सोयाबीन में गर्डल बीटल, स्टेम पलाई, हरा सेमीलूपर, तम्बाकू इल्ली और कीटों पर नियंत्रण के लिए (Soybean Crop First Spray) पहला स्प्रे क्या करें, जानें..
Soybean Crop First Spray | सोयाबीन की खेती किये जाने वाले क्षेत्रों में बोवनी की तिथियों में भिन्नता होने से इस समय कई स्थानों पर सोयाबीन 30-35 दिन की होने को हो चुकी है, वहीं कुछ स्थानों पर अभी यह 20 से 25 दिनों की अवस्था की है। कुछ क्षेत्रों में वर्षा हो रही हैं जबकि कुछ क्षेत्रों में पर्याप्त वर्षा नहीं होने से फसल की बढवार अपेक्षाकृत नहीं हैं। जहा सबसे पहले बोवनी हुयी, इस सप्ताह फूल आने की अवस्था में होगी।
ऐसी स्थिति में कीट/रोग/खरपतवार नियंत्रण के उपायों के साथ साथ अन्य सुरक्षात्मक उपाय अपनाने की सलाह कृषि वैज्ञानिकों द्वारा दी जा रही हैं। सोयाबीन की फसल में पहले स्प्रे (Soybean Crop First Spray) के दौरान किन दवाइयों का इस्तेमाल करें और सोयाबीन की फसल की देखरेख के संबंध में किन बातों का विशेष ध्यान रखें आइए जानते हैं..
सूखे की स्थिति में यह स्प्रे करें
कृषि वैज्ञानिक बताते हैं कि इस समय मध्य प्रदेश के कई जिलों में पर्याप्त बारिश नहीं हुई है, जिसके कारण सोयाबीन की फसल को नुकसान पहुंचाने का अंदेशा बना चुका है। ऐसे में किसान साथी 20-25 दिन की फसल में थायोयूरिया (Thiourea) का 750 पीपीएम (750 ppm) घोल बनाकर पर्णीय छिड़काव करें। मिट्टी में उपलब्ध नमी एवं मौसम की स्थिति को ध्यान में रखते हुए भूमी में दरारे पड़ने से पूर्व ही अनुसार स्प्रिंकलर, टपक सिंचाई या परंपरागत विधियों से सिंचाई करें।(Soybean Crop First Spray)
कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक सूखे की स्थिति के दौरान लोह तत्व की अनुपलब्धता से सोयाबीन की उपरी पत्तियाँ पीली हो सकती हैं, जो वर्षा आने पर पूर्ववत हो सकेगा. अधिक तीव्रता होने पर 1% फेरस सल्फेट+0.2% चुना (प्रति लीटर पानी में 10 ग्राम फेरस सल्फेट + 2 ग्रा. चुना) मिलाकर फसल पर छिडकाव करें।(Soybean Crop First Spray)
तना मक्खी के नियंत्रण के लिए यह करें
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार सोयाबीन की फसल में इस समय तना मक्खी/सफ़ेद मक्खी का देखा जा रहा हैं। अतः इसके नियंत्रण हेतु लक्षण दिखाई देने पर बाजार में उपलब्ध पूर्वमिश्रित कीटनाशक थायोमिथोक्सम 12.60% + लैम्ब्डा सायहेलोथ्रिन 09.50% जेड.सी. @125 मिली./हे. या पूर्वमिश्रित कीटनाशक बीटासायफ्लुथ्रिन इमिडाक्लोप्रिड (350 मिली./हे.) या आइसोसायक्लोसरम 9.2 WW.DC (10% W/V) DC (600 मिली/हे.) का छिड़काव करें।(Soybean Crop First Spray)
सेमीलूपर इल्ली के नियंत्रण हेतु निम्न में से किसी भी एक रसायन का छिडकाव करें : क्लोरएन्ट्रानिलिप्रोल 18.5 एस.सी, (150 मि.ली./हे) या इमामेक्टिन बेंजोएट 01.90 (425 मि.ली./हे), या फ्लूवेंडियामाइड 20डब्ल्यू. जी (250-300 ग्राम/हे) या फ्लूबेंडियामाइड 39.35 एस.सी (150 मि.ली.) या इंडोक्साकार्य 15.8 एस. सी (333 मि.ली/हे), या लैम्बडा सायहेलोथ्रिन 04.90 सी. एस. (300 मिली/हे) या प्रोफेनोफॉस 50ई.सी. (1 ली/हे) या नोवाल्युरोन इन्डोक्साकार्ब 04.50% एस. सी. (825-875 मिली/हे) या क्लोरएन्ट्रानिलित्रोल 09.30 % + लैम्बडा सायहेलोथ्रिन 04.60% ZC, (200 मिली/हे) या ब्रोफ्लानिलाइड 300 g/l एस.सी. (42-62 ग्राम/हे) का छिडकाव करें।(Soybean Crop First Spray)
पीला मोज़ेक बीमारी से निपटने के लिए यह करें
पीला मोज़ेक/सोयाबीन मोज़ेक रोग के लक्षण दिखने पर प्रारंभिक अवस्था में ही रोगग्रस्त पौधों को खेत से उखाड़कर निष्कासित करें तथा इन रोगों को फैलाने वाले वाहक सफ़ेद मक्ख/एफिड की रोकथाम हेतु थायोमिथोक्सम लैम्ब्डा सायहेलोथ्रिन (125 मिली/हे) या बीटासायफ्लुथ्रिन इमिडाक्लोप्रिड (350 मिली/हे) या एसिटेमीप्रीड 25%+ बायफेंथ्रिन 25% WG (250 ग्रा./हे) का छिडकाव करें। इनके छिड़काव से तना मक्खी का भी नियंत्रण किया जा सकता है।(Soybean Crop First Spray)
यह भी सलाह है कि सफ़ेद मक्खी के नियंत्रण हेतु कृषकगण अपने खेत में विभिन्न स्थानों पर पीला स्टिकी ट्रैप लगाएं। वहीं 15 दिन की सोयाबीन फसल में यां नवजात पौधों में कॉलर रॉट या गरदनी सडन और रायजोक्टोनिया जड़ सडन नामक रोग का संक्रमण देखा जा रहा हैं। किसानों को सलाह हैं कि कृपया कार्बेन्डाजिम 50% (500 ग्राम/हेक्टेयर) का फसल पर छिड़काव करें।(Soybean Crop First Spray)
छिडकाव के समय इन बातों का ध्यान रखें
सोयाबीन फसल पर पौध संरक्षण के लिए अनुशंसित रसायनों (खरपतवारनाशक/कीटनाशक/फफूंद नाशक) के छिडकाव में पर्याप्त पानी की मात्रा (नेप्सेक स्प्रयेर 450-500 लीटर/ हे या ट्रेक्टर चालित पॉवर स्प्रेयर से 120-150 लीटर /हे न्यूनतम) का उपयोग करें।
कीटनाशक के छिडकाव हेतु होलो कोन नोजल जबकि खरपतवारनाशक के छिडकाव हेतु फ्लड जेट/फ्लैट फेन नोजल का उपयोग करें और किसी भी प्रकार का कृषि आदान क्रय करते समय दूकानदार से हमेशा पक्का बिल लें जिस पर वैच नंबर एवं एक्सपायरी दिनांक स्पष्ट लिखा हो।(Soybean Crop First Spray)
किसान साथी इन बातों का विशेष ध्यान रखें
कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि ऐसे रसायन (कीटनाशक/खरपतवारनाशक/फफूंदनाशक) जो सोयाबीन फसल में उपयोग हेतु भारत सरकार के केंद्रीय कीटनाशक बोर्ड द्वारा जारी सूचि में शामिल नहीं है उनका उपयोग नहीं करें और जिन रसायनों (कीटनाशक / खरपतवारनाशक/फफूंदनाशक) के मिश्रित उपयोग की वैज्ञानिक अनुशंसा या पूर्व अनुभव नहीं है, ऐसे मिश्रण का उपयोग कदापि नहीं करें. इससे फ़सल को नुकसान हो सकता है।(Soybean Crop First Spray)
सही तौर-तरीके कीटनाशक का कब करें इस्तेमाल
आरपीसी एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी, पूसा, समस्तीपुर के बिहार के पौध सुरक्षा विभाग के हेड डॉ एस. के. सिेह ने कहना है कि आधुनिक खेती का सबसे बड़ा मंत्र है PM Integrated Pest Management इसका मतलब यह है कि कीड़े मारने वाली रसायनिक दवाओं का इस्तेमाल सबसे पहले नहीं, बल्कि सबसे आखिर में करना चाहिए। सबसे पहले हमें ‘देसी तरीके आजमाने चाहिए, जैसे फसल चक्र बदलना या ऐसी किस्में बोना जिनमें बीमारी कम लगती हो।
इसके बाद लाइट ट्रेप या चिपचिपे कार्ड्स का इस्तेमाल करना चाहिए. अगर इनसे भी बात न बने, तो ‘बायो-पेस्टीसाइड्स’ यानी नीम के तेल या फायदेमंद कीड़ों का सहारा लेना चाहिए। जब ये तमाम रास्ते बंद हो जाएं, तभी रसायनिक दवाओं की तरफ कदम बढ़ाना चाहिए। इसे ही ‘अंतिम विकल्प’ का सिद्धांत कहते हैं, जो हमारे पर्यावरण और सेहत दोनों को महफूज रखता है।(Soybean Crop First Spray)
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नमस्कार किसान साथियों….
मेरा नाम जयदीप मालवीय है और मैं एक कॉलेज छात्र हुं। मुझे 10वीं से ही खेती किसानी पर कंटेंट लिखने में गहरी रुचि है। साथियों, हम देखते है कि कई किसान भाइयों को खेती में कम उत्पादन एवं लागत ज्यादा आती है, जिससे उन्हें मुनाफा कम होता है। इसका प्रमुख कारण अभी भी खेती का परंपरागत तरीका अपनाया जाना है। किसान साथी खेती के परंपरागत तरीके से निकल कर आधुनिक तरीके अपनाएं, तभी खेती मुनाफे का सौदा साबित होगी। किसानों को नई नई जानकारी मिलते रहे और कम लागत में उनकी आय में बढ़ोतरी हो यही मेरा मकसद है। इसी को देखते हुए मैं डिजिटल वेबसाइट के जरिए किसानों को सटीक एवं सही जानकारी देने का प्रयास करता हुं। हमारा तरीका सरल और समझने योग्य होता है, ताकि हमारे किसान भाइयों को आसानी से अच्छी-अच्छी जानकारी मिलती रहे और उन्हें किसी भी प्रकार की कोई तकलीफ ना हो। मैं पिछले 4 साल से किसानों के लिए कंटेंट लिख रहा हूं और यही चाहता हुं की मैं आगे भी ज्यादा से ज्यादा किसानों को नई नई जानकारी से अवगत करवाता रहूं।
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