अलर्ट मोड पर केंद्र सरकार, जुलाई-अगस्त में गहरा सकता है खाद का संकट, देखें पूरी जानकारी..

आने वाले समय में यूरिया सहित अन्य उर्वरकों की उपलब्धता को लेकर देश में क्या रहेगी स्थिति (Fertilizer Supply News) जानिए..

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Fertilizer Supply News | भारत में दो मुख्य फसल सीजन होते हैं – खरीफ और रबी. खरीफ फसलें जून-जुलाई में मॉनसून शुरू होने पर बोई जाती हैं और सितंबर-अक्टूबर के आसपास काटी जाती हैं, जबकि रबी फसलें अक्टूबर-नवंबर में लगाई जाती हैं और अप्रैल-मई तक काटी जाती हैं। दोनों सीजन में पैदावार बढ़ाने के लिए देश भर में यूरिया और अन्य उर्वरकों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है।

देश में उर्वरकों की पर्याप्त आपूर्ति के लिए सरकार अन्य देशों पर निर्भर है। युद्ध के कारण अन्य देशों से उर्वरकों के लिए कच्चे माल की सप्लाई बाधित हुई है। अगर पश्चिम एशिया की स्थिति जल्द नहीं सुधरी तो भारत में खाद की सप्लाई और प्रभावित हो सकती है। : Fertilizer Supply News

सरकार और कंपनियां इस समस्या को हल करने की कोशिश कर रही हैं, ताकि किसानों को समय पर खाद मिल सके और खेती पर ज्यादा असर न पड़े। आगामी खरीफ सीजन में उर्वरकों की आपूर्ति कैसी रहेगी एवं देश में क्या है उर्वरकों की स्थिति आइए देखते हैं पूरी रिपोर्ट..

Fertilizer Supply News | केंद्र सरकार अलर्ट मोड पर

खाड़ी देशों में चल रहे युद्ध से इंपोर्ट सप्लाई प्रभावित होने की आशंका है। अचानक बढ़ती खरीफ मांग और लॉजिस्टिक्स और डिस्ट्रीब्यूशन पर दबाव है। इन तीनों के चलते जून के बाद गैप बढ़ सकता है और यही संभावित संकट की वजह है। इसी संभावित दबाव को देखते हुए केंद्र और राज्य सरकारें पहले से अलर्ट मोड में हैं।

केंद्र सरकार द्वारा राज्यों में उपलब्ध स्टॉक का फिजिकल वेरिफिकेशन कराया जा रहा है, ताकि कहीं जमाखोरी या गड़बड़ी न हो। उर्वरक वितरण को पारदर्शी बनाने के लिए पीओएस मशीन के जरिए बिक्री अनिवार्य की गई है। संभावित संकट से निपटने के लिए केंद्र और राज्य ने कई कदम उठाए हैं। : Fertilizer Supply News

खरीफ सीजन में खाद की बढ़ेगी मांग | Fertilizer Supply News

अप्रैल से जून के बीच फर्टिलाइजर की खपत सामान्य तौर पर कम रहती है। यही वजह है कि मौजूदा स्टॉक पर्याप्त माना जा रहा है, लेकिन जून के बाद खरीफ सीजन के चलते जुलाई और अगस्त में उर्वरकों की मांग तेजी आएगी। वैश्विक हालात के कारण सप्लाई चेन प्रभावित रही तो यही बढ़ी हुई मांग संकट का रूप ले सकती है। जुलाई और अगस्त में खरीफ सीजन के चलते खाद की मांग अचानक बढ़ जाती है। यानी कुछ ही महीनों में मांग में तेज उछाल आता है, जो सप्लाई पर दबाव बनाता है। : Fertilizer Supply News

जानकार बताते हैं कि खाड़ी देशों में जारी युद्ध का असर अब भारत की खेती पर दिखने की आशंका है। खरीफ सीजन से ठीक पहले फर्टिलाइजर सप्लाई प्रभावित हो सकती है, जिससे जुलाई-अगस्त में मांग और उपलब्धता के बीच बड़ा गैप बनने का खतरा है। फिलहाल राहत की बात यह है कि अप्रैल से जून तक स्थिति नियंत्रण में है।

गैस की कमी से आधा हुआ यूरिया उत्पादन

Fertilizer Supply News | भारत में इन दिनों यूरिया (खाद) बनाने वाले कारखानों को बड़ी समस्या का सामना करना पड़ रहा है। यूरिया बनाने के लिए गैस की जरूरत होती है, जिसे एलएनजी (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) कहा जाता है। यह गैस ज्यादातर विदेशों से जहाजों के जरिए आती है. लेकिन पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण यह गैस समय पर भारत नहीं पहुंच पा रही है।

खासकर होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों में रुकावट आ रही है। इसी वजह से गैस की सप्लाई कम हो गई है। गैस की कमी के कारण भारत के कई यूरिया कारखाने अब आधी क्षमता पर काम कर रहे हैं. यानी पहले जितनी खाद बनती थी, अब उसका लगभग आधा ही उत्पादन हो रहा है। इतना ही नहीं कम उत्पादन के बावजूद इन कारखानों को ज्यादा ऊर्जा खर्च करनी पड़ रही है। : Fertilizer Supply News

गौरतलब है कि भारत दुनिया के सबसे बड़े यूरिया इस्तेमाल करने वाले देशों में से एक है। अगर इसी तरह उत्पादन कम रहा तो आने वाले खरीफ सीजन में किसानों को खाद की कमी का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि अभी देश में यूरिया का स्टॉक ठीक-ठाक है, लेकिन अगर समस्या लंबे समय तक चली तो आगे दिक्कत बढ़ सकती है।

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युद्ध से खाद उत्पादन 15% तक गिरने की आशंका

Fertilizer Supply News | अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण भारत में यूरिया और कॉम्प्लेक्स फर्टिलाइजर का उत्पादन 10-15% गिर सकता है। सप्लाई चेन में रुकावट से फर्टिलाइजर कंपनियों को कच्चे माल की किल्लत हो रही है। इससे न केवल उत्पादन प्रभावित होगा, बल्कि सरकार का सब्सिडी बिल भी 20-25 हजार करोड़ रुपए बढ़ सकता है। क्रिसिल की रिपोर्ट के मुताबिक, कच्चे माल की कमी से कंपनियां पूरी क्षमता का उपयोग नहीं कर पाएंगी, जिससे उनके मुनाफे पर चोट पड़ेगी।

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देश की उर्वरक खपत में यूरिया की हिस्सेदारी 45% है, जबकि कॉम्प्लेक्स फर्टिलाइजर (डीएपी-एनपीके) की हिस्सेदारी एक-तिहाई है। देश यूरिया की 20% और डीएपी की करीब 33% जरूरत आयात से ही पूरी करता है। यूरिया उत्पादन में नेचुरल गैस की लागत कुल खर्च का 80% है। घरेलू भंडार सीमित होने से अमोनिया, फास्फोरिक एसिड जैसे कच्चे माल के लिए भारत विदेशों पर निर्भर है। : Fertilizer Supply News

सरकार का दावा पिछले साल से 26% ज्यादा उर्वरक स्टॉक

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में कहा कि अप्रैल महीने के लिए देश में 163 लाख मीट्रिक उर्वरक टन का स्टॉक उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष उर्वरक स्टॉक 128.54 लाख मीट्रिक टन था। ऐसे में इस वर्ष का स्टॉक पिछली बार की तुलना में 26 प्रतिशत अधिक है। यह भारत सरकार की दूरदर्शी सोच का ही नतीजा है। अनुपूरक मांगों के जरिए उर्वरक विभाग को जो अतिरिक्त बजट उपलब्ध कराया जा रहा है उसका उपयोग आने वाले रबी सीजन की तैयारियों के लिए किया जाएगा। उन्होंने अपने जवाब में कहा कि खरीफ की फसल के लिए सरकार के पास पर्याप्त उर्वरक स्टॉक उपलब्ध है।

कृषि मंत्री ने कहा – नियंत्रण में है स्थिति

Fertilizer Supply News | केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हालात की गंभीरता को देखते हुए सभी राज्यों के कृषि मंत्रियों के साथ बैठक की और साफ किया कि सभी राज्यों को निर्देश दिए हैं कि अगले 15 दिनों तक फर्टिलाइजर के फिजिकल स्टॉक का वेरिफिकेशन करें, ताकि कहीं भी कमी या गड़बड़ी की स्थिति न बने।

उन्होंने यह भी कहा कि खाद की कालाबाजारी और डायवर्जन को रोकना हमारी प्राथमिकता है। हर स्तर पर निगरानी बढ़ाई जा रही है, ताकि किसानों को समय पर उर्वरक मिल सके। यानी फिलहाल स्थिति संभली हुई है, लेकिन असली परीक्षा जुलाई-अगस्त में होगी जब बढ़ती मांग, ग्लोबल सप्लाई दबाव और लॉजिस्टिक्स मिलकर फर्टिलाइजर सिस्टम की क्षमता को परखेंगे। : Fertilizer Supply News

कृषि मंत्री ने कहा कि किसानों को ऐसे संकटों से बचाने के लिए भी कई कदम उठाए गए हैं। पिछले एक दशक 6 यूरिया प्लांट शुरू किए गए हैं। इससे सालाना 74 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा यूरिया प्रोडक्शन कैपिसिटी जुड़ी है। इस दौरान डीएपी और एनपीकेएस जैसी खाद का घरेलू उत्पादन भी 50 लाख मीट्रिक टन बढ़ाया गया है। : Fertilizer Supply News

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