केंद्र सरकार के एक फैसले के पश्चात एमपी के कई जिलों के किसानों की चमकेगी किस्मत, डिटेल जानिए..

केंद्र सरकार के पिछले निर्णय के पश्चात एमपी के किसानों को Ethanol Blending Program के तहत लाभ मिलना वाला है आईए जानते हैं डिटेल..

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Ethanol Blending Program | भले ही अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी युद्ध खत्म हो गया हो, किंतु इस दौरान देश में जिस प्रकार से पेट्रोलियम पदार्थों को लेकर कमी देखने को मिली। उससे केंद्र सरकार ने बड़ा सबक लिया है। केंद्र सरकार अब पेट्रोल में एथेनॉल बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाने वाली है धीरे-धीरे करके 80% तक एथेनॉल बेस्ट पेट्रोल की भी तैयारी की जा रही है। केंद्र सरकार ने इसके लिए प्रोग्राम की घोषणा कर दी है इस प्रोग्राम के पश्चात मध्य प्रदेश के कई जिलों के किसानों को भी फायदा मिलने वाला है, आईए इस Ethanol Blending Program विषय की पूरी डिटेल जानते हैं..

Ethanol Blending Program | सरकार ने एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम किया शुरू

केंद्र सरकार ने पेट्रोल में एथेनॉल बढ़ाने को लेकर इथेनॉल ब्लीडिंग प्रोग्राम शुरू किया है। केंद्र सरकार के एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम (Ethanol Blending Program) के तहत अन्य राज्यों के साथ-साथ मध्य प्रदेश में भी गन्ने से एथेनॉल बनाने की कवायद तेजी से आगे बढ़ रही है। इससे न केवल देश का ईंधन आयात बिल कम होगा, बल्कि सीधे तौर पर मध्य प्रदेश के गन्ना उत्पादक किसानों की किस्मत भी चमकेगी।

एमपी के इन जिलों को मिलेगा फायदा

Ethanol Blending Program | केंद्र सरकार के प्रोग्राम के तहत एमपी के इन जिलों के किसानों को फायदा मिलेगा सबसे अधिक फायदा नरसिंहपुर जिले के किसानों को मिलेगा। प्रदेश के नरसिंहपुर जिले को ‘शक्कर का कटोरा’ भी कहा जाता है। यहां राज्य में सबसे अधिक गन्ने का रकबा और उत्पादन है। इसके साथ ही बुरहानपुर और खंडवा (निमाड़ अंचल): उपजाऊ भूमि और सिंचाई सुविधाओं के चलते इन जिलों में गन्ने की बंपर पैदावार होती है। : Ethanol Blending Program

वहीं कुछ समय से बैतूल और छिंदवाड़ा में भी किसानों का रुझान बनने की खेती पर अधिक देखने को मिल रहा है। बैतुल और छिंदवाड़ा जिलों में भी पिछले कुछ वर्षों में गन्ने की खेती के प्रति किसानों का रुझान तेजी से बढ़ा है। कृषि जानकारों के मुताबिक दतिया और ग्वालियर संभाग में भी गन्ने की खेती का रकबा बड़ा है। पिछले कुछ समय से चंबल और ग्वालियर संभाग के कुछ हिस्सों में भी आधुनिक तकनीकों से गन्ने का भारी उत्पादन किया जा रहा है।

Ethanol Blending Program | एक नजर में किसानों को क्या मिलेगा, देखें..

केंद्र सरकार के इस फैसले के पश्चात एमपी के 7 जिलों के किसानों की किस्मत चमकेगी, केंद्र सरकार के एक फैसले के बाद किसानों को अब दोहरी खुशी मिलेगी।

मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर, बुरहानपुर और खंडवा के गन्ना किसानों को मिलेगा सबसे बड़ा फायदा मिलने वाला है।

एथेनॉल (Ethanol Blending Program) से चीनी मिलों को अब तुरंत कैश मिलेगा और किसानों को समय पर होगा भुगतान होगा।

पेट्रोल में एथेनॉल ब्लेंडिंग बढ़ने से बाजार में हमेशा गन्ने की भारी डिमांड बनी रहेगी, इससे बाजार में कंपटीशन बढ़ेगा और भाव भी अच्छे मिलेंगे।

ऐसा माना जा रहा है कि मध्य प्रदेश में कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने और किसानों की आय दोगुनी करने की दिशा में ‘एथेनॉल उत्पादन’ एक गेम-चेंजर साबित होने जा रहा है। : Ethanol Blending Program

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एथेनॉल (Ethanol Blending Program) से किसानों को कैसे होगा फायदा, जानिए

अब तक किसान पूरी तरह से केवल चीनी मिलों पर निर्भर रहते थे, जिससे अक्सर भुगतान में देरी और औने-पौने दाम मिलने की समस्या रहती थी। लेकिन एथेनॉल उत्पादन शुरू होने से यह समीकरण पूरी तरह बदल जाएंगे।

केंद्र सरकार के इस प्रोग्राम के पश्चात गन्ने के दाम में सीधी बढ़ोतरी होगी। जब गन्ने का इस्तेमाल सीधे एथेनॉल बनाने के लिए होगा, तो मिलों की आमदनी बढ़ेगी। चीनी के मुकाबले एथेनॉल से मिलों को तुरंत कैश-फ्लो मिलता है। इसका सीधा असर किसानों पर पड़ेगा, उन्हें अपने गन्ने का उचित और बढ़ा हुआ दाम मिल सकेगा। : Ethanol Blending Program

इसके साथ भुगतान की लंबित समस्या का हल भी हो जाएगा। पारंपरिक रूप से चीनी मिलों द्वारा किसानों का भुगतान हफ्तों या महीनों तक अटका रहता था। एथेनॉल को तेल कंपनियां (जैसे IOCL, BPCL) तुरंत खरीद लेती हैं और मिलों को 21 दिनों के भीतर भुगतान हो जाता है। इससे मिलों के पास नकदी की कमी नहीं होगी और किसानों को उनके गन्ने का पैसा समय पर (महीनों के बजाय कुछ दिनों में) मिल जाएगा।

कृषि विशेषज्ञ बताते हैं कि भाव में तेजी से मिलेगा किसानों को लाभ मिलेगा। ‘बंपर पैदावार’ में भी दाम नहीं गिरेंगे। अक्सर देखा गया है कि जब किसी साल गन्ने का बहुत अधिक उत्पादन होता है, तो चीनी के दाम गिर जाते हैं और मिलें किसानों से गन्ना खरीदना कम कर देती हैं। एथेनॉल प्लांट होने से अतिरिक्त गन्ने को सीधे ईंधन बनाने में डाइवर्ट कर दिया जाएगा। इससे बाजार में गन्ने की मांग हमेशा बनी रहेगी और रिकॉर्ड उत्पादन के बाद भी दाम नहीं गिरेंगे। : Ethanol Blending Program

इसके अलावा गन्ने के वेस्ट (बाय-प्रोडक्ट) से भी कमाई बढ़ेगी। गन्ने की पेराई के बाद बचने वाली ‘खोई’ और ‘मैल’ का उपयोग भी एथेनॉल और जैविक खाद बनाने में होता है। इस कचरे की व्यावसायिक वैल्यू बढ़ने से किसानों को अप्रत्यक्ष रूप से प्रति क्विंटल अधिक मुनाफा हासिल होगा।

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