धान की पैदावार बढ़ाने के लिए इस चीज पर अवश्य ध्यान दें किसान, कीट-रोग से भी ज्यादा पहुंचा है नुकसान

धान की फसल (Paddy Crop) को ज्यादा नुकसान पहुंचाता है खरपतवार। आइये जानते है खरपतवार नियंत्रण के लिए क्या करना चाहिए…

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Paddy Crop | धान की खेती में किसान अक्सर कीट और रोगों से फसल को बचाने पर ज्यादा ध्यान देते हैं, लेकिन खरपतवार जैसी समस्या को नजरअंदाज कर देते हैं, जो असल में पैदावार को कहीं ज्यादा नुकसान पहुंचाती है। खेत में उगने वाले अनचाहे खरपतवार धान के पौधों के साथ पोषक तत्वों, पानी और सूरज की रोशनी के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं, जिससे फसल की बढ़वार रुक जाती है और उत्पादन में भारी गिरावट आ जाती है।

कई बार यह नुकसान कीट-रोगों से होने वाले नुकसान से भी अधिक होता है, फिर भी किसान इस पर पूरा ध्यान नहीं दे पाते। अगर समय रहते खरपतवार नियंत्रण नहीं किया गया, तो फसल की गुणवत्ता और मुनाफे दोनों पर सीधा असर पड़ता है। ऐसे में यह जानना जरूरी हो जाता है कि खरपतवार धान की फसल (Paddy Crop) को किस तरह प्रभावित करता है और किसान इससे बचाव के लिए क्या उपाय अपना सकते हैं।

धान का ये है सबसे बड़ा दुश्मन | Paddy Crop

धान की खेती किसानों को अच्छा मुनाफा देती है, लेकिन धान का सबसे बड़ा दुश्मन खरपतवार है। धान उत्पादन में में होने वाले कुल नुकसान का 33 फीसदी नुकसान खरपतवार से होता है, जो कीटों और रोगों से होने वाली कुल क्षति से कहीं ज्यादा है। इसलिए धान फसल को खरपतवार से मुक्त रखने के लिए समय पर इसका नियंत्रण करना जरूरी है।

उत्पादन में गिरावट आएगी

Paddy Crop खरपतवार हमारे फसल के पौधों से पोषण, स्थान, प्रकाश और जल के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं। शुरुआती अवस्था में धान में फसल के पौधों की ग्रोथ रेट खरपतवार के पौधों से कम रहने के कारण ये प्रतिस्पर्धा में धान फसल के पौधों से आगे होकर उपज दर में कमी लाते हैं।

धान के प्रमुख खरपतवार

धान के प्रमुख खरपतवार में मोथा, जंगली धान, खिरवां, पारा घास और भोसी हैं। इनको समय पर नियंत्रित करना जरूरी है, किसानों को इससे सावधान रहने की जरूरत है।

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1. मोथा का नियंत्रण | Paddy Crop

मोथा खरपतवार को नियंत्रित करने के लिए किसान इनमें से कोई एक दवा का प्रयोग करें। ब्यूटाक्लोर 50% ई.सी 1.0-1.2 ली. (500-600 मिली सक्रिय तत्व / एकड़), एनिलाफोस 30% ई.सी 533 मिली (160 ग्राम सक्रिय तत्व / एकड़), प्रेटिलाक्लोर 50% ई.सी 600 मिली (300 ग्राम सक्रिय तत्व / एकड़), आग्जडायरजिल 80% डब्ल्यू.पी 50 ग्राम (40 ग्राम सक्रिय तत्व / एकड़), बेनसल्फूरोन मिथाइल 60% डी.एफ 40 ग्राम (24 ग्राम सक्रिय तत्व / एकड़)।

2. जंगली धान का नियंत्रण

इसके बीज धान की फसल (Paddy Crop) पकने से पहले जमीन पर गिर जाते हैं। इसलिए इसको जड़िया धान के नाम से जानते हैं। इस खरपतवार के नियंत्रण के लिए खेत में सिंचाई करके इसको उगने के लिए प्रोत्साहित करें, ताकि जमीन में पड़े हुए सारे बीज उग जाएं। इसके उगने के बाद ग्लाइफोसेट व पैराकोट के आधे फीसदी घोल का छिड़काव कर सकते हैं। तृणनाशी के छिड़काव के 10-15 दिनों के बाद धान की रोपनी किया जाए।

3. खिरवां, पारा घास और भोसी का नियंत्रण

Paddy Crop | यह फैलने वाला एक वर्षीय खरपतवार है। इसके पौधे 15-60 सेमी लंबे होते हैं और पत्तियां अंडाकार होती है। गांठें से जड़ें निकलती हैं जिनसे इसका प्रसार होता है। इसके नियंत्रण के लिए पेन्डिमैथालिन 30% ई.सी 1330 मिली (400 ग्राम / सक्रिय तत्व / एकड़), आग्जाडायरजिल 80% एस.सी 50 ग्राम (40 ग्राम सक्रिय तत्व / एकड़) और प्रोपानिल 35% ई.सी 2330 मिली (800 ग्राम सक्रिय तत्व / एकड़), इनमें से कोई एक दवा का इस्तेमाल करें।

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