अधिक पैदावार के लिए किसानों को कपास की बुवाई किस पद्धति (Cotton Sowing Method) के आधार पर करना चाहिए, जानिए..
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Cotton Sowing Method | मई माह के मध्य तक किसान कपास की बुवाई कर सकते हैं। इसके लिए केवल प्रमाणित और उपचारित बीज ही इस्तेमाल करें। बिजाई से पहले फफूंदनाशक और कीटनाशक से बीज उपचार जरूर करें। खेत को अच्छी तरह जोतकर भुरभुरी मिट्टी बनाएं। कतारों में बुवाई करें, इससे देखभाल आसान होती है। पहली सिंचाई हल्की रखें और जलभराव से बचें।
कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि जैविक खाद के साथ अनुशंसित उर्वरक मात्रा अपनाएं। शुरुआती 30-40 दिनों में खेत को खरपतवार मुक्त रखें। शुरुआती अवस्था में रस चूसक कीटों पर विशेष नजर रखें और समय पर नियंत्रण करें। इसके अलावा किसान साथी यह बुवाई की यह तकनीक अपनाकर अधिक पैदावार ले सकते हैं, जानिए पूरी डिटेल..
कपास की बिजाई से पहले बीज उपचार करें
बीटी कपास की बुवाई के लिए आने वाला उचित समय है। बुवाई का काम किसानों को 20 मई तक पूरा कर लेना चाहिए ताकि फसल को अनुकूल वातावरण मिल सके और उत्पादन बेहतर हो। Cotton Sowing Method
बढ़िया पैदावार के लिए कपास बीज को उपचारित करना जरूरी है। इसके लिए एक ग्राम स्ट्रेप्टोसाइक्लिन, एक ग्राम व्यापारिक गंधक और 10 लीटर पानी के घोल में कपास का बीज डालें। रोयेदार बीज की मात्रा 5-6 किलोग्राम होनी चाहिए और इसे करीब 6-8 घंटे तक घोल में रखें। बिना रोयेदार बीज की 6-8 किलोग्राम मात्रा को दो घंटे तक घोल में डालें। Cotton Sowing Method
कृषि वैज्ञानिक बताते हैं कि दीमक की समस्या वाले क्षेत्रों में 10 एमएल क्लोरोपाइरीफॉस 20 ईसी और 10 एमएल पानी प्रति किलो बीज की दर से मिलाकर थोड़ा-थोड़ा बीज पर छिड़काव करें। इसके बाद बीज को अच्छी तरह से मिलाएं और 30-40 मिनट तक बीज को छाया में सुखाकर बुवाई करें। Cotton Sowing Method
कपास बुवाई इस तरीके से मिलेगी अधिक पैदावार
कृषि वैज्ञानिक बताते हैं कि कपास की बुवाई बीज – उर्वरक संयुक्त ड्रिल या प्लांटर से करें। या एक कतार वाली ड्रिल से बीज को 4-5 सेंटीमीटर गहरा बोएं। कतार से कतार की दूरी 675 सेमी और पौधे से पौधे की दूरी 30 सेंटीमीटर रखें। Cotton Sowing Method
संकर और बीटी कपास की बुवाई के लिए कतार से कतार की दूरी 675 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 60 सेमी. रखें या कतार से कतार की दूरी 100 सेमी और पौधे से पौधे की दूरी 45 सेंटीमीटर करें।
कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक पछेती बुवाई में पौधों की दूरी कम और बीज ज्यादा करना चाहिए। बुवाई के समय कतारों का भी विशेष ध्यान रखें। पूर्व से पश्चिम की दिशा में कतारों में बोई गई कपास उत्तर से दक्षिण दिशा में बोई गई कपास के मुकाबले ज्यादा पैदावार देती है । Cotton Sowing Method
नरमा की बिजाई के लिए खाद प्रबंधन
गेहूं की कटाई के बाद जिन खेतों में नरमा की बिजाई करनी है तो खेत तैयार कर लें। खेत में 38 किलोग्राम यूरिया व 75 किलोग्राम सुपरफास्फेट प्रति एकड़ बो दें और रेतीली जमीन में 10 किलोग्राम जिंक सल्फेट बिजाई के समय अवश्य डालें। Cotton Sowing Method
देसी कपास में 22 किलोग्राम प्रति एकड़ यूरिया 45 दिन बाद डालें। 22 किलोग्राम प्रति एकड़ यूरिया 75 दिन बाद डालें। हाईब्रिड कपास में बिजाई के समय 50 किलोग्राम यूरिया, 150 किलोग्राम सिंगल सुपर फास्फेट, 40 किलोग्राम म्यूरेट ऑफ पोटाश व 10 किलोग्राम जिंक सल्फेट ड्रिल करें। इसके बाद 50 किलोग्राम यूरिया बिजाई के 45 दिन बाद व 50 किलोग्राम यूरिया बिजाई के 75 दिन बाद डालें।
भूमि एवं बीजजनित बीमारियों से बचाव के लिए बोने से पहले बीज का उपचार कर लें। उपचार के लिए 10 लीटर पानी में 1 जहां जमीन रेतीली हैं, वहां बीकानेरी नरमा जैसी उन्नत किस्मों एच एस 6 एच 1098 एच 1117, एच 1226, एच 1098, एच 1236, एच 1300 व संकर किस्म एचएचएच 223 व एचएचएच 287 बोने की सिफारिश की जाती है। Cotton Sowing Method
देसी कपास की बिजाई के लिए एचडी-107, एचडी 123, एचडी 324, एचडी – 432 व संकर किस्म एएएच-1 बोएं। इसके अतिरिक्त केवल अनुमोदित की गई बीटी. संकर किस्में ही लगाएं।
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नमस्कार किसान साथियों….
मेरा नाम जयदीप मालवीय है और मैं एक कॉलेज छात्र हुं। मुझे 10वीं से ही खेती किसानी पर कंटेंट लिखने में गहरी रुचि है। साथियों, हम देखते है कि कई किसान भाइयों को खेती में कम उत्पादन एवं लागत ज्यादा आती है, जिससे उन्हें मुनाफा कम होता है। इसका प्रमुख कारण अभी भी खेती का परंपरागत तरीका अपनाया जाना है। किसान साथी खेती के परंपरागत तरीके से निकल कर आधुनिक तरीके अपनाएं, तभी खेती मुनाफे का सौदा साबित होगी। किसानों को नई नई जानकारी मिलते रहे और कम लागत में उनकी आय में बढ़ोतरी हो यही मेरा मकसद है। इसी को देखते हुए मैं डिजिटल वेबसाइट के जरिए किसानों को सटीक एवं सही जानकारी देने का प्रयास करता हुं। हमारा तरीका सरल और समझने योग्य होता है, ताकि हमारे किसान भाइयों को आसानी से अच्छी-अच्छी जानकारी मिलती रहे और उन्हें किसी भी प्रकार की कोई तकलीफ ना हो। मैं पिछले 4 साल से किसानों के लिए कंटेंट लिख रहा हूं और यही चाहता हुं की मैं आगे भी ज्यादा से ज्यादा किसानों को नई नई जानकारी से अवगत करवाता रहूं।
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