कृषि वैज्ञानिकों ने गन्ने की फसल को स्केल कीड़ा, मोथा घास, काली चिंटी से बचाने के लिए जारी की सलाह, देखें डिटेल..

गन्ने की खेती करने वाले किसानों के लिए कृषि वैज्ञानिकों ने समसामयिक कृषि सलाह (Agriculture Advise) जारी की है, देखें पूरी जानकारी..

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Agriculture Advise | गन्ने की फसल में मोथा घास, स्केल कीड़ा और काली चिंटी नुकसान पहुंचा सकती है। बचाव के लिए किसानों को प्रबंध करने चाहिए। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बीआर काम्बोज ने बताया कि यदि मोथा घास दोबारा उग जाए तो दवाई की इसी मात्रा का फसल में छिड़काव करें।

2, 4-डी मोथा घास को ऊपर से ही नष्ट करती है। मोथा घास की रोकथाम के लिए सम्प्रा 75% हैलोसल्फ्युरान का 36 ग्राम प्रति एकड़ की दर से 200 लीटर पानी में घोलकर बिजाई (Agriculture Advise) के 35-45 दिन बाद पहली सिंचाई के 2-3 दिन बाद जब मोथा घास 3-5 दिन की हो तब फ्लैट फैन नोजल से छिड़काव करें।

बिजाई के 40 दिन बाद पहला पानी लगाएं

Agriculture Advise | कृषि वैज्ञानिक बताते हैं कि गन्ने की फसल में बिजाई के लगभग 40 दिन बाद पहला पानी लगाएं। बत्तर आने पर गुड़ाई करें। यदि बिजाई के समय एट्राजीन नहीं डाल पाए हों तो पहली सिंचाई के बाद गोड़ाई करके 1.6 किग्रा. एट्राजीन 50 घुपा प्रति एकड़ की दर से 200-250 लीटर पानी में घोलकर खड़ी फसल में छिड़काव करें। इससे गन्ना फसल पर कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ता।

कीड़ाग्रस्त पत्तियों और फुटाव को नष्ट कर दें

Agriculture Advise | कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक गन्ने की फसल में स्केल कीड़ा के फैलाव को रोकने के लिए बीज ऐसी फसलों व क्षेत्रों से न लें जहां इस कीड़े का प्रकोप हो । कीड़ाग्रस्त क्षेत्रों से दूसरे क्षेत्र में गन्ना बिजाई के लिए नहीं ले जाना चाहिए। काटने के बाद सभी पत्तियों व नए फुटाव को खेतों में नष्ट कर दें। कीटग्रस्त क्षेत्रों में एक से अधिक मोढ़ी फसलों में काली चींटी के नियंत्रण के लिए छिड़काव करें।

खरपतवार पर 8 सप्ताह में छिड़काव जरूर करें

Agriculture Advise | कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक गन्ने की फसल में खरपतवारों नियंत्रण के लिए 1.0 किग्रा. 2, 4-डी 80% सोडियम नमक 250 लीटर पानी में बिजाई के 7-8 सप्ताह बाद प्रति एकड़ छिड़काव करें। फसल में मोथा घास डीला की समस्या हो तो घास उगने पर 2, 4-डी ईस्टर का 400 मि.ली. प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करें। फरवरी व मार्च में बोई गन्ने की फसल में 45 किग्रा यूरिया डालें।

इधर, कपास की बिजाई से पहले बीज उपचार करें किसान

कृषि वैज्ञानिक बताते हैं कि गेहं व सरसों की कटाई के बाद किसान अप्रैल के अंत से मई के मध्य तक बुवाई कर सकते हैं। इसके लिए केवल प्रमाणित और उपचारित बीज ही इस्तेमाल करें। : Agriculture Advise

बिजाई से पहले फफूंदनाशक और कीटनाशक से बीज उपचार जरूर करें। खेत को अच्छी तरह जोतकर भुरभुरी मिट्टी बनाएं। कतारों में बुवाई करें, इससे देखभाल आसान होती है। पहली सिंचाई हल्की रखें और जलभराव से बचें। जैविक खाद के साथ अनुशंसित उर्वरक मात्रा अपनाएं। शुरुआती 30-40 दिनों में खेत को खरपतवार मुक्त रखें। शुरुआती अवस्था में रस चूसक कीटों पर विशेष नजर रखें और समय पर नियंत्रण करें।

गेहूं कटाई के बाद अवशेषों से बढ़ा सकते हैं उर्वरा शक्ति

Agriculture Advise | कृषि वैज्ञानिकों ने बताया कि इस समय गेहूं की कटाई पूरी हो चुकी है, ऐसे में किसानों के सामने खेतों के बेहतर उपयोग और अगली फसल की तैयारी की चुनौती रहती है।

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, इस अवधि में किसान खेत खाली न छोड़ें, बल्कि मौसम और मिट्टी की स्थिति के अनुसार उपयुक्त फसलों की बुवाई करें। सबसे पहले किसानों को पराली प्रबंधन पर ध्यान देना चाहिए। पराली को जलाने के बजाय उसे खेत में मिलाकर जैविक खाद के रूप में उपयोग करना बेहतर विकल्प है, जिससे मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है। : Agriculture Advise

इसके बाद किसान मूंग, उड़द जैसी दलहनी फसलों की बुवाई कर सकते हैं, जो कम समय में तैयार होकर अतिरिक्त आय देती हैं और मिट्टी में नाइट्रोजन की मात्रा भी बढ़ाती हैं।इसके अलावा कई क्षेत्रों में किसान मक्का, कपास और सब्जियों की खेती की ओर भी बढ़ सकते हैं।

जिन किसानों के पास सिंचाई की सुविधा है, वे सब्जी उत्पादन जैसे ककड़ी, खीरा, लौकी और टमाटर से अच्छा लाभ कमा सकते हैं। वहीं धान की तैयारी वाले क्षेत्रों में खेतों की जुताई और मिट्टी परीक्षण कर उर्वरक प्रबंधन करना जरूरी है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि इस समय सही फसल चयन और वैज्ञानिक खेती अपनाकर किसान अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं। : Agriculture Advise

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