मक्का की बुवाई के दौरान इस तकनीक (Maize Sowing Method) का उपयोग करने से अच्छा उत्पादन मिलेगा और लागत में भी कमी आएगी देखें डिटेल..
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Maize Sowing Method | खरीफ सीजन में धान और सोयाबीन के साथ-साथ मक्का की खेती भी अधिक मात्रा में की जाती है। जून माह के अंतिम सप्ताह से लेकर जुलाई माह के पूरे महीने मक्का की बुवाई की जाएगी। इस समय खरीफ सीजन की शुरुआत होते ही देशभर के किसान मक्का की खेती की तैयारियों में जुट गए हैं।
मक्का की खेती करने वाले किसानों के लिए बदलते मौसम, बेमौसम बारिश और जलभराव की बढ़ती समस्या बड़ी चुनौती बनती जा रही है।
इन समस्याओं के चलते मक्का की पैदावार घटती है जिसे किसानों को कम फायदा मिलता है। ऐसी स्थिति में मक्का की बुवाई एवं मक्का की खेती के दौरान किसानों को किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए, आइए कृषि वैज्ञानिकों से जानते हैं..
मक्का की बुवाई के पूर्व खेत को अच्छे से करें तैयार
कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक मक्का की अच्छी पैदावार के लिए बुवाई से पहले खेत की सही तैयारी करना बहुत जरूरी है। किसान खेत की अच्छी तरह जुताई करें, ताकि मिट्टी भुरभुरी हो जाए और बीज का अंकुरण बेहतर तरीके से हो सके। Maize Sowing Method
मक्का की बुवाई इस तकनीक से करें
खरीफ सीजन में मक्का की खेती करने वाले किसानों के लिए मेड़ विधि काफी फायदेमंद मानी जा रही है। कृषि विभाग ने किसानों को इस तकनीक से खेती करने की सलाह दी है। विशेषज्ञों के अनुसार मेड़ विधि अपनाने से फसल को जलभराव से बचाया जा सकता है। Maize Sowing Method
कृषि विभाग की सलाह है कि जुताई के समय प्रति एकड़ करीब 30 किलो म्यूरेट ऑफ पोटाश (MOP) का प्रयोग करें। इससे फसल को जरूरी पोषक तत्व मिलते हैं, जिससे पौधों की जड़ें मजबूत होती हैं और फसल की बढ़वार अच्छी होती है।
कृषि विभाग ने मक्का की खेती के लिए मेड़ विधि (Ridge Method) को बेहद लाभकारी बताया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर किसान सही तरीके से मेड़ विधि अपनाएं तो वे कम लागत में बेहतर उत्पादन हासिल कर सकते हैं। Maize Sowing Method
कृषि विशेषज्ञ बताते हैं कि मेड़ विधि से मक्का की बुवाई करने पर खेत में पानी जमा नहीं होता। इससे ज्यादा बारिश होने पर भी फसल जलभराव से बची रहती है और पौधों की जड़ें खराब नहीं होती हैं। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार इस तकनीक से फसल को नुकसान कम होता है और पौधों की बढ़वार बेहतर होती है।
बेड प्लांटर मशीन से करें मक्का की बुवाई
कृषि विभाग के अनुसार किसान मेड़ विधि Maize Sowing Method से मक्का की बुवाई के लिए बेड प्लांटर मशीन का इस्तेमाल करना बहुत फायदेमंद रहेगा।
इस मशीन की मदद से बुवाई जल्दी और आसान तरीके से होती है। साथ ही बीज सही दूरी और गहराई पर बोए जाते हैं, जिससे फसल की बढ़वार अच्छी होती है। इस तकनीक से किसानों का समय बचता है और मजदूरी का खर्च भी कम होता है। Maize Sowing Method
मेड़ विधि से मक्का की बुवाई में यह रखें बीज दर
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार मेड़ विधि से मक्का की बुवाई करने के लिए प्रति एकड़ लगभग 10 किलो बीज पर्याप्त माना जाता है।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार सही मात्रा में बीज का उपयोग करने से पौधों को बढ़ने के लिए पर्याप्त जगह मिलती है, जिससे उनकी बढ़वार अच्छी होती है। इससे फसल स्वस्थ रहती है और उत्पादन बढ़ने की संभावना भी अधिक रहती है। Maize Sowing Method
मक्का की खेती के लिए उर्वरक प्रबंधन
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार मक्का की बुवाई के समय प्रति एकड़ करीब 50 किलो डीएपी (DAP) का इस्तेमाल करना चाहिए। इसे मशीन की मदद से बीज के साथ डालने पर पौधों को शुरुआत से ही जरूरी पोषक तत्व मिलते हैं। इससे जड़ें मजबूत बनती हैं और पौधों की शुरुआती बढ़वार अच्छी होती है। Maize Sowing Method
कृषि विशेषज्ञ बताते हैं कि मक्का की अच्छी पैदावार के लिए समय पर यूरिया डालना जरूरी है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार बुवाई के 20-25 दिन बाद 40 किलो यूरिया, 45-50 दिन बाद 50 किलो यूरिया और 65-70 दिन बाद 25 किलो यूरिया प्रति एकड़ का प्रयोग करें। सही समय पर खाद देने से पौधों की बढ़वार अच्छी होती है और उत्पादन बढ़ने में मदद मिलती है।
खरपतवार नियंत्रण के लिए यह करें
कृषि विशेषज्ञ के अनुसार मक्का की अच्छी पैदावार के लिए खेत को खरपतवार मुक्त रखना बहुत जरूरी है। अगर समय पर खरपतवार नियंत्रण नहीं किया जाए तो ये फसल के पोषक तत्व और नमी को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे उत्पादन प्रभावित हो सकता है। Maize Sowing Method
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार बुवाई के 15 से 20 दिन बाद प्रति एकड़ टेम्बोट्रिओन 115 मिलीलीटर और एट्राजिन 500 ग्राम का छिड़काव करना चाहिए। इससे खेत में खरपतवार नियंत्रित रहते हैं और पैदावार में बढ़ोतरी होती है। Maize Sowing Method
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नमस्कार किसान साथियों….
मेरा नाम जयदीप मालवीय है और मैं एक कॉलेज छात्र हुं। मुझे 10वीं से ही खेती किसानी पर कंटेंट लिखने में गहरी रुचि है। साथियों, हम देखते है कि कई किसान भाइयों को खेती में कम उत्पादन एवं लागत ज्यादा आती है, जिससे उन्हें मुनाफा कम होता है। इसका प्रमुख कारण अभी भी खेती का परंपरागत तरीका अपनाया जाना है। किसान साथी खेती के परंपरागत तरीके से निकल कर आधुनिक तरीके अपनाएं, तभी खेती मुनाफे का सौदा साबित होगी। किसानों को नई नई जानकारी मिलते रहे और कम लागत में उनकी आय में बढ़ोतरी हो यही मेरा मकसद है। इसी को देखते हुए मैं डिजिटल वेबसाइट के जरिए किसानों को सटीक एवं सही जानकारी देने का प्रयास करता हुं। हमारा तरीका सरल और समझने योग्य होता है, ताकि हमारे किसान भाइयों को आसानी से अच्छी-अच्छी जानकारी मिलती रहे और उन्हें किसी भी प्रकार की कोई तकलीफ ना हो। मैं पिछले 4 साल से किसानों के लिए कंटेंट लिख रहा हूं और यही चाहता हुं की मैं आगे भी ज्यादा से ज्यादा किसानों को नई नई जानकारी से अवगत करवाता रहूं।
आपके साथ के लिए धन्यवाद …





