गर्मी में मूंग की पैदावार डेढ़ से दो गुनी ज्यादा निकलानी हो तो अपनाएं यह टिप्स..

जायद में मूंग की पैदावार बढ़ाने के लिए किसान साथियों को क्या-क्या करना (Mung Production Tips) चाहिए, आइए जानते हैं..

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Mung Production Tips | मध्य प्रदेश में मूंग का रखवा प्रति वर्ष बढ़ रहा है। किसान साथी अब इस तीसरी फसल के रूप में लेकर फायदा उठा रहे हैं। देश की कुल मूंग उपज में एमपी की हिस्सेदारी 35% तक है। मूंग की सबसे बड़ी खूबी ये है कि यह गेहूं के तुरंत बाद बोई जाती है और केवल दो महीने में तैयार हो जाती है। यह खरीफ से पहले की वह फसल है जो किसान को कुछ अतिरिक्त कमाने का मौका देती है। खासकर उन किसानों के लिए जिनके पास सिंचाई की सुविधा है। मूंग अब प्रदेश में तीसरी फसल बन चुकी है।

किसान साथियो, आपके गांव में ही एक किसान ऐसा होता है जिसकी मूंग की पैदावार (Mung Production Tips) बाकी किसानों से डेढ़ से दो गुनी ज्यादा निकलती है, जबकि मिट्टी वही होती है, पानी वही होता है और मौसम भी वही होता है। फर्क सिर्फ एक चीज का होता है – सही पोषण प्रबंधन और सही समय पर सही खाद का उपयोग। मूंग की फसल एक दलहनी फसल है और इसका पूरा उत्पादन इस बात पर निर्भर करता है कि आपने शुरुआत से लेकर दाना भरने तक पौधे को क्या “डाइट” दी है। ऐसे में आईए जानते हैं उत्पादन बढ़ाने के कारगर उपाय..

मूंग की बोवनी के दौरान यह गलती ना करें | Mung Production Tips

कृषि विशेषज्ञ बताते हैं कि अधिकतर किसान सबसे बड़ी गलती यह करते हैं कि वह बुवाई के समय डीएपी या ज्यादा यूरिया डाल देते हैं। मूंग की जड़ों में प्राकृतिक रूप से नाइट्रोजन बनाने की क्षमता होती है, इसलिए ज्यादा नाइट्रोजन देने से पौधा केवल पत्तियां बढ़ाता है, फलियां कम बनाता है।

बीज उपचार करने से बढ़ेगी 15 से 20% पैदावार

Mung Production Tips | मूंग की बुवाई के दौरान अधिकतर किसान यह गलती कर बैठते हैं कि वह बीज उपचार नहीं कर पाते। बहुत से किसान इसे नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि यही सबसे सस्ता और सबसे ज्यादा फायदा देने वाला तरीका है। बुवाई से पहले राइजोबियम कल्चर और पीएसबी कल्चर से बीज उपचार करने से जड़ों में गांठें ज्यादा बनती हैं, जिससे पौधे को प्राकृतिक नाइट्रोजन मिलती रहती है और मिट्टी में मौजूद फॉस्फोरस पौधे को उपलब्ध हो जाता है। केवल 50 से 100 रुपये का यह निवेश पैदावार को 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ा सकता है।

अधिक पैदावार के लिए यह करें | Mung Production Tips

कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक मूंग के लिए सबसे अच्छा बेसल खाद सिंगल सुपर फॉस्फेट (SSP) माना जाता है, क्योंकि इसमें फॉस्फोरस के साथ सल्फर और कैल्शियम भी मिलता है, जो दाने की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों बढ़ाता है। प्रति एकड़ लगभग 3 बोरी एसएसपी देना बहुत फायदेमंद रहता है। इसके साथ 15 से 20 किलो पोटाश देने से पौधा मजबूत बनता है और पोषक तत्व फलियों तक सही तरीके से पहुंचते हैं।

कृषि विशेषज्ञ बताते हैं कि मूंग की फसल (Mung Production Tips) कम लागत में ज्यादा मुनाफा देने वाली फसल है, बस वैज्ञानिक तरीके अपनाने की जरूरत है। इसलिए बुवाई में एसएसपी और पोटाश, 25 दिन पर 19:19:19, फूल पर 0:52:34 + बोरॉन और दाना भरने पर 0:0:50 दे तो पैदावार में स्पष्ट बढ़ोतरी देखी जा सकती है। कई किसानों ने इस तरीके से उत्पादन में 30 से 50 प्रतिशत तक सुधार पाया है।

मूंग की पैदावार बढ़ाने के जरुरी टिप्स

Mung Production Tips | कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक मूंग की फसल जब 20 से 25 दिन की हो जाए तब पौधे की बढ़वार का समय होता है। इस समय सीधे यूरिया देने की जगह संतुलित पोषण देना ज्यादा जरूरी होता है। एक किलो घुलनशील एनपीके 19:19:19 को लगभग 150 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ छिड़काव करने से पौधे मजबूत और मोटे बनते हैं। यदि पौधा कमजोर हो तो ह्यूमिक एसिड या समुद्री शैवाल आधारित टॉनिक मिलाने से जड़ों की वृद्धि तेजी से होती है।

मूंग की फसल (Mung Production Tips) में 35 से 40 दिन की अवधि में फूल आते हैं यह अवस्था बहुत नाजुक होती है इस समय फसल का ध्यान रखना बहुत जरूरी होता है कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक इस समय फसल को नाइट्रोजन नहीं बल्कि फॉस्फोरस और बोरॉन की जरूरत होती है। एक किलो एनपीके 0:52:34 और 100 ग्राम बोरॉन प्रति एकड़ का स्प्रे फूलों की संख्या बढ़ाता है और झड़ने से रोकता है। बोरॉन फूल को फली में बदलने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

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मूंग की फसल (Mung Production Tips) में 55 से 60 दिन की अवस्था में दाना भरने लगता है। इस समय एक किलो एनपीके 0:0:50 या सल्फेट ऑफ पोटाश प्रति एकड़ स्प्रे करने से दाने मोटे, चमकदार और वजनदार बनते हैं। यही स्प्रे मंडी में ज्यादा भाव दिलाने में मदद करता है। इसके साथ-साथ कुछ जरूरी सावधानियां हमेशा याद रखें। मूंग की फसल में स्प्रे सुबह या शाम के समय ही करें। तेज धूप में स्प्रे करने से फायदा कम हो जाता है। कीटनाशक और खाद मिलाने से पहले घोल की जांच जरूर करें। खरपतवार नाशक के साथ कभी भी खाद या दवा न मिलाएं।

मूंग को पीला मोजेक रोग से बचाने की सलाह

Mung Production Tips | कृषि वैज्ञानिक डॉ. मुकेश बकोलिया ने मूंग उत्पादक किसानों को सलाह देते हुए बताया कि ग्रीष्मकालीन मूंग फसल में पीला मोजेक रोग जो कि वायरसजनित है सफेद मक्खी द्वारा रोग ग्रसित पौधे से स्वस्थ पौधे में फैलता है। उन्होंने सलाह दी है कि प्रारंभिक अवस्था में पीला मोजेक ग्रसित पौधों को खेत से उखाड़ कर नष्ट करें तथा पीले प्रपंच का प्रयोग करें, जिससे सफेद मक्खी पीले प्रपंच पर चिपक जाती है।

डॉ. बंकोलिया ने बताया कि पीला मोजेक रोग का वाहक रस चूस कीट सफेद मक्खी के नियंत्रण के लिये कीटनाशक थायो मेथाक्साम 25 डब्ल्यूजी 40 ग्राम प्रति एकड़ अथवा इमीडाक्लोप्रिड 17.8 एसएल 50 मिली प्रति एकड़ की दर से घोल बनाकर सुबह-शाम के समय छिड़काव करें। पानी की मात्रा पावर पंप द्वारा 100 से 125 लीटर प्रति एकड़ प्रयोग करें। : Mung Production Tips

मूंग में खरपतवार नाशकों का उपयोग ना करें

जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर एवं राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय ग्वालियर के वाईस चांसलर रहे प्रो. (डॉ.) विजय सिंह तोमर का कहना है कि किसान वर्तमान में ग्रीष्मकालीन मूंग की खेती (Mung Production Tips) बड़े स्तर पर कर रहे हैं। जो 10 साल पहले तक, बड़े पैमाने पर खरीफ में की जाती थी और यह पर्यावरण के लिए अनुकूल थी। इसकी खेती वर्षा आधारित परिस्थितियों में की जाती थी। मूंग के पौधों की जड़ों में नाइट्रोजन फिक्सिंग बैक्टीरिया की मौजूदगी होने से यह फसल मिट्टी की उर्वरता को भी बढ़ाती है।

किसानों के द्वारा ग्रीष्मकालीन मूंग को जल्दी सुखाने के लिए खरपतवारनाशक पैराक्वेट एवं ग्लाइफोसेट का उपयोग किया जा रहा है। इसका दुष्प्रभाव वातावरण के साथ ही मूंग का सेवन करने वाले आमजन पर भी होता है । इससे विभिन्न प्रकार की बीमारियों के बढ़ने की संभावना होती है। इसलिए इनका उपयोग बिलकुल भी ना करें। : Mung Production Tips

सिंचाई के दौरान यह ध्यान रखें

सिंचाई प्रबंधन भी बहुत महत्वपूर्ण है। मूंग की फसल को ज्यादा पानी बिल्कुल पसंद नहीं है। खासकर फूल आने के समय खेत में पानी भर जाने से फूल गिरने की समस्या बढ़ जाती है। हल्की सिंचाई और जरूरत के अनुसार पानी देना ही सही तरीका है।

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