अगस्त में सोयाबीन फसल की निगरानी जरूरी, रोग-कीट और खरपतवार प्रबंधन पर दें विशेष ध्यान

सोयाबीन (Soybean Crop) किसानों को विशेष सलाह – बारिश के बाद फसल की स्थिति देखकर ही करें दवा और पोषण का प्रयोग।

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Soybean Crop | सोयाबीन की 35 से 50 दिन की फसल के लिए अगस्त का समय बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लगातार बारिश और खेतों में अधिक नमी के कारण इस अवधि में रोग, कीट और खरपतवार का प्रकोप बढ़ सकता है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार अगले 15 से 20 दिन फसल के बेहतर विकास और उत्पादन की दृष्टि से अहम हैं। किसानों को फसल की नियमित निगरानी करते हुए आवश्यकता के अनुसार ही कृषि रसायनों और पोषक तत्वों का प्रयोग करना चाहिए।

बारिश के बाद Soybean Crop खेतों में अधिक नमी और आर्द्रता रहने से जड़ गलन, तना गलन तथा पत्ती धब्बा जैसे फफूंदजनित रोगों का खतरा बढ़ जाता है। यदि फसल स्वस्थ है और केवल बचाव के लिए उपचार करना है तो संपर्क फफूंदीनाशक का उपयोग किया जा सकता है। वहीं पौधों में मुरझाने, जड़ों के काले पड़ने, पत्तियों पर धब्बे या तने में गलन जैसे शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर रोग की सही पहचान कर विशेषज्ञ की सलाह से उपयुक्त प्रणालीगत फफूंदीनाशक का चयन करना चाहिए।

कृषकों को यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि येलो मोजेक वायरसजनित रोग है। इस पर फफूंदीनाशक प्रभावी नहीं होता। इसके नियंत्रण के लिए रोग फैलाने वाली सफेद मक्खी की निगरानी और समय पर नियंत्रण जरूरी है।

40 दिन बाद खरपतवार पर रखें नजर | Soybean Crop

लगातार बारिश के कारण सोयाबीन खेतों में 40 से 45 दिन बाद खरपतवार की दूसरी लहर दिखाई दे सकती है। ऐसे में बिना सोचे-समझे दोबारा खरपतवारनाशी का छिड़काव करने से फसल को नुकसान पहुंच सकता है। पहले खेत में खरपतवार की संख्या और प्रकार का आकलन करना चाहिए। कम संख्या होने पर हाथ से निराई-गुड़ाई अपेक्षाकृत सुरक्षित विकल्प है। अधिक प्रकोप की स्थिति में केवल सोयाबीन में अनुमोदित और फसल की अवस्था के अनुकूल पोस्ट-इमर्जेंस खरपतवारनाशी का प्रयोग कृषि विशेषज्ञ की सलाह से किया जाना चाहिए। फूल आने की अवस्था में अनावश्यक खरपतवारनाशी के प्रयोग से फसल पर तनाव बढ़ सकता है।

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फूल आने पर पोषण प्रबंधन भी अहम | Soybean Crop

सोयाबीन (Soybean Crop) में फूल और शुरुआती फलियां बनने की अवस्था में पोषण प्रबंधन पर भी ध्यान देना जरूरी है। 00:52:34 जैसे जलविलेय उर्वरक से फास्फोरस और पोटाश की पूर्ति की जाती है, जबकि बोरॉन फूल, परागण और फलियों के विकास में भूमिका निभाता है। हालांकि किसी भी पोषक तत्व या मिश्रण का प्रयोग फसल की वास्तविक स्थिति, उत्पाद के लेबल और स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार ही किया जाना चाहिए।

विशेषज्ञों ने किसानों से खेत में पानी का जमाव नहीं होने देने, रोग एवं कीटों की नियमित निगरानी करने तथा आवश्यकता के बिना विभिन्न दवाओं को मिलाकर छिड़काव नहीं करने की अपील की है। अगस्त में फसल (Soybean Crop) की स्थिति देखकर समय पर रोग, कीट, खरपतवार और पोषण प्रबंधन करना सोयाबीन की संभावित उपज के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।

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