फसल बीमा योजना में हुआ बड़ा बदलाव, जल्दी होगी किसानों की भरपाई…

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (Crop Insurance Scheme) में नई तकनीक से होगा फसल नुकसान का हिसाब। देखें पूरी डिटेल.

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Crop Insurance Scheme | देशभर में किसानों के लिए चलाई जा रही प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में अब बड़ा बदलाव हुआ है। प्राकृतिक आपदाओं और मौसम की मार से फसल को हुए नुकसान का सटीक रिकॉर्ड तैयार करना, क्लेम प्रक्रिया को तेज करना और किसानों को समय पर बीमा राशि (Crop Insurance Scheme) उपलब्ध कराने के लिए WINDS, YS-Tech, राष्ट्रीय फसल बीमा पोर्टल (NCIP), डिजीक्लेम आर्किटेक्चर और क्रॉप लॉस असेसमेंट ऐप (CLAP) जैसी आधुनिक तकनीकों को योजना से जोड़ा गया है। कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने जानकारी देते हुए बताया कि अब इस तकनीक से किसानो को जल्दी बीमा क्लेम मिलेगा। आईए जानते हैं पूरी डटेल…

12 राज्यों के 344 जिलों में लागू हुई तकनीक | Crop Insurance Scheme

सरकार के अनुसार वर्ष 2025-26 में वाईएस-टेक का उपयोग 12 राज्यों के 344 जिलों में किया गया। कई राज्यों ने अपनी जरूरत के अनुसार इस तकनीक को अधिक महत्व भी दिया है। मध्य प्रदेश ने वाईएस-टेक आधारित आंकड़ों को 100 प्रतिशत वेटेज दिया है, जबकि महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश ने 50 प्रतिशत, वहीं ओडिशा और कर्नाटक ने 40 प्रतिशत वेटेज लागू किया है। सरकार नियमित रूप से इस तकनीक की समीक्षा भी कर रही है, ताकि इसकी सटीकता और प्रभावशीलता बनी रहे।

राष्ट्रीय फसल बीमा पोर्टल से डिजिटल हुई पूरी प्रक्रिया

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (Crop Insurance Scheme) के संचालन को आसान बनाने के लिए सरकार ने राष्ट्रीय फसल बीमा पोर्टल विकसित किया है। इस पोर्टल के माध्यम से किसानों का पंजीकरण, प्रीमियम जमा करना, बीमित किसानों का रिकॉर्ड तैयार करना, जानकारी साझा करना और क्लेम राशि सीधे बैंक खाते में भेजने जैसी सभी प्रक्रियाएं ऑनलाइन की जा रही हैं। इससे पारदर्शिता बढ़ी है और कागजी प्रक्रिया में कमी आई है।

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डिजीक्लेम आर्किटेक्चर से क्लेम प्रक्रिया होगी तेज

सरकार ने वर्ष 2022 से Crop Insurance Scheme डिजीक्लेम आर्किटेक्चर लागू किया है। यह प्रणाली राष्ट्रीय फसल बीमा पोर्टल, सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (PFMS) और बीमा कंपनियों की भुगतान प्रणाली को आपस में जोड़ती है। इससे क्लेम की निगरानी बेहतर होती है और भुगतान प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक तेज और पारदर्शी बनती है।

Crop Insurance Scheme क्लेम में देरी पर देना होगा 12 प्रतिशत ब्याज

बता दें कि, सरकार ने किसानों के हित में एक महत्वपूर्ण प्रावधान भी किया है। यदि कोई बीमा कंपनी समय पर क्लेम का भुगतान नहीं करती है, तो उसे 12 प्रतिशत ब्याज के साथ राशि का भुगतान करना होगा। इसी तरह यदि राज्य सरकार समय पर अपने हिस्से का प्रीमियम जारी नहीं करती है, तो उस पर भी 12 प्रतिशत ब्याज लागू होगा। इसके अलावा केंद्र सरकार ने अपने प्रीमियम हिस्से को राज्य के हिस्से से अलग करने की व्यवस्था भी की है, ताकि किसानों के क्लेम में अनावश्यक देरी न हो।

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