किसान भाइयों 2026 का मानसून रहेगा चिंताजनक, देखें मानसून को लेकर जारी पूर्वानुमान..

मध्य प्रदेश और देश में इस वर्ष मानसून कैसा रहेगा आईए जानते हैं मौसम विभाग का (Monsoon Forecast) पूर्वानुमान..

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Monsoon Forecast | मौसम का पूर्वानुमान जारी करने वाली निजी संस्था स्काईमेट के बाद अब मौसम विभाग ने भी एमपी सहित देश के कई राज्यों में मानसून को लेकर पूर्वानुमान जारी कर दिया है। आईएमडी की ओर से जारी किए गए प्रारंभिक पूर्वानुमान के अनुसार इस वर्ष अल नीनो के कारण मानसून कमजोर रहेगा। देश में इस साल सामान्य से कम बारिश होने के आसार हैं।

भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने यह जानकारी दी। IMD के मुताबिक 2026 में मानसून सीजन में देश में करीब 80 सेंटीमीटर बारिश हो सकती है। 1971-2020 के आंकड़ों के आधार पर देश में औसत बारिश 87 सेंटीमीटर मानी जाती है। मौसम विभाग Monsoon 2026 Forecast की ओर से जारी किए गए मानसून के लेकर पूर्वानुमान को डिटेल में देखें..

एमपी सहित कई राज्यों में कमजोर रहेगा मानसून

कुछ समय पहले निजी संस्था मौसम को लेकर भविष्यवाणी करने वाली निजी संस्था स्काईमेट मैं मानसून को लेकर पूर्वानुमान जारी किया था इसका इमेज के मुताबिक के द्वारा जारी किए गए पूर्वानुमान के मुताबिक इस वर्ष अल नीनो का प्रभाव रहेगा। यही पूर्वानुमान आईएमडी में भी जारी किया है। IMD ने पिछले आठ साल में पहली बार मानसून के सामान्य से कम रहने की बात कही है। Monsoon 2026 Forecast

आईएमडी द्वारा जारी किए गए पूर्वानुमान के मुताबिक मध्य प्रदेश सहित देश के कई राज्यों में मानसून कमजोर रहेगा। वहीं लद्दाख, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश के मध्य हिस्सों, दक्षिण ओडिशा और पूर्वोत्तर राज्यों में सामान्य बारिश की संभावना है।

अल नीनो से मानसून में हल्की देरी संभव

IMD के डिप्टी डायरेक्टर जनरल डॉ. एम. मोहापात्रा ने कहा कि इस साल देश में कुल बारिश लॉन्ग पीरियड एवरेज (LPA) का करीब 92% रहने का अनुमान है। यह 2018 के बाद सबसे कम है। Monsoon 2026 Forecast

2018 में सामान्य के मुकाबले 91% बारिश हुई थी। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक जून के आसपास अल नीनो की स्थिति बन सकती है। यह आमतौर पर भारत में मानसून को कमजोर करता है, जिससे बारिश में कमी और ब्रेक की स्थिति बन सकती है।

सितंबर में राहत मिलने की संभावना

बताया जा रहा है कि 1951 के बाद से देश में अब तक 16 बार अल नीनो की स्थिति बनी है। इनमें से 10 बार देश में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई, जबकि 6 मौकों पर यह पैटर्न अलग रहा। Monsoon 2026 Forecast

हालांकि राहत भरी खबर यह है कि सीजन के आखिर (सितंबर) में इंडियन ओशन डाइपोल के पॉजिटिव फेज में आने की संभावना है। यह स्थिति आमतौर पर बारिश को बढ़ाती है, जिससे अल नीनो के असर की कुछ भरपाई हो सकती है।

MP में भी कमजोर पड़ सकता है मानसून

मध्य प्रदेश में इस बार सामान्य से कम बारिश होने के संकेत है। भारतीय मौसम विभाग (IMD), नई दिल्ली ने यह अनुमान जताया है। इसके मुताबिक, प्रदेश के अधिकांश जिलों में 90 से 95% तक पानी गिरेगा। ओवरऑल एवरेज 30 से 32 इंच बारिश हो सकती है। प्रदेश की सामान्य बारिश औसत 37.3 इंच है। Monsoon 2026 Forecast

मौसम विभाग की माने तो इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, चंबल, जबलपुर, रीवा, शहडोल, सागर और नर्मदापुरम संभाग में सामान्य से कम या सामान्य बारिश होने का अनुमान है, जबकि भोपाल संभाग के भोपाल, विदिशा, सीहोर में सामान्य या इससे ज्यादा पानी गिरेगा। मौसम विभाग की पिछले साल की ‘भविष्यवाणी’ सटिक निकली थी।

बता दें कि साल 2023 में प्रदेश के 25 से ज्यादा जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई थी, लेकिन पिछले दो साल यानी, 2024 और 2025 में कोटे से ज्यादा पानी बरस गया। पिछले साल तो कुल 121 प्रतिशत बारिश हुई थी। यह अनुमान से 15% ज्यादा थी। Monsoon 2026 Forecast

पिछले साल समय से पहले आया था मानसून

गौरतलब है कि पिछले साल मानसून तय समय से 8 दिन पहले यानी 24 मई को ही केरल पहुंच गया था। मानसून केरल से आगे बढ़ते हुए महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में आमतौर पर मध्य जून तक पहुंचता है। Monsoon 2026 Forecast

11 जून तक मुंबई और 8 जुलाई तक पूरे देश में फैल जाता है। वहीं इसकी वापसी उत्तर-पश्चिम भारत से 17 सितंबर को शुरू होती है और यह पूरी तरह 15 अक्टूबर तक लौट जाता है।

अल नीनो इफेक्ट की वजह से मानसून में देरी हो सकती है। हालांकि सीजन के आखिर में सितंबर माह के दौरान थोड़ी राहत मिल सकती है। IMD के आंकड़ों के मुताबिक, बीते 150 साल में मानसून के केरल पहुंचने की तारीखें अलग-अलग रही हैं। 1918 में मानसून सबसे पहले 11 मई को केरल पहुंच गया था, जबकि 1972 में सबसे देरी से 18 जून को केरल पहुंचा था। Monsoon 2026 Forecast

क्या है अल नीनो और ला नीना पैटर्न

अल नीनो: इसमें समुद्र का तापमान 3 से 4 डिग्री बढ़ जाता है। इसका प्रभाव 10 साल में दो बार होता है। इसके प्रभाव से ज्यादा बारिश वाले क्षेत्र में कम और कम बारिश वाले क्षेत्र में ज्यादा बारिश होती है। Monsoon 2026 Forecast

ला नीना: इसमें समुद्र का पानी तेजी से ठंडा होता है। इसका दुनियाभर के मौसम पर असर पड़ता है। आसमान में बादल छाते हैं और अच्छी बारिश होती है।

जून में एक्टिव होगा अल नीनो

जून में अल नीनो के एक्टिव होने की संभावना है। इसके सक्रिय होने से सूखे के हालात बन सकते हैं। पिछले ENSO (अल नीनो सदर्न ऑसिलेशन) घटनाओं के डेटा से पता चलता है कि मई तक इसके एक्टिव होने का पूर्वानुमान मुश्किल है। इसलिए अल नीनो आएगा भी तो इसकी संभावना जून से ही बन सकती है। Monsoon 2026 Forecast

ऑस्ट्रेलिया के ब्यूरो ऑफ मेट्रोलॉजी (BoM) ने एक रिपोर्ट में इस बात की जानकारी दी है। BoM ने कहा कि उसके मॉडल से पता चलता है कि ट्रॉपिकल पैसिफिक में समुद्र की सतह का तापमान फरवरी के आखिर तक ENSO की सामान्य स्थिति में वापस आ जाएगा। मई तक सामान्य स्थिति बनी रहने की संभावना है।इसके बाद ही अल नीनो की एक्टिविटी में किसी तरह का बदलाव देखने को मिलेगा।

मौसम विभाग के अधिकारियों ने कहा है कि अल नीनो, जो तीन साल पहले भी खराब मौसम के लिए जिम्मेदार था, इस साल भी गर्मी बढ़ा सकता है और मौसम बिगाड़ सकता है। Monsoon 2026 Forecast

दक्षिण के राज्यों के अलावा बाकी राज्यों में भी अल नीनो की वजह से तेज गर्मी बढ़ सकती है। इंडिया मेट्रोलॉजिकल डिपार्टमेंट (IMD) इस बात का संकेत दे चुका है कि अल नीनो के असर के कारण 2026 की गर्मियों में तापमान ज्यादा हो सकता है।

इस वर्ष भीषण गर्मी के आसार

वर्तमान में अल नीनो के कारण मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर का पानी सामान्य से अधिक गर्म है। इसके चलते हवाएं कमजोर होकर उलट दिशा में चलने लगी है, जिससे गर्म पानी अमेरिका की ओर खिसकता है और भारतीय मानसून कमजोर पड़ता है इसका प्रभाव तापमान पर भी पड़ेगा और गर्मी सामान्य से अधिक रह सकती है। Monsoon 2026 Forecast

IMD अधिकारियों ने यह भी बताया है कि 2026 का साल 2025 से ज्यादा गर्म हो सकता है। किसी भी क्षेत्र में अल नीनो और ला नीना के एक्टिव होने के लिए ENSO को जिम्मेदार माना जाता है।

ENSO का साइकल ला नीना और अल नीनो के बीच चलता है जिससे कभी ला नीना तो कभी अल नीनो की स्थिति बनती है। हर एक से तीन साल बाद इन दोनों वेदर सिस्टम की एक्टिविटी दर्ज की जाती है। Monsoon 2026 Forecast

मानसून के सामान्य से कमजोर रहने का यह पड़ेगा असर

देश में कुल बारिश का करीब 75% हिस्सा मानसून के दौरान होता है, जो सिंचाई, पीने के पानी और बिजली उत्पादन के लिए बेहद जरूरी है। Monsoon 2026 Forecast

करीब 64% आबादी कृषि पर निर्भर है। सिर्फ 55% खेती योग्य जमीन ही सिंचाई से कवर है।

कम बारिश का असर खरीफ सीजन की बुवाई, फसल उत्पादन और कुल कृषि गतिविधियों पर पड़ेगा, जिससे किसानों की लागत और जोखिम दोनों बढ़ सकते हैं। Monsoon 2026 Forecast

बारिश कम होने से उत्पादन घट सकता है, जिसका असर सप्लाई पर पड़ेगा और इससे सब्जियों, दालों सहित खाने-पीने की चीजों की कीमतें बढ़ सकती हैं।

खेती कमजोर रहने पर गांवों में आय कम हो सकती है, जिससे ग्रामीण बाजार में खर्च और मांग दोनों प्रभावित होंगे। Monsoon 2026 Forecast

ग्रामीण मांग में कमी आने पर ट्रैक्टर और टू-व्हीलर जैसे वाहनों की बिक्री पर भी असर पड़ने की संभावना है।

अगर बारिश कम रहती है तो डैम और जलाशयों का जलस्तर सामान्य से नीचे रह सकता है, जिससे आगे चलकर पानी की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।

कम बारिश और ज्यादा गर्मी की स्थिति में बिजली की खपत बढ़ेगी, खासकर उन क्षेत्रों में जहां तापमान ज्यादा रहता है।

IMD मानसून Monsoon 2026 Forecast को लेकर मई के आखिरी सप्ताह में दूसरा और ज्यादा विस्तृत पूर्वानुमान जारी करेगा, जिससे स्थिति और साफ होगी।

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