कृषि वैज्ञानिकों की सलाह Paddy Pest Control Advise – धान में कीट-रोग नियंत्रण के लिए अनुशंसित दवाओं का करें उपयोग, देखें पूरी जानकारी..
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Paddy Pest Control Advise | धान की फसल में इस समय रसचूसक कीट फुदका, माहो और पत्ती लपेटक सहित विभिन्न कीटों का प्रकोप देखा जा रहा है। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि आर्थिक क्षति स्तर से अधिक प्रकोप होने पर ही अनुशंसित कीटनाशकों का उपयोग करें।
साथ ही धान में लगने वाले प्रमुख रोगों की रोकथाम के लिए अनुशंसित फफूंदनाशकों का छिड़काव करें। एक बार में केवल एक ही कीटनाशक या फफूंदनाशक का उपयोग करने की सलाह दी गई है। कृषि वैज्ञानिकों की सलाह Paddy Pest Control Advise – धान में कीट-रोग नियंत्रण के लिए अनुशंसित दवाओं का करें उपयोग, देखें पूरी जानकारी..
इन स्तरों पर करें कीट नियंत्रण
तना छेदक का प्रकोप वानस्पतिक अवस्था में 10 प्रतिशत डेड हार्ट तथा पुष्पन अवस्था में 2 प्रतिशत व्हाइट इयर होने पर नियंत्रण की आवश्यकता होती है। Paddy Pest Control Advise
भूरा पृष्ठ फुदका एक हापर प्रति टिलर, हरा पृष्ठ फुदका वानस्पतिक अवस्था में 5 तथा पुष्पन अवस्था में 10 कीट प्रति हिल होने पर आर्थिक क्षति स्तर पर पहुंचता है।
पत्ती लपेटक के लिए वानस्पतिक अवस्था में 10 प्रतिशत और पुष्पन अवस्था में 5 प्रतिशत क्षतिग्रस्त पत्तियां आर्थिक क्षति स्तर मानी गई हैं। गंधी बग के 2 बग तथा धान हिस्पा के 2 प्रौढ़ प्रति हिल मिलने पर भी नियंत्रण की जरूरत होती है। Paddy Pest Control Advise
कीटों के लिए अनुशंसित दवाएं
तना छेदक के नियंत्रण के लिए क्लोरेन्ट्रानिलीप्रोल 18.5 एससी 125 मिली या कार्टेप हाइड्रोक्लोराइड 4 जी 20 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से उपयोग किया जा सकता है। भूरा और हरा पृष्ठ फुदका के लिए डाइनोटेफ्यूरान 20 प्रतिशत एसजी 200 ग्राम या पाइमेट्रोजाइन 50 प्रतिशत डब्ल्यूजी 300 ग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव की सलाह दी गई है।Paddy Pest Control Advise
पत्ती लपेटक के नियंत्रण के लिए क्लोरपाइरीफॉस 50 ईसी 1.25 लीटर या प्रोफेनोफॉस 50 ईसी 1.25 लीटर, जबकि गंधी बग के लिए थायोमिथोक्साम 25 प्रतिशत डब्ल्यूजी 125 ग्राम या इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एसएल 250 मिली प्रति हेक्टेयर की दर से उपयोग करने की सलाह है। चयनित कीटनाशक को 500 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर छिड़काव करें।
शीथ ब्लाइट और ब्लास्ट से बचाव
शीथ ब्लाइट में जल स्तर के पास पत्ती के आवरण पर अण्डाकार या अनियमित हरे-भूरे धब्बे दिखाई देते हैं। इसके नियंत्रण के लिए प्रोपीकोनाजोल 13.9 प्रतिशत + डाइफेनोकोनाजोल 13.9 प्रतिशत 500 मिली या फ्लक्सापायरोक्साड 62.5 प्रतिशत + एपॉक्सीकोनाजोल 62.5 प्रतिशत 750 मिली प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव की सलाह दी गई है। Paddy Pest Control Advise
ब्लास्ट यानी झोंका रोग में पत्तियों, डंठलों और बालियों पर लक्षण दिखाई देते हैं। पत्तियों पर भूरे रंग के तकुआनुमा धब्बे इसके प्रमुख लक्षण हैं। नियंत्रण के लिए एजोक्सीस्ट्रोबिन 18.2 प्रतिशत + डाइफेनोकोनाजोल 11.4 एससी 500 मिली या ट्राइफ्लॉक्सीस्ट्रोबिन 25 प्रतिशत + टेब्यूकोनाजोल 50 प्रतिशत 300 ग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव किया जा सकता है।
जीवाणु पत्ती झुलसा में भी सावधानी
जीवाणु पत्ती झुलसा रोग में पत्तियों के किनारों या सिरों से पीले अथवा मटमैले रंग के लहरदार क्षतस्थल नीचे की ओर बढ़ते हैं। Paddy Pest Control Advise
इसके नियंत्रण के लिए कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 50 डब्ल्यूपी + स्ट्रेप्टोसाइक्लिन 1000 + 25 ग्राम अथवा कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 45 डब्ल्यूपी + कासुगामाइसिन 5 प्रतिशत 700 मिली प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव की सलाह दी गई है। फफूंदनाशक का छिड़काव करते समय एक बार में केवल एक ही फफूंदनाशक का उपयोग करने को कहा गया है।
संतुलित मात्रा में करें यूरिया और नैनो यूरिया का उपयोग
धान की रोपाई के 30 से 35 दिन बाद 50 से 70 किलोग्राम यूरिया प्रति एकड़ तथा 60 से 65 दिन की गांठ अवस्था में 30 से 40 किलोग्राम यूरिया प्रति एकड़ की दर से उपयोग करने की सलाह दी गई है। Paddy Pest Control Advise
वहीं, फसल की 40 से 45 दिन की अवस्था में 500 मिली नैनो यूरिया प्लस को 125 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव किया जा सकता है। किसानों को सलाह दी गई है कि जहां तक संभव हो, नैनो यूरिया प्लस के साथ किसी कीटनाशक या फफूंदनाशक का उपयोग न करें।
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नमस्कार किसान साथियों….
मेरा नाम जयदीप मालवीय है और मैं एक कॉलेज छात्र हुं। मुझे 10वीं से ही खेती किसानी पर कंटेंट लिखने में गहरी रुचि है। साथियों, हम देखते है कि कई किसान भाइयों को खेती में कम उत्पादन एवं लागत ज्यादा आती है, जिससे उन्हें मुनाफा कम होता है। इसका प्रमुख कारण अभी भी खेती का परंपरागत तरीका अपनाया जाना है। किसान साथी खेती के परंपरागत तरीके से निकल कर आधुनिक तरीके अपनाएं, तभी खेती मुनाफे का सौदा साबित होगी। किसानों को नई नई जानकारी मिलते रहे और कम लागत में उनकी आय में बढ़ोतरी हो यही मेरा मकसद है। इसी को देखते हुए मैं डिजिटल वेबसाइट के जरिए किसानों को सटीक एवं सही जानकारी देने का प्रयास करता हुं। हमारा तरीका सरल और समझने योग्य होता है, ताकि हमारे किसान भाइयों को आसानी से अच्छी-अच्छी जानकारी मिलती रहे और उन्हें किसी भी प्रकार की कोई तकलीफ ना हो। मैं पिछले 4 साल से किसानों के लिए कंटेंट लिख रहा हूं और यही चाहता हुं की मैं आगे भी ज्यादा से ज्यादा किसानों को नई नई जानकारी से अवगत करवाता रहूं।
आपके साथ के लिए धन्यवाद …





