बहुत कठिन है डगर MSP पर गेहूं बेचने की, 19 लाख में से अब तक एक लाख 45 हज़ार 71 किसानों से हुई खरीदी, आगे क्या, देखें रिपोर्ट..

गेहूं खरीदी (Wheat Procurement) की धीमी रफ्तार से बढ़ी परेशानी, सरकार ने किसानों की सुविधा के लिए यह दो बढ़े फैसले किए, देखें डिटेल..

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Wheat Procurement | रबी विपणन वर्ष 2026 के तहत मध्य प्रदेश में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी का कार्य 10 अप्रैल जारी है। गेहूं खरीदी है तो प्लांट बुकिंग के अंतिम तिथि 30 अप्रैल निर्धारित की गई है। गेहूं खरीदी प्रक्रिया के शुरुआती दौर से लेकर अब तक किसानों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

जानकार बताते हैं कि अब तक की स्थिति को देखते हुए तो यही कहा जा सकता है कि सरकार द्वारा निर्धारित समयावधि के दौरान गेहूं उपार्जन के लिए पंजीकृत सभी किसानों की उपज का विक्रय होना नामुमकिन है। इधर किसानों की परेशानी को देखते हुए सरकार ने हाल ही में दो बड़े फैसले दिए हैं जिनसे खरीदी की प्रक्रिया में तेजी आएगी। आईए जानते हैं, पूरी डिटेल..

इस वर्ष उपार्जन के लिए रिकार्ड पंजीयन | Wheat Procurement

प्रदेश में गेहूँ उपार्जन के लिये इस वर्ष रिकार्ड 19 लाख 4 हजार किसानों ने पंजीयन कराया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 3 लाख 60 हजार अधिक है। विगत वर्ष समर्थन मूल्य पर लगभग 77 लाख मीट्रिक टन गेहूँ का उपार्जन किया गया था। इस वर्ष युद्ध की विपरीत परिस्थितियों के बावजूद किसानों के हित में सरकार द्वारा 78 लाख मीट्रिक टन गेहूँ के उपार्जन का लक्ष्य रखा गया है, जो कि पिछले वर्ष से एक लाख मीट्रिक टन अधिक है।

गेहूं खरीदी की प्रक्रिया में 6 लाख से अधिक किसान

Wheat Procurement | सरकार द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक न्यूनतम समर्थन मूल्य पर अभी तक एक लाख 45 हज़ार 71 किसानों से 63 लाख 27 हजार 410 क्विंटल गेहूँ की खरीदी की जा चुकी है। किसानों को 920 करोड़ 7 लाख रुपए का भुगतान उनके बैंक खाते में किया जा चुका है। अभी तक 5 लाख 36 हजार 367 किसानों द्वारा 2 करोड़ 25 लाख 96 हजार 450 क्विंटल गेहूँ के विक्रय के लिये स्लॉट बुक किये जा चुके हैं।

इस हिसाब से देखे तो गेहूं खरीदी में 6 लाख से अधिक किसान प्रक्रियाधीन है, वहीं दूसरी ओर फूल 19 लाख से अधिक किसानों का पंजीयन हुआ है। ऐसे में आने वाले 10 दिनों में 12 लाख किसानों से गेहूं का उपार्जन किया जाना है, जो बहुत कठिन कार्य लगता है।

सरकार ने किसानों के लिए उठाया तात्कालिक कदम

Wheat Procurement | किसानों की सुविधा के लिए प्रदेश सरकार ने उपार्जन केंद्रों पर तौल कांटों की संख्या 4 से बढ़कर 6 कर दी गई है। इससे समय पर किसानों द्वारा लाये गए गेहूं की तुलाई हो सकेगी। खरीदी के लिये 3171 उपार्जन केन्द्र बनाये गये हैं। गेहूँ की खरीदी कार्यालयीन दिवसों में होती है। सेटेलाइट ई-मेल में मिलान नहीं पाए गए खसरों को छोड़कर उसी किसान के शेष खसरों पर गेहूँ की फसल विक्रय हेतु स्लॉट बुकिंग की सुविधा दी गई है।

वहीं दूसरी ओर उपार्जन केन्द्र की क्षमता अनुसार उपज की तौल की जा सके एवं अधिक से अधिक किसानों से उपार्जन किया जा सके, इसके लिये प्रतिदिन प्रति उपार्जन केन्द्र पर गेहूँ विक्रय के लिये स्लॉट बुकिंग की क्षमता 1000 क्विंटल से बढ़ाकर 1500 क्विंटल की गई है। : Wheat Procurement

गेहूँ के उपार्जन के लिये आवश्यक बारदानों की व्यवस्था की जा चुकी है। उपार्जित गेहूँ को रखने के लिये जूट बारदानों के साथ ही पीपी/एचडीपी बैग एवं जूट के भर्ती बारदाने का उपयोग किया जा रहा है। समर्थन मूल्य पर उपार्जित गेहूँ के सुरक्षित भंडारण की पर्याप्त व्यवस्था की गई है। उपार्जित गेहूँ में से 51 लाख 75 हजार 370 क्विंटल गेहूँ का परिवहन किया जा चुका है।

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सरकार यह करें तभी सभी किसानों के गेहूं का उपार्जन होगा | Wheat Procurement

गेहूं उपार्जन के मामले में एक महत्वपूर्ण बात यह कि प्रति दिन एक वेयरहाउस पर केवल 1500 क्विंटल गेहूं का स्लॉट बुक हो रहा है। इस तरह, 10 दिनों में प्रत्येक वेयरहाउस पर कुल 16,000 क्विंटल ही तौला जा सकेगा। प्रदेश में 350 लाख टन का उत्पादन जिसमें से 160 लाख टन से ज़्यादा का पंजीयन हुआ यदि इस 1500 क्विंटल कि खरीद सीमा से खरीदी हुई तो 10 दिनों में 50 लाख टन से ज्यदा खरीद नहीं होंगी‌ और टोटल खरीदी का आंकड़ा 110 लाख क्विंटल तक रह सकता है।

ऐसे में कई किसान पंजीयन (Wheat Procurement) के बावजूद अपना गेहूं न्यूनतम समर्थन मूल्य पर नहीं बेच सकेंगे। जानकारों का कहना है कि यदि सरकार स्लॉट बुकिंग की प्रक्रिया में सरलता लाएं और वेयरहाउस की लिमिट बढ़ाकर 2500 क्विंटल प्रतिदिन करें तो तय समय अवधि में पंजीयन करवाने वाले के समय में गेहूं का उपार्जन हो पाएगा।

दोबारा सत्यापन की प्रक्रिया हुई पूरी, अब बढ़ेगी भीड़

Wheat Procurement | गौरतलब है कि समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीदी 10 अप्रैल से शुरू हुई है, शुरुआत में अभी सिर्फ छोटे किसानों को ही स्लॉट बुकिंग की सुविधा दी गई, जिससे बड़े किसानों की बुकिंग फिलहाल प्रभावित हो रही है। नतीजतन कई किसान शादी-विवाह की तैयारियों के चलते भी गेहूं बेचने उपार्जन केंद्रों पर नहीं पहुंच सके।

इधर, राजस्व विभाग द्वारा दोबारा सत्यापन की प्रक्रिया पूरी कर ली हैं, अब स्लॉट बुकिंग फिर से शुरू हो गई हैं। वेयर हाउस प्रबंधकों का कहना हैं कि पहले एक सप्ताह खरीदी की गति धीमी रही अब खरीदी की स्पीड़ बढ़ेगी। अब बड़े किसान भी उपार्जन केंद्रों पर गेहूं लेकर पहुंचेंगे, जिससे अचानक भीड़ बढ़ने की संभावना है।

ओला प्रभावित गेहूं की खरीदी नियमों में ढील

Wheat Procurement | ओलावृष्टि और बेमौसम बारिश से प्रदेश के कई जिलों में गेहूं की फसल को भारी नुकसान पहुंचा था। दाने सिकुड़ गए हैं और कई जगह टूटे हुए गेहूं के कारण किसानों को गुणवत्ता संबंधी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। प्रदेश में ऐसी स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार ने रबी विपणन सत्र 2026-27 के लिए मध्यप्रदेश में उपज खरीदी के नियमों में ढील दी है।

किसानों को राहत देने के उद्देश्य से लस्टर लॉस यानी चमक में कमी की सीमा बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दी गई है। इसके साथ ही सिकुड़े और टूटे दानों की स्वीकार्य सीमा 6 से बढ़ाकर 10 प्रतिशत कर दी है। : Wheat Procurement

हालांकि निर्देशों के अनुसार क्षतिग्रस्त और आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त दानों की कुल सीमा 6 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए। इस ढील के तहत खरीदे जाने वाले गेहूं का भंडारण अलग श्रेणी में किया जाएगा, ताकि गुणवत्ता के अनुसार उचित प्रबंधन सुनिश्चित किया जा सके। : Wheat Procurement

इधर, मंडियों में गेहूं के भाव में आई गिरावट

Wheat Procurement | इधर कृषि उपज मंडियों में इन दिनों गेहूं की आवक तेज हो गई है, लेकिन किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है। सरकारी खरीदी में देरी और स्लॉट बुकिंग की सीमाओं के कारण किसान मजबूरी में समर्थन मूल्य 2625 रुपए प्रति क्विंटल से 300 से 400 रुपए कम दाम पर गेहूं बेच रहे हैं।

गौरतलब है कि इस वर्ष गेहूं खरीदी 10 अप्रैल से शुरू हुई, जो कि करीब एक माह की देरी से है। वर्तमान में खरीदी केंद्रों पर केवल 4 से 5 एकड़ तक के किसानों के लिए ही स्लॉट बुकिंग हो रही है, जबकि बड़े किसान अब भी इंतजार कर रहे हैं। ऐसे में किसान मजबूर होकर मंडी का रुख कर रहे हैं, जहां उन्हें 2000 से 2300 रुपए प्रति क्विंटल तक ही भाव मिल रहा है। : Wheat Procurement

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  1. विषय: गेहूं खरीदी में किसानों के साथ हो रहे अन्याय के संबंध में

    माननीय महोदय,

    सविनय निवेदन है कि हम मध्य प्रदेश के किसान आज अत्यंत दुख और चिंता के साथ यह पत्र लिख रहे हैं। वर्तमान में गेहूं खरीदी के दौरान हमारी उपज को यह कहकर अस्वीकार किया जा रहा है कि उसमें मिट्टी या अन्य कण मिले हुए हैं। यह स्थिति हमारे लिए बेहद पीड़ादायक है।

    महोदय, हम किसान दिन-रात मेहनत करके, प्राकृतिक परिस्थितियों से लड़कर, अपने पसीने से अन्न उगाते हैं। यह अन्न उसी मिट्टी से पैदा होता है, जिसमें हम खेती करते हैं। ऐसे में यह कहना कि उसमें मिट्टी नहीं होनी चाहिए, पूरी तरह व्यवहारिक नहीं लगता। थोड़ी बहुत प्राकृतिक अशुद्धि हर फसल में होना स्वाभाविक है।

    हम आपको यह भी याद दिलाना चाहते हैं कि एक समय ऐसा था जब हमारा देश विदेशों, विशेषकर अमेरिका से निम्न गुणवत्ता का गेहूं आयात करने को मजबूर था। आज वही भारत अपने किसानों की मेहनत से आत्मनिर्भर बना है। देश का किसान आज पूरे देश का पेट भर रहा है, लेकिन बदले में उसे अपमान और अस्वीकृति मिल रही है।

    हमारी आपसे विनम्र प्रार्थना है कि:

    1. गेहूं खरीदी के मापदंडों में व्यावहारिक और किसान हितैषी दृष्टिकोण अपनाया जाए।
    2. छोटे-मोटे प्राकृतिक कारणों से किसानों की उपज को अस्वीकार न किया जाए।
    3. किसानों के साथ सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित किया जाए।

    अंत में, हम आशा करते हैं कि आप हमारी समस्याओं को समझेंगे और उचित कदम उठाकर किसानों को राहत प्रदान करेंगे।

    धन्यवाद।

    भवदीय,
    एमपी किस्मत का मारा किसान

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