इस बार गेंहू रचेगा नया इतिहास अक्टूबर माह तक बिकेगा 3000 रु. प्रति क्विंटल के भाव से ऊपर, देखें पूरी जानकारी

आने वाले समय में गेहूं के भाव क्या रहने वाले हैं। भाव को लेकर विशेषज्ञों का क्या है अनुमान, इस Wheat Price Predict रिपोर्ट में आईए जानते हैं..

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Wheat Price Predict | ईरान युद्ध का असर अब वैश्विक स्तर पर खाद्य सुरक्षा पर पड़ने लगा है। मिडिल ईस्ट का युद्ध सिर्फ क्षेत्र ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में लोगों की जिंदगी और आजीविका को प्रभावित कर रहा है।

इस युद्ध के चलते अब खाद्य, ईंधन और उर्वरक आपूर्ति में आई बाधाओं का सबसे ज्यादा असर दुनिया के कमजोर तबकों पर पड़ेगा, खासकर उन देशों में जो कम आय वाले हैं और आयात पर निर्भर हैं।

वर्ल्ड बैंक, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और संयुक्त राष्ट्र के वर्ल्ड फूड प्रोग्राम (WFP) ने संयुक्त बयान जारी कर चेतावनी दी है कि तेल, प्राकृतिक गैस और उर्वरकों की कीमतों में तेज बढ़ोतरी से खाद्य पदार्थ महंगे होंगे और लोगों की पहुंच भोजन तक और मुश्किल हो जाएगी। Wheat Price Predict

विशेषज्ञों का मानना है कि गेहूं, चावल सहित अन्य खाद्य पदार्थों के दाम में आने वाले समय के दौरान तेजी देखने को मिल सकती है। ऐसे में आने वाले समय के दौरान भारत में गेहूं के भाव क्या रहने की संभावना है आईए जानते हैं..

चार साल बाद भारत से गेहूं का निर्यात शुरू

गेहूं का निर्यात Wheat Price Predict फिर से शुरू हो गया है। केन्द्र सरकार ने अतिरिक्त 25 लाख टन गेहूं निर्यात की अनुमति देकर कुल एक्सपोर्ट लिमिट को 50 लाख टन तक पहुंचा दिया है, जबकि पहले से 10 लाख टन गेहूं प्रोडक्ट का निर्यात भी खुला हुआ है। ऐसे में यह कदम सीधे तौर पर घरेलू बाजार में बढ़ती आवक और भारी उत्पादन के दबाव को संतुलित करने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि निर्यात प्रतिबंध के चलते गेहूं के भाव कमजोर बने हुए थे, लेकिन अब एक्सपोर्ट लिमिट और बढ़ने से बड़े खरीदार, मिलर्स और एक्सपोर्टर सक्रिय होंगे, जिससे बाजार में एक मजबूती आने की संभावना दिखाई देने लगी है। बताया जा रहा है कि सरकार का यह कदम स्टॉक मैनेजमेंट को आसान बनाने, बाजार में लिक्विडिटी बढ़ाने और पीक आवक के दौरान डिस्ट्रेस सेलिंग को रोकने के लिहाज से लिया गया है।

गौरतलब है कि भारत सरकार ने वर्ष 2022 में गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था। उस समय देश में भीषण गर्मी के कारण गेहूं की फसल को भारी नुकसान हुआ था। उत्पादन घटने और सरकारी भंडार कम होने के चलते घरेलू बाजार में गेहूं की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थीं। Wheat Price Predict

घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता देते हुए सरकार ने 2023 और 2024 में भी इस प्रतिबंध को जारी रखा। इस साल भारत में गेहूं की रिकॉर्ड पैदावार की उम्मीद जताई जा रही है। फसल अच्छी होने और स्टॉक की स्थिति सुधरने के बाद सरकार ने निर्यात को फिर से अनुमति देने का फैसला किया है।

विशेषज्ञों के अनुसार, निर्यात शुरू होने से किसानों को बेहतर दाम मिलने की संभावना है, वहीं भारत की वैश्विक बाजार में स्थिति भी मजबूत होगी। खासतौर पर मध्य‑पूर्व और एशियाई देशों में भारतीय गेहूं की मांग पहले से ही बनी हुई है। निर्यात शुरू होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में गेहूं की उपलब्धता बढ़ेगी। साथ ही, यह संकेत भी मिलता है कि भारत अब घरेलू आपूर्ति को लेकर पहले से ज्यादा आश्वस्त है। Wheat Price Predict

निर्यात मंजूरी से गेहूं के भाव में आई तेजी

Wheat Price Predict कीमतों में गिरावट को रोकने के लिए सरकार ने 50 लाख टन गेहूं और 10 लाख टन उत्पादों के निर्यात को मंजूरी दी है।

वैश्विक बाजार में भी ऑस्ट्रेलिया और यूक्रेन में मौसम की दिक्कतों के कारण सप्लाई चिंता बनी हुई है, जिससे इंटरनेशनल प्राइस सपोर्ट मिल रहा है। देखा जाए तो अभी बाजार में बड़ा उछाल नही दिख रहा है, लेकिन लंबी अवधि में अगर सप्लाई टाइट होती है और एक्सपोर्ट बढ़ता है तो इस साल गेहूं के भाव में तेजी Wheat Price Predict रहने के संकेत हैं।

IMF-वर्ल्ड बैंक की चेतावनी- गहराएगा खाद्य संकट

संस्थाओं ने आगाह किया कि अगर हालात ऐसे ही बने रहे, तो वैश्विक स्तर पर खाद्य संकट और गहराएगा और महंगाई का दबाव बढ़ता जाएगा। विशेषज्ञ बताते हैं कि इस वर्ष ऑस्ट्रेलिया में उवर्रक महंगे होने से किसान गेहूं की कम बुआई कर रहे हैं, जो चिंता का विषय है। Wheat Price Predict

इसका सीधा असर भारत में भी होगा और मंडियों में अत्यधिक गिरावट पर ब्रेक लगेगा। इधर एक्सपोर्ट डिमांड धीरे-धीरे बढ़ने से इंटरनेशनल बाजार से भी जुड़ाव मजबूत होगा। अगर वैश्विक स्तर पर कीमतें सपोर्टिव रहती हैं तो भारतीय गेहूं को प्रतिस्पर्धात्मक फायदा मिल सकता है, कुल मिलाकर गेहूँ बाजार की चाल अब स्थिर से मजबूत रहने की संभावना है। Wheat Price Predict

भारत से लेकर ग्लोबल मार्केट तक गेहूं में तेजी के संकेत

सरकार ने कुल खरीद लक्ष्य बढ़ाकर 345 लाख टन कर दिया है। उत्पादन की बात करें तो निजी एजेंसी एग्री वॉच ने इसे करीब 110.65 मिलियन टन बताया है और माना है कि मौसम की मार से करीब 50 लाख टन उत्पादन घट गया, वरना आंकड़ा 115.7 मिलियन टन तक जा सकता था। Wheat Price Predict

इस साल गेहूं की बुवाई 33.46 मिलियन हेक्टेयर में हुई जो पिछले साल के 32.80 मिलियन हेक्टेयर से ज्यादा है, यानी रकबा बढ़ा लेकिन फरवरी की गर्मी, मार्च-अप्रैल की बारिश और ओलावृष्टि ने दाने की क्वालिटी और पैदावार दोनों पर असर डाला, हालांकि नई हाई यील्ड और हीट-रेसिस्टेंट वैरायटी ने नुकसान को कुछ हद तक संभाल लिया।

वैश्विक लेवल पर देखें तो 2026-27 में गेहूं उत्पादन घटकर करीब 82.10 करोड़ टन रहने का अनुमान है, जबकि खपत 82.50 करोड़ टन के आसपास रह सकती है, यानी करीब 40 लाख टन की कमी से स्टॉक पर दबाव बन सकता है। कुल वैश्विक स्टॉक करीब 28.40 करोड़ टन के आसपास अनुमानित है। अल-नीनो के असर से ऑस्ट्रेलिया, अर्जेंटीना और ब्राजील जैसे देशों में उत्पादन प्रभावित होने की संभावना है। Wheat Price Predict

व्यापारी सोच समझकर कर रहे गेहूं की खरीदी

इस समय सरकार के पास गेहूं का बड़ा स्टॉक रखा हुआ है यह स्टॉक आगे कीमतों में बड़ी तेजी पर ब्रेक लगा सकता है, क्योंकि नई खरीद और चावल आने के बाद स्टोरेज की जगह सीमित रह जाएगी, जिससे सरकार को OMSS (ओपन मार्केट सेल स्कीम) के जरिए जुलाई से ही गेहूं बाजार में उतारना पड़ सकता है। Wheat Price Predict

यही कारण है कि बड़े व्यापारी और प्रोसेसर अभी स्टॉक बनाने से बच रहे हैं। दूसरी तरफ, ग्लोबल मार्केट से थोड़ा सपोर्ट मिल रहा है। शिकागो में गेहूं वायदा करीब $6.59 प्रति बुशल तक पहुंच गया है, जो लगभग दो साल का हाई है.

ऑस्ट्रेलिया में 29 मिलियन टन (करीब 19% कम) उत्पादन का अनुमान और सऊदी अरब द्वारा 9.85 लाख टन की बड़ी खरीद जैसे फैक्टर काम कर रहे हैं। अगर ये ग्लोबल मजबूती बनी रहती है तो भारत को एक्सपोर्ट का मौका मिल सकता है। Wheat Price Predict

साथ ही अल-नीनो का मौसम जोखिम भी एक बड़ा फैक्टर है जो आगे चलकर अहम फेक्टर साबित होगा। अगर स्थिति बिगड़ी तो सरकार स्टॉक रिलीज करने से बच सकती है, जिससे भाव को सपोर्ट मिल सकता है।

कुल मिलाकर बाजार में नीचे गिरावट सीमित है क्योंकि सरकारी खरीद और ग्लोबल सपोर्ट है और लंबी अवधि में गेहूं हल्की तेजी मंदी के रूझान के साथ उपर की तरफ ही बढ़ता दिख रहा है। Wheat Price Predict

आने वाले समय में गेहूं के भाव क्या रहेंगे

दिल्ली के भाव को बाजार संकेतक मानते हुए एग्रोकॉर्प इंटरनेशनल के हेड रिसर्च इंद्रजीत पॉल कहते हैं कि एमएसपी पर खरीद जारी है, लेकिन मंडियों में आने वाले पूरे माल का उठान नहीं हो पा रहा। आटा मिलों और ट्रेडर्स की खरीद भी जरूरत आधारित है। Wheat Price Predict

पॉल कहते हैं, निकट अवधि में गेहूं 2,600-2,800 रुपये प्रति क्विंटल के दायरे में रह सकता है। लंबी अवधि में सरकारी भंडार घटा, तो भाव को सहारा मिलेगा और भाव 2,800-3,000 रुपये तक जा सकता है।

एक नजर भारत में गेहूं के स्टॉक पर

भारत में ITC और ब्रिटानिया जैसी बड़ी कंपनियों की खरीदारी नीचे गिरावट को रोक रही है। सरकार ने भी इस संतुलन को बनाए रखने के लिए खरीद लक्ष्य 15% बढ़ाकर 345 लाख टन कर दिया है। Wheat Price Predict

देश में 2025-26 सीजन का उत्पादन 1100 से 1200 लाख टन के बीच अनुमानित है, जबकि कुल उपलब्धता 560 लाख टन से ऊपर जा सकती है, जो कि PDS की सालाना जरूरत 180-200 लाख टन से काफी ज्यादा है, यानी सीजन खत्म होते-होते 300 से 350 लाख टन तक स्टॉक बचने का अंदेशा है, जो बफर 75 लाख टन से बहुत ऊपर है।

FCI और राज्य एजेंसियों के पास कुल मिलाकर करीब 952 लाख टन की स्टोरेज कैपेसिटी है, जिसमें पहले से ही करीब 604 लाख टन अनाज भरा पड़ा है और राज्यों के पास करीब 499.9 लाख टन धान अलग से मौजूद है। गौरतलब है कि रबी 2026 सीजन में गेहूं की बुवाई बढ़कर करीब 334.17 लाख हेक्टेयर हो गई है, जो पिछले साल 328.04 लाख हेक्टेयर थी। Wheat Price Predict

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