खरीफ सीजन में मूंगफली की अच्छी पैदावार (Mungfali Cultivation) के लिए किसानों को किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए, जानिए..
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Mungfali Cultivation | खरीफ की फसलों में मूंगफली प्रदेश की महत्त्वपूर्ण तिलहनी फसल है। बदलते जलवायु परिदृश्य में किसान इसकी खेती आधुनिक तरीके से कर उत्पादन बढ़ा सकते हैं।
मूंगफली की बुवाई के पहले अच्छी पैदावार के लिए किस साथियों को किन-किन बातों का ध्यान रखना होगा इसके लिए प्रसिद्ध वैज्ञानिकों ने जरूरी सलाह जारी की है, आईए जानते हैं डिटेल..
मूंगफली की फसल के लिए भूमि व उसकी तैयारी
कृषि वैज्ञानिक बताते हैं कि मूंगफली की खेती के लिए अच्छे जल निकास वाली भुरभुरी दोमट व बलुई दोमट भूमि सर्वोत्तम रहती है। बुवाई से पहले 2-3 बार खेत की देसी हल या कल्टीवेटर से अच्छी जुताई करें ताकि मिट्टी भुरभुरी हो जाए। इसके बाद पाटा चलाकर बुवाई के लिए खेत तैयार करें। Mungfali Cultivation
बुवाई के पहले बीज उपचार करें
कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि मूंगफली में गलकट (कॉलर रॉट) के प्रबन्धन के लिए कार्बोक्सिन 37.5 प्रतिशत एवं थाइरम 37.5 प्रतिशत का 3 ग्राम प्रति किलो दर से बीजोपचार करना चाहिए। Mungfali Cultivation
सफेद लट व दीमक रोकने के लिए इमिडाक्लोप्रिड 600 एफ.एस. का 6.5 मि.ली. या फिप्रोनिल 5 एस. सी. का 10 मि.ली. प्रति किलो बीज की दर से बीजोपचार कर के बुवाई करना चाहिए।
पैदावार बढ़ाने के लिए यह करें
कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक कम्पोस्ट या गोबर की खाद उपलब्ध हो तो बुवाई के 20-25 दिन पहले 10 टन प्रति हैक्टेयर खेत में बिखेर कर अच्छी तरह मिला देनी चाहिए। Mungfali Cultivation
हल्की मिट्टी में शुरुआत की बढ़वार के लिए 30 किलो नाइट्रोजन तथा 60 किलो फास्फोरस, 30 किलो पोटाश प्रति हैक्टेयर के हिसाब से देना लाभप्रद होता है। ज्यादा उत्पादन के लिए अंतिम जुताई से पहले भूमि में 250 किलो जिप्सम प्रति हैक्टेयर के हिसाब से मिला देना चाहिए।
उतपादन बढ़ाने के लिए एन. पी. के. तरल जैव उर्वरक 3 मि.ली./किलो बीज + जस्ता घुलनशील जीवाणु 1.25 मि.ली./किलो बीज की दर से बीजोपचार करना चाहिए। बुवाई का सही समय जून के दूसरे सप्ताह से तिसरे सप्ताह तक है। Mungfali Cultivation
मूंगफली की बिजाई के समय जरूर डालें जिप्सम
खरीफ फसलों की बुवाई से पहले खेत में 10 से 12 टन अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद डालें। कच्ची गोबर की खाद सीधे खेत में डालने से नुकसान हो सकते हैं। कच्चे गोबर को सड़ाने में मिट्टी के सूक्ष्म जीव ज्यादा नाइट्रोजन का उपयोग करते हैं। इससे फसल को शुरुआती अवस्था में नाइट्रोजन कम मिलती है।
कच्चे गोबर के विघटन के दौरान अमोनिया और अन्य गैसें बनती हैं, जो पौधों की कोमल जड़ों को नुकसान पहुंचा सकती है। कच्चे गोबर में खरपतवारों के बीज जीवित रह सकते हैं, जो खेत में उगकर फसल को नुकसान करते हैं। कच्चा गोबर खाद के उपयोग से दीमक तथा कुछ अन्य कीड़ों प्रकोप हो जाता है।
प्री मानसून की बारिश का सही उपयोग कर मूंगफली की बिजाई का उपयुक्त समय है। मृदा परीक्षण के आधार पर किसानों को अंतिम जुताई से पहले 250 किलोग्राम जिप्सम प्रति हैक्टेयर मिलाने की सलाह दी जाती है। (Mungfali Cultivation)
मूंगफली की यह उन्नत किस्में देगी अच्छी पैदावार
अच्छी पैदावार के लिए किसान साथी मूंगफली की उन्नत किस्म को बोएं। आर.जी. 510 (राज. मूंगफली 1), आर. जी. 559-3 (राज. मूंगफली 3), आर. जी. 638 (राज. मूंगफली 4), राज मूंगफली 5 (आरजी (648), राज मूंगफली 6 (आरजी 575-1) आदि उन्नत किसने की दुआएं करके किसान अच्छी पैदावार ले सकते हैं। Mungfali Cultivation
खरपतवार नियंत्रण के लिए यह करें
कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक मूंगफली की फसल में मोथा खरपतवार के नियंत्रण के लिए गहरी ग्रीष्मकालीन जुताई के बाद फसल की बुवाई के तुरन्त बाद पेण्डिमेथिलीन 30 प्रतिशत + इमिजाथापर 2 प्रतिशत शाकनाशी के तैयार घोल का 800 ग्राम सक्रिय तत्व का प्रति हैक्टेयर की दर से छिड़काव करना चाहिए । Mungfali Cultivation
खरपतवार के लिए खड़ी फसल में बुवाई के 15 से 20 दिन बाद शाकनाशी सोडियम ऐसीफलुओरफेन 165 प्रतिशत + क्लॉडिनोफॉप प्रोपर गिल 8 प्रतिशत (मिश्रित घोल) शाकनाशी का 245 ग्राम सक्रिय तत्व 500 लीटर पानी में मिलाकर प्रति हैक्टेयर की दर से छिड़काव करना चाहिए।
कीट व रोग नियंत्रण के लिए यह करें
मूंगफली की फसल में सफेद लट राकने के लिए इमिडाक्लोप्रिड 600 एफ.एस. का 6.5 मि.ली. अथवा फिप्रोनिल 5 एस. सी. का 10 मि.ली. प्रति किलो बीज की दर से बीजोपचार करके बुवाई करना चाहिए। खड़ी फसल में सफेद लट के लिए बुवाई के 21-25 दिन बाद कीटनाशक दवा इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एस. एल. का 300 मि.ली. प्रति हैक्टे. की दर से डालें। Mungfali Cultivation
(नोट :– यह जानकारी कृषि वैज्ञानिकों द्वारा जारी की गई सलाह के आधार पर दी जा रही है। किसान साथी एक बार अपने क्षेत्र कृषि अधिकारियों एवं विशेषज्ञों से सलाह लेकर कार्य करें। किसी भी अप्रिय स्थिति के लिए चौपाल समाचार की कोई जिम्मेदारी नहीं रहेगी।)
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नमस्कार किसान साथियों….
मेरा नाम जयदीप मालवीय है और मैं एक कॉलेज छात्र हुं। मुझे 10वीं से ही खेती किसानी पर कंटेंट लिखने में गहरी रुचि है। साथियों, हम देखते है कि कई किसान भाइयों को खेती में कम उत्पादन एवं लागत ज्यादा आती है, जिससे उन्हें मुनाफा कम होता है। इसका प्रमुख कारण अभी भी खेती का परंपरागत तरीका अपनाया जाना है। किसान साथी खेती के परंपरागत तरीके से निकल कर आधुनिक तरीके अपनाएं, तभी खेती मुनाफे का सौदा साबित होगी। किसानों को नई नई जानकारी मिलते रहे और कम लागत में उनकी आय में बढ़ोतरी हो यही मेरा मकसद है। इसी को देखते हुए मैं डिजिटल वेबसाइट के जरिए किसानों को सटीक एवं सही जानकारी देने का प्रयास करता हुं। हमारा तरीका सरल और समझने योग्य होता है, ताकि हमारे किसान भाइयों को आसानी से अच्छी-अच्छी जानकारी मिलती रहे और उन्हें किसी भी प्रकार की कोई तकलीफ ना हो। मैं पिछले 4 साल से किसानों के लिए कंटेंट लिख रहा हूं और यही चाहता हुं की मैं आगे भी ज्यादा से ज्यादा किसानों को नई नई जानकारी से अवगत करवाता रहूं।
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