मूंगफली बंपर पैदावार के लिए कृषि वैज्ञानिकों ने जारी की यह सलाह..

खरीफ सीजन में मूंगफली की अच्छी पैदावार (Mungfali Cultivation) के लिए किसानों को किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए, जानिए..

व्हाट्सऐप चैनल से जुड़े।

Mungfali Cultivation | खरीफ की फसलों में मूंगफली प्रदेश की महत्त्वपूर्ण तिलहनी फसल है। बदलते जलवायु परिदृश्य में किसान इसकी खेती आधुनिक तरीके से कर उत्पादन बढ़ा सकते हैं।

मूंगफली की बुवाई के पहले अच्छी पैदावार के लिए किस साथियों को किन-किन बातों का ध्यान रखना होगा इसके लिए प्रसिद्ध वैज्ञानिकों ने जरूरी सलाह जारी की है, आईए जानते हैं डिटेल..

मूंगफली की फसल के लिए भूमि व उसकी तैयारी

कृषि वैज्ञानिक बताते हैं कि मूंगफली की खेती के लिए अच्छे जल निकास वाली भुरभुरी दोमट व बलुई दोमट भूमि सर्वोत्तम रहती है। बुवाई से पहले 2-3 बार खेत की देसी हल या कल्टीवेटर से अच्छी जुताई करें ताकि मिट्टी भुरभुरी हो जाए। इसके बाद पाटा चलाकर बुवाई के लिए खेत तैयार करें। Mungfali Cultivation

बुवाई के पहले बीज उपचार करें

कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि मूंगफली में गलकट (कॉलर रॉट) के प्रबन्धन के लिए कार्बोक्सिन 37.5 प्रतिशत एवं थाइरम 37.5 प्रतिशत का 3 ग्राम प्रति किलो दर से बीजोपचार करना चाहिए। Mungfali Cultivation

सफेद लट व दीमक रोकने के लिए इमिडाक्लोप्रिड 600 एफ.एस. का 6.5 मि.ली. या फिप्रोनिल 5 एस. सी. का 10 मि.ली. प्रति किलो बीज की दर से बीजोपचार कर के बुवाई करना चाहिए।

पैदावार बढ़ाने के लिए यह करें

कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक कम्पोस्ट या गोबर की खाद उपलब्ध हो तो बुवाई के 20-25 दिन पहले 10 टन प्रति हैक्टेयर खेत में बिखेर कर अच्छी तरह मिला देनी चाहिए। Mungfali Cultivation

हल्की मिट्टी में शुरुआत की बढ़वार के लिए 30 किलो नाइट्रोजन तथा 60 किलो फास्फोरस, 30 किलो पोटाश प्रति हैक्टेयर के हिसाब से देना लाभप्रद होता है। ज्यादा उत्पादन के लिए अंतिम जुताई से पहले भूमि में 250 किलो जिप्सम प्रति हैक्टेयर के हिसाब से मिला देना चाहिए।

उतपादन बढ़ाने के लिए एन. पी. के. तरल जैव उर्वरक 3 मि.ली./किलो बीज + जस्ता घुलनशील जीवाणु 1.25 मि.ली./किलो बीज की दर से बीजोपचार करना चाहिए। बुवाई का सही समय जून के दूसरे सप्ताह से तिसरे सप्ताह तक है। Mungfali Cultivation

मूंगफली की बिजाई के समय जरूर डालें जिप्सम 

खरीफ फसलों की बुवाई से पहले खेत में 10 से 12 टन अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद डालें। कच्ची गोबर की खाद सीधे खेत में डालने से नुकसान हो सकते हैं। कच्चे गोबर को सड़ाने में मिट्टी के सूक्ष्म जीव ज्यादा नाइट्रोजन का उपयोग करते हैं। इससे फसल को शुरुआती अवस्था में नाइट्रोजन कम मिलती है।

कच्चे गोबर के विघटन के दौरान अमोनिया और अन्य गैसें बनती हैं, जो पौधों की कोमल जड़ों को नुकसान पहुंचा सकती है। कच्चे गोबर में खरपतवारों के बीज जीवित रह सकते हैं, जो खेत में उगकर फसल को नुकसान करते हैं। कच्चा गोबर खाद के उपयोग से दीमक तथा कुछ अन्य कीड़ों प्रकोप हो जाता है।

प्री मानसून की बारिश का सही उपयोग कर मूंगफली की बिजाई का उपयुक्त समय है। मृदा परीक्षण के आधार पर किसानों को अंतिम जुताई से पहले 250 किलोग्राम जिप्सम प्रति हैक्टेयर मिलाने की सलाह दी जाती है। (Mungfali Cultivation)

मूंगफली की यह उन्नत किस्में देगी अच्छी पैदावार

अच्छी पैदावार के लिए किसान साथी मूंगफली की उन्नत किस्म को बोएं। आर.जी. 510 (राज. मूंगफली 1), आर. जी. 559-3 (राज. मूंगफली 3), आर. जी. 638 (राज. मूंगफली 4), राज मूंगफली 5 (आरजी (648), राज मूंगफली 6 (आरजी 575-1) आदि उन्नत किसने की दुआएं करके किसान अच्छी पैदावार ले सकते हैं। Mungfali Cultivation

खरपतवार नियंत्रण के लिए यह करें

कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक मूंगफली की फसल में मोथा खरपतवार के नियंत्रण के लिए गहरी ग्रीष्मकालीन जुताई के बाद फसल की बुवाई के तुरन्त बाद पेण्डिमेथिलीन 30 प्रतिशत + इमिजाथापर 2 प्रतिशत शाकनाशी के तैयार घोल का 800 ग्राम सक्रिय तत्व का प्रति हैक्टेयर की दर से छिड़काव करना चाहिए । Mungfali Cultivation

खरपतवार के लिए खड़ी फसल में बुवाई के 15 से 20 दिन बाद शाकनाशी सोडियम ऐसीफलुओरफेन 165 प्रतिशत + क्लॉडिनोफॉप प्रोपर गिल 8 प्रतिशत (मिश्रित घोल) शाकनाशी का 245 ग्राम सक्रिय तत्व 500 लीटर पानी में मिलाकर प्रति हैक्टेयर की दर से छिड़काव करना चाहिए।

कीट व रोग नियंत्रण के लिए यह करें

मूंगफली की फसल में सफेद लट राकने के लिए इमिडाक्लोप्रिड 600 एफ.एस. का 6.5 मि.ली. अथवा फिप्रोनिल 5 एस. सी. का 10 मि.ली. प्रति किलो बीज की दर से बीजोपचार करके बुवाई करना चाहिए। खड़ी फसल में सफेद लट के लिए बुवाई के 21-25 दिन बाद कीटनाशक दवा इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एस. एल. का 300 मि.ली. प्रति हैक्टे. की दर से डालें। Mungfali Cultivation

(नोट :– यह जानकारी कृषि वैज्ञानिकों द्वारा जारी की गई सलाह के आधार पर दी जा रही है। किसान साथी एक बार अपने क्षेत्र कृषि अधिकारियों एवं विशेषज्ञों से सलाह लेकर कार्य करें। किसी भी अप्रिय स्थिति के लिए चौपाल समाचार की कोई जिम्मेदारी नहीं रहेगी।)

कृषि योजना खेती किसानी, मंडी, भाव लेटेस्ट बिजनेस एवं टेक की जानकारी के लिए आप हमारे व्हाट्सएप चैनल को फॉलो कर सकते है।

व्हाट्सऐप चैनल से जुड़े।

ये भी पढ़े …मध्य भारत में अधिक उपज देने वाली सोयाबीन की टॉप 3 किस्मों की पैदावार, बीज दर एवं संपूर्ण विशेषताएं देखें..

डीजल-बिजली के झंझट से मिल रही मुक्ति, सोलर पंप पर किसानों को मिल रहा 90% तक अनुदान, जानें पूरी योजना..

90 दिनों में पकने व 30 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक पैदावार वाली सोयाबीन की नई किस्म JS 2433 की जानकारी देखें..

9560 के साथ पकने वाली, 100% वायरस मुक्त व 6 क्विंटल बिघा की पैदावार देने वाली सोयाबीन की नई वैरायटी की जानकारी..

प्रिय किसानों…!  चौपाल समाचार में आपका स्वागत हैं, हम कृषि विशेषज्ञों कृषि वैज्ञानिकों एवं शासन द्वारा संचालित कृषि योजनाओं के विशेषज्ञ द्वारा गहन शोध कर Article प्रकाशित किये जाते हैं आपसे निवेदन हैं इसी प्रकार हमारा सहयोग करते रहिये और हम आपके लिए नईं-नईं जानकारी उपलब्ध करवाते रहेंगे। आप हमारे टेलीग्राम एवं व्हाट्सएप ग्रुप से नीचे दी गई लिंक के माध्यम से जुड़कर अनवरत समाचार एवं जानकारी प्राप्त करें।

Leave a Comment