की प्रक्रिया, इसी संबंध में आइए जानते हैं पूरी डिटेल..
गेहूं उपार्जन की तैयारियां पूर्ण नहीं हो पाई
सूत्रों का कहना है कि सरकार गेहूं उपार्जन की तैयारियां पूरी नहीं कर पाई, इसलिए उपार्जन की तारीख आगे बढ़ाने की संभावना बढ़ गई है। बता दें कि केंद्र सरकार ने इस साल गेहूं की खरीदी का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2585 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया है। मप्र सरकार किसानों को 40 रुपए प्रति क्विंटल बोनस देगी। इस तरह मप्र में गेहूं का उपार्जन 2625 रुपए प्रति क्विंटल किया जाएगा। MP Wheat Purchases
इस बार मप्र को कुल 78 एलएमटी खरीदी करनी है। कुल 356 लाख मीट्रिक टन गेहूं का उत्पादन प्रदेश में हुआ है। स्टोरेज के लिए बैग की कमी के बीच गेहूं खरीदी पर संशय बना हुआ है। जूट के कच्चे माल की कमी बनी हुई है। जबकि पीपी बैग्स भी एलपीजी संकट के चलते कम सप्लाई में हैं।
जानकारी के मुताबिक मुख्यमंत्री आवास में हुई बैठक में निर्णय हुआ कि मंगलवार को 4 मंत्रियों के कोर कमेटी चर्चा कर अंतिम निर्णय लेगी। MP Wheat Purchases
31 मार्च को गेहूं खरीदी पर होगा निर्णय
प्रदेश में 1 अप्रैल से शुरू होने वाली गेहूं की खरीदी में अभी संशय बना हुआ है। अभी तक खरीद केंद्रों पर जाने के लिए किसानों की ई उपार्जन पोर्टल पर स्लॉट बुकिंग शुरू नहीं हुई है। MP Wheat Purchases
गेहूं खरीदी को लेकर सीएम आवास में हुई मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली बैठक में भी चर्चा हुई। इसमें खरीद की तारीख आगे बढ़ाने से लेकर खरीदी की लिमिट तय करने तक अलग-अलग मुद्दों पर चर्चा हुई।
इस बैठक में कोई निर्णय नहीं हुआ और अब चार मंत्रियों की कोर कमेटी गेहूं खरीदी पर मंगलवार को चर्चा कर निर्णय करेगी। इस कमेटी में मंत्री गोविंद सिंह राजपूत, कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना, राजस्व मंत्री कारण सिंह वर्मा और परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह सदस्य हैं। MP Wheat Purchases
गेहूं खरीदी पर तय हो सकती है लिमिट
खाद्य विभाग ने 26 मार्च को 4 करोड़ सिंगल यूज जूट बैग के लिए टेंडर जारी किया है। चूंकि सिंगल यूज बैग की खरीदी प्रक्रिया अभी शुरू हुई है, इसलिए भोपाल, इंदौर, नर्मदापुरम और उज्जैन संभाग में 1 अप्रैल से प्रस्तावित खरीदी की तारीख आगे बढ़ सकती है। MP Wheat Purchases
वर्तमान में उपलब्ध 5.50 करोड़ बैग और सिंगल यूज बैग मिल जाने पर 50 लाख टन तक खरीदी और भंडारण संभव होगा। वहीं शासन स्तर पर स्टील साइलो की क्षमता बढ़ाने के प्रयास भी किए जा रहे हैं।
इससे बारदानों की जरूरत कम होगी और अनाज सुरक्षित भंडारित किया जा सकेगा। अभी एमपी समेत पंजाब, हरियाणा, बिहार और उत्तर प्रदेश में स्टील साइलो का उपयोग किया जा रहा है। MP Wheat Purchases
यदि यह आंकड़ा 70 लाख टन से ऊपर जाता है तो मुश्किलें बढ़ेंगी। इसी कारण सरकार बड़े किसानों से लिमिट में खरीदी करने पर विचार कर रही है, ताकि कुछ अनाज उनके पास सुरक्षित रह सके। शासन स्तर पर इसका विचार शुरू हो गया है। एमपी में बड़े व मध्यम श्रेणी के किसानों से गेहूं खरीदी की सीमा तय हो सकती है।
यह 25% या इससे ज्यादा भी होने की संभावना है। इसके पीछे बड़ी वजह यह है कि मप्र के पास खरीदे गए अनाज को स्टोर करने के लिए बोरियां नहीं हैं। वर्तमान में 5.50 करोड़ बोरियां (बारदाने) उपलब्ध हैं, जबकि गेहूं खरीद के अनुमान के हिसाब से 15.60 करोड़ बोरियों की जरूरत है। MP Wheat Purchases
19 लाख से ज्यादा किसानों ने कराया रजिस्ट्रेशन
खरीदी के लिए किसानों का पंजीयन यानी रजिस्ट्रेशन 7 फरवरी से 10 मार्च तक किया गया था। इस अवधि में कुल 19 लाख 4 हजार 651 किसानों ने पंजीयन कराया, जो पिछले वर्ष के 15 लाख 44 हजार किसानों की तुलना में काफी अधिक है। MP Wheat Purchases
मालूम हो कि निजी बाजार में गिरते दामों के बीच बड़ी संख्या में किसान सरकारी एमएसपी की ओर झुकाव दिखा रहे हैं। यही वजह है कि खरीदी प्रक्रिया में किसानों की भागीदारी बढ़ी है।
जिलेवार आंकड़ों पर नजर डालें तो उज्जैन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा और देवास जैसे जिलों में बड़ी संख्या में किसानों ने पंजीयन कराया हैं, वहीं इंदौर, धार, खरगोन, शाजापुर, सागर, रायसेन और जबलपुर सहित कई अन्य जिलों में भी हजारों किसान खरीदी प्रक्रिया में शामिल होने के लिए आगे आए हैं। MP Wheat Purchases
राजस्थान में 2735 रु. क्विंटल के भाव पर खरीदी हुई शुरू
राजस्थान में समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीद की खरीद 16 मार्च से शुरू हो चुकी है। अतिरिक्त खाद्य आयुक्त पूनम प्रसाद सागर की ओर से जारी आदेश के अनुसार गेहूं की खरीद पूर्व में 10 मार्च से प्रस्तावित थी, MP Wheat Purchases
लेकिन अभी तक गेहूं की फसल खेतों में ही होने से खरीद तिथि में बदलाव कर 16 मार्च से खरीद करने का निर्णय किया गया। इस बार गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2585 रुपए प्रति क्विंटल तय किया गया है। राज्य बजट में 150 रुपए बोनस की घोषणा भी की गई है, जिससे कुल कीमत 2735 रुपए प्रति क्विंटल किसानों को मिलेगी।
गेहूं खरीदी ; 303 लाख टन का लक्ष्य तय
भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के अनुसार केंद्रीय पूल के लिए किसानों से गेहूं की खरीद आमतौर पर 1 अप्रैल 2026 से शुरू होगी, हालांकि कुछ राज्यों में मार्च से ही खरीदी प्रक्रिया आरंभ हो चुकी है। इस बार देशभर में कुल 303 लाख टन गेहूं खरीदने का लक्ष्य तय किया गया है, जिसमें सबसे अधिक योगदान पंजाब और मध्य प्रदेश का रहेगा। MP Wheat Purchases
पंजाब में 122 लाख टन, मध्य प्रदेश में 78 लाख टन और हरियाणा में 72 लाख टन खरीद का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा राजस्थान में 21 लाख टन, उत्तर प्रदेश में 10 लाख टन, बिहार में 18 हजार टन, जम्मू-कश्मीर में 10 हजार टन, गुजरात में 4 हजार टन, हिमाचल प्रदेश में 3 हजार टन तथा उत्तराखंड में 1 हजार टन गेहूं खरीदी का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
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नमस्कार किसान साथियों….
मेरा नाम जयदीप मालवीय है और मैं एक कॉलेज छात्र हुं। मुझे 10वीं से ही खेती किसानी पर कंटेंट लिखने में गहरी रुचि है। साथियों, हम देखते है कि कई किसान भाइयों को खेती में कम उत्पादन एवं लागत ज्यादा आती है, जिससे उन्हें मुनाफा कम होता है। इसका प्रमुख कारण अभी भी खेती का परंपरागत तरीका अपनाया जाना है। किसान साथी खेती के परंपरागत तरीके से निकल कर आधुनिक तरीके अपनाएं, तभी खेती मुनाफे का सौदा साबित होगी। किसानों को नई नई जानकारी मिलते रहे और कम लागत में उनकी आय में बढ़ोतरी हो यही मेरा मकसद है। इसी को देखते हुए मैं डिजिटल वेबसाइट के जरिए किसानों को सटीक एवं सही जानकारी देने का प्रयास करता हुं। हमारा तरीका सरल और समझने योग्य होता है, ताकि हमारे किसान भाइयों को आसानी से अच्छी-अच्छी जानकारी मिलती रहे और उन्हें किसी भी प्रकार की कोई तकलीफ ना हो। मैं पिछले 4 साल से किसानों के लिए कंटेंट लिख रहा हूं और यही चाहता हुं की मैं आगे भी ज्यादा से ज्यादा किसानों को नई नई जानकारी से अवगत करवाता रहूं।
आपके साथ के लिए धन्यवाद …





