मुख्यमंत्री दुधारू पशु योजना (Dairy Cattle Scheme) पायलट प्रोजेक्ट के तहत एमपी में शुरू की गई है, आईए जानते हैं, इस योजना की पूरी जानकारी..
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Dairy Cattle Scheme | मध्य प्रदेश सरकार वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मना रही है। इस वर्ष में किसानों की आर्थिक उन्नति के लिए प्रदेश सरकार द्वारा कई प्रयास किया जा रहे हैं। किसानों को अलग-अलग योजनाओं के माध्यम से अनुदान दिया जा रहा है। इसी क्रम में मध्य प्रदेश सरकार गांवों तक डेयरी व्यवसाय बढ़ाने के लिए प्रयासरत है इसके लिए सरकार मुख्यमंत्री दुधारू पशु योजना की शुरुआत की है। इस योजना के तहत पशुपालकों को 90% अनुदान दिए जाने का प्रावधान किया गया है।
फिलहाल यह योजना (Dairy Cattle Scheme) प्रदेश में पायलट प्रोजेक्ट के तहत शुरू की गई है। प्रोजेक्ट की सफलता के पश्चात इस योजना को विस्तार दिया जाएगा। इस योजना का लाभ लेने के लिए प्रदेश के पशुपालक किसानों को क्या करना होगा और क्या ही इसकी पात्रता एवं सभी शर्तें आइए जानते हैं..
वर्ष 2028 तक प्रदेश को बनाएंगे देश की मिल्क कैपिटल
Dairy Cattle Scheme | मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों को पशुपालन के लिए प्रेरित कर विभिन्न योजनाओं के माध्यम से पशुपालन और दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा दे रही है। पशुपालन के माध्यम से किसानों की आय बढ़ेगी और वे आत्मनिर्भर होंगे। उन्होंने कहा कि हमारा संकल्प है कि हम प्रदेश में दुग्ध उत्पादन को निरंतर बढ़ाएंगे और वर्ष 2028 तक प्रदेश को देश की मिल्क कैपिटल बनाएंगे। गो-संरक्षण और गो-संवर्धन सरकार की प्राथमिकता है और इसके लिए निरंतर कार्य किया जा रहा है।
यह है मुख्यमंत्री दुधारू पशु योजना | Dairy Cattle Scheme
सरकार गांवों तक डेयरी व्यवसाय बढ़ाने के लिए “मुख्यमंत्री डेयरी प्लस कार्यक्रम” भी शुरू कर रही है। इस कार्यक्रम के तहत मुख्यमंत्री दुधारू पशु योजना शुरू की गई है इस योजना के तहत शुरुआत में आदिवासी पशुपालन को 90% अनुदान (सब्सिडी) पर मुर्रा भैंस और गाय दी जाएगी।
प्रदेश के अति पिछड़ी जनजातियों बैगा, सहरिया और भारिया के पशुपालकों के लिए प्रदेश के 14 जिलों में मुख्यमंत्री दुधारू पशु योजना संचालित की जा रही है, जिसमें 90 प्रतिशत अनुदान पर दो-दो मुर्रा भैंस या गाय प्रदान की जाती हैं। इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री डेयरी प्लस कार्यक्रम को Dairy Cattle Scheme पायलट प्रोजेक्ट के रूप में सीहोर, विदिशा और रायसेन जिलों में संचालित किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री दुधारू पशु योजना की खास बातें
पात्र आदिवासी पशुपालकों को सीधा लाभ मिलेगा। आदिवासी पशुपालकों को 90% तक की सब्सिडी मिलेगी।सरकार द्वारा 2 मुर्रा भैंस या 2 गाय उपलब्ध कराई जाएगी।
मुख्यमंत्री दुधारू पशु योजना (Dairy Cattle Scheme) को अभी सीहोर, विदिशा और रायसेन जिलों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चलाया जा रहा है।
इन तीनों जिलों में प्रोजेक्ट की सफलता के पश्चात प्रदेश के अन्य जिलों में भी इस योजना को लागू किया जाएगा। बताया जा रहा है कि आदिवासी पशुपालक किसानों के अलावा छोटी जोत वाले एवं अनुसूचित जाति के किसानों को भी इस योजना का लाभ दिया जाएगा।
बताया जा रहा है कि वर्तमान में प्रदेश देश के कुल दुग्ध उत्पादन का लगभग 9 प्रतिशत योगदान देता है, जिसे बढ़ाकर 20 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है।
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प्रदेश के पशुपालकों को मिलेगी 25 से 33 % तक सब्सिडी | Dairy Cattle Scheme
राज्य में पशुपालन और डेयरी विकास को गति देने के लिए “मुख्यमंत्री पशुपालन विकास योजना” का नाम परिवर्तित कर “डॉ. भीमराव अंबेडकर विकास योजना” किया गया है। इस योजना के अंतर्गत 25 दुधारू पशुओं की डेयरी इकाई स्थापित करने के लिए लगभग 42 लाख रुपये तक ऋण सहायता उपलब्ध कराई जाएगी, जिसमें 25 से 33 प्रतिशत तक सब्सिडी का प्रावधान है।
प्रदेश में दुग्ध उत्पादन और संग्रहण को बढ़ाने के लिए व्यापक योजना (Dairy Cattle Scheme) बनाई गई है। दुग्ध संकलन क्षमता को बढ़ाते हुए 50 लाख लीटर प्रतिदिन तक दुग्ध संग्रहण का लक्ष्य रखा गया है। अगले 5 वर्षों में दूध संकलन कवरेज वाले गांवों की संख्या 9 हजार से बढ़ाकर 26 हजार करने का लक्ष्य है। इसी अवधि में प्रदेश के कम से कम 50 प्रतिशत गांवों में प्राथमिक डेयरी सहकारी समितियों की स्थापना की जाएगी।
इधर, गौशालाओं का अनुदान बढ़ाया गया
Dairy Cattle Scheme | प्रदेश में गौसंवर्धन बोर्ड के माध्यम से गौशालाओं को चारा-भूसा अनुदान के लिए 505 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया गया है। गौशालाओं में गोवंश के बेहतर आहार की व्यवस्था के लिए प्रति गोवंश दी जाने वाली सहायता राशि 20 रुपये प्रतिदिन से बढ़ाकर 40 रुपये प्रतिदिन कर दी गई है। घायल अथवा असहाय गायों के लिए हाइड्रोलिक कैटल लिफ्टिंग वाहनों की व्यवस्था भी की जा रही है।
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नमस्कार किसान साथियों….
मेरा नाम जयदीप मालवीय है और मैं एक कॉलेज छात्र हुं। मुझे 10वीं से ही खेती किसानी पर कंटेंट लिखने में गहरी रुचि है। साथियों, हम देखते है कि कई किसान भाइयों को खेती में कम उत्पादन एवं लागत ज्यादा आती है, जिससे उन्हें मुनाफा कम होता है। इसका प्रमुख कारण अभी भी खेती का परंपरागत तरीका अपनाया जाना है। किसान साथी खेती के परंपरागत तरीके से निकल कर आधुनिक तरीके अपनाएं, तभी खेती मुनाफे का सौदा साबित होगी। किसानों को नई नई जानकारी मिलते रहे और कम लागत में उनकी आय में बढ़ोतरी हो यही मेरा मकसद है। इसी को देखते हुए मैं डिजिटल वेबसाइट के जरिए किसानों को सटीक एवं सही जानकारी देने का प्रयास करता हुं। हमारा तरीका सरल और समझने योग्य होता है, ताकि हमारे किसान भाइयों को आसानी से अच्छी-अच्छी जानकारी मिलती रहे और उन्हें किसी भी प्रकार की कोई तकलीफ ना हो। मैं पिछले 4 साल से किसानों के लिए कंटेंट लिख रहा हूं और यही चाहता हुं की मैं आगे भी ज्यादा से ज्यादा किसानों को नई नई जानकारी से अवगत करवाता रहूं।
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