सोयाबीन की रिकार्ड पैदावार (Soybean Cultivation) के लिए किसानों को कौन-कौन से उपाय करना चाहिए, जानिए..
Soybean Cultivation | मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, राजस्थान आदि मध्य भारत के क्षेत्रों में खरीफ सीजन के दौरान सबसे अधिक सोयाबीन की खेती होती है। देश के अधिकतर किसान सोयाबीन की परंपरागत खेती (Soybean Cultivation) कर रहे हैं जिसके कारण पर्याप्त पैदावार नहीं हो पाती और अच्छा मुनाफा नहीं मिलता। कई बार किसान मेहनत तो पूरी करते हैं, फिर भी खेत में पौधे कमजोर रह जाते हैं, फलियां कम लगती हैं और उत्पादन उम्मीद से नीचे चला जाता है।
असल में सोयाबीन की खेती (Soybean Cultivation) में सफलता केवल बारिश पर निर्भर नहीं करती, बल्कि बुवाई से पहले की गई तैयारी भी बहुत मायने रखती है। अगर किसान शुरुआत में कुछ जरूरी बातों पर ध्यान दें, तो फसल ज्यादा स्वस्थ रहती है और पैदावार भी शानदार मिलती है। आइए जानते हैं वे जरूरी काम, जिन्हें अपनाकर किसान भाई सोयाबीन के खेती को मुनाफे वाला बना सकते हैं..
बढ़ रहा है सोयाबीन की खेती का रकबा
पिछले कुछ वर्षों में सोयाबीन किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हुई है। इसकी मांग तेल उद्योग, पशु आहार और खाद्य उत्पादों में लगातार बढ़ रही है। यही कारण है कि किसान इसे नकदी फसल के रूप में देख रहे हैं। मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान जैसे राज्यों में सोयाबीन किसानों की आय बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रही है। यही कारण है कि सोयाबीन की खेती (Soybean Cultivation) के रकबे में बढ़ोतरी हुई है।
सोयाबीन की खेती से अधिक मुनाफा कैसे कमाए
लगभग 1 महीने के पश्चात सोयाबीन की बुवाई शुरू हो जाएगी। इसके पहले किसानों के पास सोयाबीन की फसल (Soybean Cultivation) के लिए खेत तैयार करने का समय है आईए जानते हैं वह जरूरी बातें जिसे सोयाबीन का उत्पादन बढ़ाया जा सकता है –
- खेत तैयार करते समय ये काम जरूर करें
- गहरी जुताई करें।
- खेत को समतल रखें।
- पुराने खरपतवार साफ करें।
- पानी निकासी का सही इंतजाम रखें।
- अच्छी तरह तैयार खेत में बीज तेजी से अंकुरित होते हैं।
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मिट्टी जांच से बच सकता है बड़ा नुकसान
कई किसान सीधे बुवाई शुरू कर देते हैं, लेकिन मिट्टी की जांच नहीं करवाते। बाद में फसल में पोषण की कमी दिखाई देने लगती है। अगर बुवाई से पहले मिट्टी परीक्षण करा लिया जाए, तो यह पता चल जाता है कि खेत में कौन-से पोषक तत्व कम हैं। उसी हिसाब से खाद और उर्वरक डालने पर खर्च भी कम होता है और उत्पादन बेहतर मिलता है।
उन्नत बीज ही बदल सकते हैं किस्मत
सस्ते बीज के चक्कर में न पड़ें कई बार किसान बिना प्रमाणित बीज खरीद लेते हैं, जिससे अंकुरण कमजोर होता है और रोग बढ़ जाते हैं। हमेशा अच्छी कंपनी के प्रमाणित और उन्नत किस्म वाले बीज ही चुनें। इससे पौधे मजबूत बनते हैं और फसल में एक जैसी बढ़वार देखने को मिलती है। साफ और चमकदार रोगमुक्त अच्छी अंकुरण क्षमता वाला बीज होना चाहिए। स्थानीय मौसम के अनुसार उपयुक्त अच्छे बीज खेती की आधी सफलता माने जाते हैं। (Soybean Cultivation)
बीजोपचार करना बिल्कुल न भूलें
छोटे खर्च से बच सकता है बड़ा नुकसान, बीजोपचार सोयाबीन की खेती (Soybean Cultivation) का सबसे जरूरी कदम माना जाता है। इससे बीजों को शुरुआती फंगस और बीमारियों से सुरक्षा मिलती है। अगर बीजोपचार न किया जाए, तो पौधों में शुरुआत से ही रोग लगने का खतरा बढ़ जाता है।
किसान कैसे करें बीजोपचार
बुवाई से एक दिन पहले बीजों को जैविक या रासायनिक उपचार से तैयार करें। किसान ट्राइकोडर्मा, राइजोबियम कल्चर या नीम आधारित उत्पादों का इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे पौधों की जड़ें मजबूत बनती हैं और अंकुरण भी तेजी से होता है। (Soybean Cultivation)
सही समय पर बुवाई करना बेहद जरूरी
जल्दीबाजी नुकसान पहुंचा सकती है, कई किसान पहली हल्की बारिश होते ही बुवाई शुरू कर देते हैं। लेकिन अगर मिट्टी में पर्याप्त नमी नहीं हो, तो बीज सही तरीके से नहीं उगते । विशेषज्ञों के अनुसार अच्छी बारिश के बाद ही बुवाई करना सबसे सही माना जाता है।
खरपतवार और कीटों को शुरुआत में ही रोकें
खरपतवार फसल का पोषण चुरा लेते हैं, सोयाबीन की खेती में खरपतवार सबसे बड़ी समस्या माने जाते हैं। ये पौधों का पोषण और पानी दोनों खींच लेते हैं। अगर समय पर नियंत्रण न किया जाए, तो पैदावार काफी घट सकती है। फसल को सुरक्षित रखने के आसान उपाय किसान समय-समय पर निराई-गुड़ाई करें खेत की निगरानी करते रहें एवं फेरोमोन ट्रैप लगाएं। इसके अलावा नीम आधारित जैविक स्प्रे का उपयोग करें। इससे फसल स्वस्थ रहती है और दवाइयों पर खर्च भी कम आता है।
पोषण प्रबंधन भी है जरूरी
सोयाबीन की अच्छी बढ़वार के लिए संतुलित पोषण बहुत जरूरी है। केवल रासायनिक उर्वरकों पर निर्भर रहने के बजाय जैविक खाद का उपयोग भी करना चाहिए। गोबर खाद, जीवामृत और नीम खली जैसी चीजें मिट्टी की ताकत बढ़ाने में मदद करती हैं। इससे खेत लंबे समय तक उपजाऊ बने रहते हैं। (Soybean Cultivation)
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नमस्कार किसान साथियों….
मेरा नाम जयदीप मालवीय है और मैं एक कॉलेज छात्र हुं। मुझे 10वीं से ही खेती किसानी पर कंटेंट लिखने में गहरी रुचि है। साथियों, हम देखते है कि कई किसान भाइयों को खेती में कम उत्पादन एवं लागत ज्यादा आती है, जिससे उन्हें मुनाफा कम होता है। इसका प्रमुख कारण अभी भी खेती का परंपरागत तरीका अपनाया जाना है। किसान साथी खेती के परंपरागत तरीके से निकल कर आधुनिक तरीके अपनाएं, तभी खेती मुनाफे का सौदा साबित होगी। किसानों को नई नई जानकारी मिलते रहे और कम लागत में उनकी आय में बढ़ोतरी हो यही मेरा मकसद है। इसी को देखते हुए मैं डिजिटल वेबसाइट के जरिए किसानों को सटीक एवं सही जानकारी देने का प्रयास करता हुं। हमारा तरीका सरल और समझने योग्य होता है, ताकि हमारे किसान भाइयों को आसानी से अच्छी-अच्छी जानकारी मिलती रहे और उन्हें किसी भी प्रकार की कोई तकलीफ ना हो। मैं पिछले 4 साल से किसानों के लिए कंटेंट लिख रहा हूं और यही चाहता हुं की मैं आगे भी ज्यादा से ज्यादा किसानों को नई नई जानकारी से अवगत करवाता रहूं।
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