सोयाबीन के लिए यह समय अति महत्वपूर्ण, इल्लियां दिखें तो करें नियंत्रण, कृषि वैज्ञानिकों ने जारी की यह सलाह..

सोयाबीन की फसल में इस समय देखरेख के साथ क्या करना होगा आइए (Agricultural Advice) जानते हैं..

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Agricultural Advice | खरीफ मौसम के दौरान सोयाबीन की फसल इस समय करीब 50 से 55 दिन की अवस्था में पहुंच गई है। कृषि विभाग के अनुसार फिलहाल सोयाबीन की फसल की स्थिति संतोषजनक है। ऐसे में किसानों को फसल में कीट एवं व्याधियों की नियमित निगरानी के साथ-साथ खेतों में जल निकासी की समुचित व्यवस्था करने की सलाह दी गई है।

सोयाबीन की फसल के लिए यह समय अति महत्वपूर्ण है ऐसे में किसान साथी लगातार निगरानी करते रहे एवं क्रिया दिखाने पर उनका नियंत्रण करें किसानों के लिए कृषि वैज्ञानिकों ने क्या सलाह जारी की है आईए जानते हैं..

लगातार देख-रेख करते रहें

कृषि विभाग ने किसानों से कहा है कि वे नियमित रूप से खेतों का निरीक्षण करें और पौधों को हिलाकर देखें कि उनमें इल्ली अथवा अन्य कीटों का प्रकोप तो नहीं है। यदि एक वर्ग मीटर क्षेत्र में 3 से 4 इल्लियां दिखाई देती हैं तो कृषि विभाग की अनुशंसा के अनुसार कीटनाशक का छिड़काव किया जाना चाहिए। Agricultural Advice

अधिकारियों के अनुसार इस समय फसल की अवस्था ऐसी है, जिसमें समय पर कीटों की पहचान और नियंत्रण से संभावित नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता है।

इस समय फसल में रिंग कटर का खतरा

कृषि विभाग ने विशेष रूप से गर्डल बीटल यानी रिंग कटर के प्रति किसानों को सतर्क किया है। घनी सोयाबीन फसल में इस कीट के प्रकोप की संभावना अधिक रहती है। Agricultural Advice

इसकी पहचान पौधे के तने पर दो रिंग बने दिखाई देने और बाद में पौधे के लटकने अथवा मुरझाने से की जा सकती है। विभाग ने सलाह दी है कि ऐसे प्रभावित पौधों को प्रारंभिक अवस्था में ही तोड़कर खेत से बाहर ले जाकर नष्ट कर दें, ताकि कीट का प्रकोप अन्य पौधों तक न फैल सके।

इसके अलावा सेमीलूपर, तंबाकू की इल्ली सहित पत्ती खाने वाली अन्य इल्लियों, सफेद मक्खी, जैसिड जैसे रस चूसने वाले कीटों तथा तना छेदक कीटों पर भी विशेष निगरानी रखने की जरूरत बताई गई है। खेत में पौधों को हिलाकर निरीक्षण करने से कई कीटों और इल्लियों की प्रारंभिक अवस्था में पहचान की जा सकती है। Agricultural Advice

अनुशंसित कीटनाशकों का करें उपयोग

कृषि विभाग के अनुसार कीटों के लक्षण दिखाई देने पर प्रारंभिक अवस्था में नियंत्रण के लिए डायफ्लूबेंजुरॉन 21.7 एससी की 750 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर, टेट्रानिलिप्रोल 18.18 एससी की 250 से 300 मिलीलीटर, क्लोरएन्ट्रानिलीप्रोल 18.5 एससी की 150 मिलीलीटर, स्पाइनेटोरम 11.7 एससी की 450 मिलीलीटर तथा इमामेक्टिन बेंजोएट 1.90 की 425 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर मात्रा का उपयोग किया जा सकता है। Agricultural Advice

इसी तरह फ्लूबेंडियामाइड 20 डब्ल्यूजी की 250 से 300 मिलीलीटर, फ्लूबेंडियामाइड 39.35 एससी की 150 मिलीलीटर अथवा इंडोक्साकार्ब 15.8 एससी की 333 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर मात्रा का छिड़काव किया जा सकता है।

विभाग ने नोवाल्यूरॉन + इंडोक्साकार्ब 04.50 प्रतिशत एससी की 825 से 875 मिलीलीटर, प्रोफेनोफॉस 50 ईसी की 1 लीटर, थायोमेथोक्सम + लैम्ब्डा साइहेलोथ्रिन 9.5 प्रतिशत की 125 मिलीलीटर अथवा बीटासाइफ्लुथ्रिन + इमिडाक्लोप्रिड की 350 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर मात्रा के उपयोग की भी सलाह दी है। Agricultural Advice

पर्याप्त पानी के साथ करें छिड़काव

कीटनाशक के छिड़काव के दौरान पानी की पर्याप्त मात्रा का उपयोग करने पर भी विभाग ने जोर दिया है। नेप्सैक स्प्रेयर अथवा ट्रैक्टर चालित स्प्रेयर से 450 लीटर पानी प्रति हेक्टेयर तथा पावर स्प्रेयर से न्यूनतम 125 लीटर पानी प्रति हेक्टेयर उपयोग करने की सलाह दी गई है। किसानों से कहा गया है कि कीटनाशक का चयन और मात्रा कृषि विभाग की अनुशंसा के अनुसार ही रखें तथा लेबल पर दिए निर्देशों का पालन करें। Agricultural Advice

अधिक जलभराव नुकसानदायक

पूर्वी मध्य प्रदेश में लगातार बरिश का क्रम बना हुआ है। बारिश के बीच कृषि विभाग ने किसानों को खेतों में जलभराव की स्थिति पर भी नजर रखने को कहा है। सोयाबीन की फसल में तीन दिन से अधिक समय तक जलभराव नुकसानदायक हो सकता है। Agricultural Advice

अधिक वर्षा होने पर खेत से अतिरिक्त पानी की निकासी की उचित व्यवस्था करने की सलाह दी गई है। जलभराव से फसल की वृद्धि प्रभावित होने के साथ पौधों में अन्य समस्याएं भी उत्पन्न हो सकती हैं।

खेतों में लगाएं बर्ड पर्च

कीट नियंत्रण के लिए किसानों को खेतों में उचित आकार के बर्ड पर्च लगाने की भी सलाह दी गई है। इन पर पक्षी बैठकर सोयाबीन के हानिकारक कीटों और इल्लियों को खाते हैं। इससे खेत में कीटों की संख्या कम करने में प्राकृतिक रूप से मदद मिलती है। विभाग ने किसानों को रासायनिक नियंत्रण से पहले खेत की स्थिति और कीट प्रकोप की वास्तविक स्थिति का आकलन करने पर जोर दिया है। Agricultural Advice

मैदानी अमला कर रहा निगरानी

खरीफ फसलों की निगरानी लगातार कृषि विभाग द्वारा की जा रही है। जिला स्तर पर जिला डायग्नोस्टिक दल और मैदानी कृषि अधिकारियों द्वारा लगातार क्षेत्र का भ्रमण किया जा रहा है। अधिकारियों की ओर से किसानों को कीट एवं व्याधियों से बचाव और नियंत्रण के संबंध में जानकारी दी जा रही है। विभाग का कहना है कि वर्तमान में जिले में सोयाबीन की स्थिति संतोषजनक है, लेकिन किसानों को नियमित निगरानी जारी रखनी चाहिए।  Agricultural Advice

कृषि आदान सामग्री खरीदते समय भी किसानों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। उर्वरक, बीज अथवा कीटनाशक खरीदने पर संबंधित विक्रेता से पक्का बिल अवश्य लेने को कहा गया है। अधिक जानकारी के लिए किसान अपने क्षेत्रीय कृषि विस्तार अधिकारी कार्यालय, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी, कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क कर सकते हैं।

बारिश नहीं हुई तो पैदावार होगी प्रभावित 

पश्चिमी एमपी में लंबे समय से बारिश नहीं होने से सोयाबीन की फसल पर असर बढ़ता जा रहा है। खेतों में नमी की कमी के कारण दाने भरने की प्रक्रिया रुकने की आशंका जताई जा रही है। तेज धूप से पौधों पर तनाव बढ़ रहा है। किसानों का कहना है कि अगले कुछ दिनों में पानी नहीं मिला तो फलियों में दाने कमजोर या चपटे रह सकते हैं, जिससे पैदावार घटेगी।

कृषि विशेषज्ञ पानी में घुलनशील खाद के छिड़काव की सलाह (Agricultural Advice) भी दे रहे हैं, ताकि नमी बनी रहे और दाने का विकास हो सके। किसानों के अनुसार 100 दिन से अधिक अवधि वाली लेट वैरायटी की स्थिति ज्यादा नाजुक है। कृषि वैज्ञानिकों ने 25 अगस्त तक हल्की से भारी बारिश की संभावना बताई है, लेकिन कई खेतों में नुकसान की शुरुआत होने की बात कही जा रही है।

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