अंतर्राष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (IRRI) के वैज्ञानिकों ने सीधी बुवाई के लिए धान की दो बेहतरीन नई किस्में (Paddy Variety) तैयार की।
Paddy Variety | अब देश के किसानों के लिए धान की खेती करना न सिर्फ आसान होगा, बल्कि इसमें पानी और लागत की भी भारी बचत होगी। अंतर्राष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (IRRI) के वैज्ञानिकों ने सीधी बुवाई के लिए धान की दो बेहतरीन नई किस्में तैयार कर ली हैं, जिन्हें जल्द ही देश में रिलीज किया जाएगा।
इन नई किस्मों (Paddy Variety) का नाम DRR Dhan 92 और CR Dhan 217 है। इनकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि इन्हें उगाने के लिए पारंपरिक तरीके की तरह खेतों को पानी से लबालब भरने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली मीथेन गैस का उत्सर्जन भी काफी कम होगा और पैदावार पर भी कोई आंच नहीं आएगी।
अगर बात पैदावार और मुनाफे की करें, तो इन दोनों किस्मों ने नेशनल ट्रायल्स में कमाल का प्रदर्शन किया है। पहली किस्म, DRR Dhan 92, ने सीधी बुवाई के दौरान 5.8 टन प्रति हेक्टेयर की शानदार पैदावार दी है। यह किसानों की पसंदीदा वैरायटी (Paddy Variety) ‘MTU 1010’ के मुकाबले करीब 18% ज्यादा है।
इसे उत्तर-पूर्वी भारत के इलाकों के लिए मंजूर किया गया है। दूसरी तरफ, CR Dhan 217 भी किसी से कम नहीं है। इसने औसतन 5.9 टन प्रति हेक्टेयर का रिटर्न दिया है, जो अच्छे माहौल में बढ़कर 8.7 टन तक पहुंच गया। यह किस्म पूर्वी और मध्य भारत के उन इलाकों के लिए बेहतर है जहाँ खेती पूरी तरह मानसून के भरोसे होती है, क्योंकि यह महज 118 दिनों में पककर तैयार हो जाती है।
जीनोमिक तकनीक का कमाल | Paddy Variety
दरअसल, पारंपरिक तरीके से धान उगाने में सबसे बड़ी सिरदर्दी खेतों को पानी से भरे रखना और नर्सरी से पौधों को उखाड़कर दूसरी जगह ट्रांसप्लांटिंग की होती है। इसमें पानी भी बेतहाशा खर्च होता है और मजदूरों की भी भारी किल्लत झेलनी पड़ती है। इस परेशानी का हल निकालने के लिए वैज्ञानिकों ने जीनोमिक टूल्स का सहारा लिया।
उन्होंने लगभग 19 से ज्यादा ऐसे जीनों को आपस में मिलाया, जो फसल को मजबूती देते हैं, बीमारियों से बचाते हैं, और सूखे व बाढ़ जैसे मुश्किल हालातों को सहने की ताकत देते हैं। ये नई किस्में (Paddy Variety) कम ऑक्सीजन और कम पानी में भी तेजी से बढ़ती हैं, जिससे खेतों में अनचाही खरपतवार को पनपने का मौका नहीं मिलता।
बदलते मौसम के बीच देगी बंपर पैदावार
Paddy Variety | अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (IRRI) के अनुसार ह खोज सीधी बुवाई के रास्ते में आने वाली सबसे बड़ी रुकावट को दूर करती है। उन्होंने साफ किया कि किसान हमेशा से इस नई तकनीक का फायदा उठाना चाहते थे, लेकिन उनके पास ऐसी खास किस्में मौजूद नहीं थीं जो सीधी बुवाई के मिजाज को संभाल सकें।
अब इन नई किस्मों की बदौलत किसान कम संसाधनों में भी समझदारी और कामयाबी से खेती कर सकेंगे। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और IIRR के पूर्व डायरेक्टर और नार्म के डायरेक्टर डॉ. आर. एम. सुंदरम ने भी इस बात पर जोर दिया कि इन किस्मों (Paddy Variety) ने किसी एक जगह नहीं, बल्कि देश के अलग-अलग मौसम और माहौल में लगातार तीन सालों तक अपनी मजबूती साबित की है।
Paddy Variety | धान की खेती का नया दौर
इस पूरी कामयाबी के पीछे एक लंबा सफर और बड़ा तालमेल रहा है। भारत के डिपार्टमेंट ऑफ बायोटेक्नोलॉजी (DBT) ने जहां DRR Dhan 92′ की रिसर्च में मदद की, वहीं एशियन डेवलपमेंट बैंक और फिनलैंड सरकार के वित्तीय सहयोगसे ‘CR Dhan 217’ को विकसित किया गया।
आज के दौर में जब जमीन का पानी लगातार नीचे जा रहा है, मौसम का कोई भरोसा नहीं रहा और मजदूरों की किल्लत बढ़ गई है, ऐसे में यह तकनीक किसी वरदान से कम नहीं है। सरकार की तरफ से अंतिम मुहर लगते ही यह बीज देश के कोने-कोने में किसानों तक पहुँचने के लिए तैयार हो जाएंगे, जिससे आने वाले वक्त में धान की खेती मे कमं पानी कम लागत में बंपर पैदावार मिलेगी।
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नमस्कार किसान साथियों….
मेरा नाम जयदीप मालवीय है और मैं एक कॉलेज छात्र हुं। मुझे 10वीं से ही खेती किसानी पर कंटेंट लिखने में गहरी रुचि है। साथियों, हम देखते है कि कई किसान भाइयों को खेती में कम उत्पादन एवं लागत ज्यादा आती है, जिससे उन्हें मुनाफा कम होता है। इसका प्रमुख कारण अभी भी खेती का परंपरागत तरीका अपनाया जाना है। किसान साथी खेती के परंपरागत तरीके से निकल कर आधुनिक तरीके अपनाएं, तभी खेती मुनाफे का सौदा साबित होगी। किसानों को नई नई जानकारी मिलते रहे और कम लागत में उनकी आय में बढ़ोतरी हो यही मेरा मकसद है। इसी को देखते हुए मैं डिजिटल वेबसाइट के जरिए किसानों को सटीक एवं सही जानकारी देने का प्रयास करता हुं। हमारा तरीका सरल और समझने योग्य होता है, ताकि हमारे किसान भाइयों को आसानी से अच्छी-अच्छी जानकारी मिलती रहे और उन्हें किसी भी प्रकार की कोई तकलीफ ना हो। मैं पिछले 4 साल से किसानों के लिए कंटेंट लिख रहा हूं और यही चाहता हुं की मैं आगे भी ज्यादा से ज्यादा किसानों को नई नई जानकारी से अवगत करवाता रहूं।
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