चारे की कमी में पशुपालकों के लिए बेहतर विकल्प है साइलेज, वैज्ञानिक विधि से साइलेज को कैसे करें तैयार…

किसानों के लिए चारे की कमी दूर करेगा एवं पशुओं का स्वास्थ्य बेहतर करता है साइलेज (Silage Preparing Method) इसे कैसे बना सकते है किसान, कृषि विशेषज्ञों से जाने.

Silage Preparing Method | पशुपालकों के लिए सालभर हरे चारे की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती रहती है। विशेषकर गर्मी और सूखे के दौरान हरे चारे की कमी से पशुओं के स्वास्थ्य और दूध उत्पादन पर प्रतिकूल असर पड़ता है। ऐसे समय में वैज्ञानिक तरीके से तैयार किया गया साइलेज पशुओं के लिए पौष्टिक, सुपाच्य और लंबे समय तक सुरक्षित रहने वाला आहार साबित होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि साइलेज सही विधि से तैयार (Silage Preparing Method) किया जाए तो यह कई महीनों तक खराब हुए बिना सुरक्षित रखा जा सकता है और पशुओं को आवश्यक पोषण उपलब्ध कराता है।

कैसे बना सकते है साइलेज | Silage Preparing Method

कृषि विशेषज्ञ बताते हैं कि साइलेज हरे चारे को हवा की अनुपस्थिति में नियंत्रित किण्वन (फर्मेंटेशन) के माध्यम से तैयार किया जाता है। इस प्रक्रिया से चारे के अधिकांश पोषक तत्व सुरक्षित रहते हैं। साइलेज बनाने के लिए मक्का, ज्वार, बाजरा और जई सबसे उपयुक्त फसलें मानी जाती हैं। फसल की कटाई दानों की दूधिया अवस्था, यानी लगभग 65 प्रतिशत नमी होने पर करनी चाहिए, क्योंकि इसी समय चारे में पोषक तत्वों की मात्रा सर्वाधिक होती है। : Silage Preparing Method

इन्होंने बताया कि कटाई के बाद चारे को 1 से 1.5 इंच के छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर पक्का गड्ढा, ट्रेंच या पॉलीथीन बिछे बंकर में परत-दर-परत भरना चाहिए। प्रत्येक परत को अच्छी तरह दबाना जरूरी है, ताकि उसके भीतर हवा न रह जाए। आवश्यकता होने पर बेहतर किण्वन के लिए हल्के गुड़ के घोल का छिड़काव भी किया जा सकता है।

Silage Preparing Method

भराव पूरा होने के बाद बंकर को पॉलीथीन से अच्छी तरह ढककर ऊपर मिट्टी की परत डाल देनी चाहिए, ताकि हवा अंदर प्रवेश न कर सके। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार लगभग 45 से 60 दिनों में साइलेज तैयार हो जाता है। उपयोग के समय इसे केवल एक तरफ से निकालना चाहिए तथा शेष भाग को तुरंत दोबारा ढक देना चाहिए। इससे साइलेज की गुणवत्ता लंबे समय तक बनी रहती है और उसके खराब होने की संभावना कम हो जाती है। : Silage Preparing Method

साइलेज बनाने के प्रमुख बिंदु

मक्का, ज्वार, बाजरा एवं जई की फसल सबसे उपयुक्त।

दानों की दूधिया अवस्था (लगभग 65 प्रतिशत नमी) पर करें कटाई।

चारे को 1 से 1.5 इंच के टुकड़ों में काटें।

पक्का गड्ढा, ट्रेंच या पॉलीथीन बिछे बंकर का उपयोग करें।

परत-दर-परत भरकर अच्छी तरह दबाएं, ताकि हवा न रहे।

आवश्यकता अनुसार हल्के गुड़ के घोल का छिड़काव करें। : Silage Preparing Method

पॉलीथीन से ढककर ऊपर मिट्टी की परत डालें।

45 से 60 दिनों में साइलेज तैयार हो जाता है।

उपयोग के बाद शेष साइलेज को तुरंत पुनः ढक दें।

पशुओं का स्वास्थ्य बेहतर करेगा साइलेज

Silage Preparing Method | विशेषज्ञों का कहना है कि साइलेज न केवल स्वादिष्ट और सुपाच्य होता है, बल्कि चारे की कमी के समय पशुओं को संतुलित पोषण भी उपलब्ध कराता है। इसके नियमित उपयोग से पशुओं का स्वास्थ्य बेहतर रहता है और दूध उत्पादन बनाए रखने में भी मदद मिलती है। यही कारण है कि आधुनिक पशुपालन में साइलेज को हरे चारे के सुरक्षित भंडारण और बेहतर पोषण का प्रभावी विकल्प माना जा रहा है।

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