एमपी के किसानों को गेहूं उपार्जन (Wheat Procurement) के मामले में बड़ी राहत मिली है सरकार ने यह व्यवस्था की जानिए पूरी डिटेल..
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Wheat Procurement | मध्य प्रदेश में इस वर्ष गेहूं उपार्जन के कार्य में देरी हुई। जिसके कारण किसानों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। किसानों के लिए सबसे बड़ी परेशानी स्लॉट बुकिंग की रही। प्रदेश सरकार द्वारा की गई व्यवस्था के मुताबिक सर्वप्रथम छोटे किसानों के स्लॉट बुक हो रहे थे उसके पश्चात दो हेक्टेयर से अधिक की कृषि भूमि वाले किसानों के स्लॉट बुक होना शुरू हुए।
इसी बीच सरकार द्वारा किसानों के लिए दो महत्वपूर्ण कार्य किए हैं। सर्वप्रथम राज्य सरकार ने केंद्र सरकार से गेहूं उपार्जन (Wheat Procurement) का कोटा 78 लाख मैट्रिक टन से बढ़कर 130 लाख मैट्रिक टन करने का अनुरोध किया। जिस पर केंद्र सरकार ने राज्य सरकार को 100 मेट्रिक टन गेहूं खरीदी का लक्ष्य दे दिया है। इसके पश्चात अब कल से स्लॉट बुकिंग की नई व्यवस्था क्या रहेगी आइए जानते हैं..
कोविड-19 के बाद अब हुए सबसे अधिक पंजीयन
Wheat Procurement | रबी विपणन वर्ष 2026-27 में 19.04 लाख कृषको द्वारा पंजीयन कराया गया है। पंजीकृत कृषको का रकबा 41.64 लाख हेक्टेयर तथा उत्पादन 163.20 लाख मे. टन है। रबी विपणन वर्ष 2021-22 में कोविड-19 के प्रभाव के कारण लगभग 19.47 लाख कृषको द्वारा पंजीयन कराया गया था तथा लगभग 128 लिख मे. टन गेहूं का उपार्जन हुआ था।
गेहूं उपार्जन का कोटा 100 लाख मीट्रिक टन हुआ | Wheat Procurement
इस वर्ष पश्चिम एशिया में उत्पन्न स्थिति के कारण मध्यप्रदेश की मंडियों में गेहूं का मॉडल दर 2200 रुपये प्रति क्विंटल है, जो समर्थन मूल्य की तुलना में कम है, इस प्रकार इस वर्ष उपार्जन की स्थिति वर्ष 2021-22 के कोविड-19 में हुए उपार्जन के सामान होने की सम्भावना है। रबी विपणन वर्ष 2026-27 में भारत शासन द्वारा निर्धारित य 78 लाख मे. टन से बहुत अधिक गेहूं का उपार्जन होना संभावित है।
मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा कि रबी विपणन वर्ष 2026-27 में खाद्य मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा मध्यप्रदेश हेतु 78 लाख मे. टन गेहूं उपार्जन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। केंद्र सरकार ने गेहूं उपार्जन का कोटा बढ़ाकर 100 लाख मीट्रिक टन कर दिया है। राज्य सरकार ने मध्य प्रदेश का कोटा 130 लाख तन किए जाने का अनुरोध किया था। : Wheat Procurement
प्रतिदिन लगभग 2 लाख मे. टन गेहूं की आवक
प्रदेश में गेहू उपार्जन 4 संभाग में 16 मार्च भागों में 23 मार्च से शुरू होना था परंतु पश्चिम एशिया में युद्ध की स्थति के कारण प्रदेश की उपलब्धता में बाधा आई, इस कारण उपार्जन विलंब से शुरू करना पड़ा। वर्तमान उपार्जन की शुरुआत प्रदेश के 23 जिलो में 9 अप्रैल से और शेष जिलो में 15 ल से प्रारंभ ि लघु और सीमांत कृषकों की सुविधा को दृष्टिगत रखते हुए इन किसानों से पहले उपार्जन प्रारंभ किया गया है। आज दिनांक तक 1.74 लाख किसानों से 7.55 लाख मे. टन गेहूं का उपार्जन (Wheat Procurement) किया जा चुका है तथा प्रतिदिन लगभग 2 लाख मे. टन गेहूं की आवक बनी हुई है।
केंद्र ने भावांतर भुगतान से किया मना
Wheat Procurement | मध्यप्रदेश हेतु निर्धारित उपार्जन लक्ष्य 78 लाख मे.टन से अधिक उपार्जन होने वाली मात्रा पर भावांतर भुगतान योजना (PDPS) का लाभ किसानों को देने हेतु राज्य सरकार द्वारा भारत सरकार से अनुरोध किया गया था, जिसे अमान्य किया गया है।
मध्यप्रदेश में उत्पन्न विषम परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए रबी विपणन वर्ष 2026-27 में गेहूं उपार्जन हेतु निर्धारित लक्ष्य 78 लाख मे.टन में वृद्धि करते हुए 130 लाख मे. टन करने का अनुरोध है, जिससे किसानों को उनकी उपज का उचित लाभ दिया जा सके।
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वेयरहाउस की क्षमता बढ़ाई, कल से बड़े किसानों के स्लॉट भी होंगे बुक
Wheat Procurement | मध्य प्रदेश सरकार ने गेहूं खरीदी शुरू करने के बाद 2 हेक्टेयर से कम की कृषि भूमि वाले छोटे किसानों के स्लॉट बुक किए, इसके बाद अब तो हेक्टेयर से अधिक की कृषि भूमि वाले किसानों के स्लॉट भी बुक होंगे। बताया जा रहा है कि यह व्यवस्था कल अर्थात 25 अप्रैल से शुरू होगी। स्लॉट बुकिंग की अंतिम तिथि 30 अप्रैल निश्चित है। केंद्र सरकार द्वारा लक्ष्य बढ़ाए जाने के पश्चात स्लॉट बुकिंग की तिथि में भी बढ़ोतरी होने की संभावना है। इसके पूर्व सरकार ने वेयरहाउस की क्षमता बढ़ाकर 2150 क्विंटल प्रतिदिन की कर दी है।
बंपर पैदावार को देखते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने केंद्रीय खाद्य, उपभोक्ता मामले एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रहलाद जोशी को पत्र लिखकर लक्ष्य 130 लाख मीट्रिक टन तक बढ़ाने का आग्रह किया था। इसके बाद केंद्र ने 22 लाख मीट्रिक टन अतिरिक्त खरीदी की अनुमति दी है। : Wheat Procurement
इस संबंध में केंद्रीय मंत्री जोशी ने कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को भी पत्र लिखकर जानकारी दी है। अतिरिक्त खरीदी के लिए केंद्र सरकार प्रदेश को 100 लाख मीट्रिक टन गेहूं पर लगभग 25,850 करोड़ रुपए का भुगतान करेगी, जबकि राज्य सरकार 40 रुपए प्रति क्विंटल बोनस के हिसाब से करीब 400 करोड़ रुपए देगी।
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मेरा नाम जयदीप मालवीय है और मैं एक कॉलेज छात्र हुं। मुझे 10वीं से ही खेती किसानी पर कंटेंट लिखने में गहरी रुचि है। साथियों, हम देखते है कि कई किसान भाइयों को खेती में कम उत्पादन एवं लागत ज्यादा आती है, जिससे उन्हें मुनाफा कम होता है। इसका प्रमुख कारण अभी भी खेती का परंपरागत तरीका अपनाया जाना है। किसान साथी खेती के परंपरागत तरीके से निकल कर आधुनिक तरीके अपनाएं, तभी खेती मुनाफे का सौदा साबित होगी। किसानों को नई नई जानकारी मिलते रहे और कम लागत में उनकी आय में बढ़ोतरी हो यही मेरा मकसद है। इसी को देखते हुए मैं डिजिटल वेबसाइट के जरिए किसानों को सटीक एवं सही जानकारी देने का प्रयास करता हुं। हमारा तरीका सरल और समझने योग्य होता है, ताकि हमारे किसान भाइयों को आसानी से अच्छी-अच्छी जानकारी मिलती रहे और उन्हें किसी भी प्रकार की कोई तकलीफ ना हो। मैं पिछले 4 साल से किसानों के लिए कंटेंट लिख रहा हूं और यही चाहता हुं की मैं आगे भी ज्यादा से ज्यादा किसानों को नई नई जानकारी से अवगत करवाता रहूं।
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