कृषि विभाग के अधिकारी गांव-गांव कर रहे खेतों का निरीक्षण, किसानों को रोग लक्षण पहचानने और (Paddy Cultivation) समय पर नियंत्रण की दे रहे सलाह..
Paddy Cultivation | धान की फसल में कीट एवं रोगों की स्थिति पर नजर रखने के लिए कृषि विभाग ने मैदानी निगरानी तेज कर दी है। विभाग का अमला लगातार गांवों में पहुंचकर खेतों का निरीक्षण कर रहा है। इस दौरान फसल की स्थिति, कीटों की मौजूदगी और रोगों के शुरुआती लक्षणों की जांच के साथ किसानों को मौके पर ही कीट-रोग की पहचान और फसल प्रबंधन के संबंध में तकनीकी जानकारी दी जा रही है।
धान की फसल (Paddy Cultivation) को लेकर कृषि विभाग के अधिकारी रात्रि कालीन किसान समोटा संगोष्ठी भी आयोजित कर रहे हैं।इसमें किसानों को फसल की नियमित निगरानी करने, कीट एवं रोगों के शुरुआती लक्षणों को पहचानने और समय रहते आवश्यक प्रबंधन उपाय अपनाने की जानकारी दी गई।
शुरुआती पहचान से नुकसान पर नियंत्रण
कृषि विभाग के अधिकारी बताते हैं कि फसल (Paddy Cultivation) में किसी भी तरह के असामान्य लक्षण दिखाई देने पर उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। कीट या रोग की शुरुआती अवस्था में पहचान होने पर फसल को होने वाले नुकसान को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
उन्होंने किसानों को सलाह दी कि किसी भी कीट या रोग के नियंत्रण के लिए उपाय करने से पहले उसकी सही पहचान जरूर कराएं। अधिकारियों ने धान की फसल की स्थिति का जायजा लेकर खेत में मौजूद कीट एवं रोगों की स्थिति के आधार पर आवश्यक तकनीकी मार्गदर्शन दिया। किसानों को नियमित खेत भ्रमण कर फसल की निगरानी करने की सलाह भी दी गई।
खेतों में मिला माहू का प्रकोप
निरीक्षण के दौरान धान की फसल (Paddy Cultivation) में माहू की स्थिति सामने आई। कृषि अधिकारियों ने किसानों को माहू की पहचान, फसल पर इसके प्रभाव और नियंत्रण के लिए अपनाए जाने वाले आवश्यक उपायों की जानकारी दी। किसानों से कहा गया कि कीटों की संख्या बढ़ने से पहले खेतों की नियमित निगरानी कर आवश्यक प्रबंधन उपाय अपनाएं।
कृषि विभाग की टीम ने ग्राम सिवनीकला और सारद में कृषक महेंद्र सुलाखे के खेत का भी निरीक्षण किया। यहां धान की फसल में माहू के साथ लीफ ब्लाइट का प्रकोप पाया गया। अधिकारियों ने फसल (Paddy Cultivation) की स्थिति का जायजा लेने के बाद किसानों को कीट एवं रोग नियंत्रण तथा फसल प्रबंधन के संबंध में तकनीकी जानकारी दी।
बिना सलाह कीटनाशक का छिड़काव न करें
कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि धान की फसल (Paddy Cultivation) में कीट या रोग के लक्षण दिखाई देने पर स्वयं के स्तर पर किसी भी कीटनाशक का इस्तेमाल न करें। बाजार से बिना जानकारी के दवा खरीदकर छिड़काव करने के बजाय पहले फसल की समस्या की सही पहचान कराना जरूरी है।
अधिकारियों ने किसानों को अपने क्षेत्र के कृषि विभाग के मैदानी अमले, कृषि विशेषज्ञों अथवा संबंधित कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क कर फसल की स्थिति के अनुसार अनुशंसित तकनीकी उपाय अपनाने की सलाह दी है। इससे अनावश्यक कीटनाशक के इस्तेमाल के साथ अतिरिक्त खर्च से भी बचा जा सकता है।
कृषि विभाग के अनुसार वर्तमान मौसम में धान की फसल की नियमित निगरानी बेहद जरूरी है। किसानों को पत्तियों, तनों और पौधों के अन्य हिस्सों का समय-समय पर निरीक्षण करने तथा कीट, रोग के लक्षण या पौधों में किसी भी तरह का असामान्य बदलाव दिखाई देने पर तत्काल कृषि अमले को सूचना देने की सलाह दी गई है। (Paddy Cultivation)
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नमस्कार किसान साथियों….
मेरा नाम जयदीप मालवीय है और मैं एक कॉलेज छात्र हुं। मुझे 10वीं से ही खेती किसानी पर कंटेंट लिखने में गहरी रुचि है। साथियों, हम देखते है कि कई किसान भाइयों को खेती में कम उत्पादन एवं लागत ज्यादा आती है, जिससे उन्हें मुनाफा कम होता है। इसका प्रमुख कारण अभी भी खेती का परंपरागत तरीका अपनाया जाना है। किसान साथी खेती के परंपरागत तरीके से निकल कर आधुनिक तरीके अपनाएं, तभी खेती मुनाफे का सौदा साबित होगी। किसानों को नई नई जानकारी मिलते रहे और कम लागत में उनकी आय में बढ़ोतरी हो यही मेरा मकसद है। इसी को देखते हुए मैं डिजिटल वेबसाइट के जरिए किसानों को सटीक एवं सही जानकारी देने का प्रयास करता हुं। हमारा तरीका सरल और समझने योग्य होता है, ताकि हमारे किसान भाइयों को आसानी से अच्छी-अच्छी जानकारी मिलती रहे और उन्हें किसी भी प्रकार की कोई तकलीफ ना हो। मैं पिछले 4 साल से किसानों के लिए कंटेंट लिख रहा हूं और यही चाहता हुं की मैं आगे भी ज्यादा से ज्यादा किसानों को नई नई जानकारी से अवगत करवाता रहूं।
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