रेतीली मिट्टी में अच्छी पैदावार के लिए करें कपास की इन वैरायटियों की बिजाई (Cotton Sowing), देखें पूरी जानकारी..
Cotton Sowing | कपास की सामान्य बिजाई अप्रैल में करनी चाहिए। राजस्थान, हरियाणा एवं गुजरात के कुछ जिले ऐसे हैं, जहां पर रेतीली मिट्टी वाली भूमि है। इन इलाकों में रेतीली मिट्टी व रेतीले टिब्बे बनने की संभावना रहती है। ऐसे में कृषि विशेषज्ञ बताते हैं कि इन क्षेत्रों में कपास की बिजाई अप्रैल माह के अंत तक हो जाना चाहिए। इस समय कपास की बिजाई के लिए कौन सी वेराइटी बहुत फायदेमंद रहेगी एवं अच्छी पैदावार देगी। इसके अलावा खेत की तैयारी एवं उर्वरक प्रबंधन कैसे किया जाए, आइए कृषि वैज्ञानिकों से जानते हैं..
कपास की बिजाई के लिए ऐसे करें खेत की तैयारी
Cotton Sowing | हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के प्रोफेसर बताते हैं कि कपास से बढ़िया फुटाव के लिए पूरे खेत की तैयारी सही ढंग से करनी जरूरी है। पहली जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से करनी चाहिए। इसके बाद आवश्यकतानुसार 3-4 जुताइयां करके खेत को अच्छी तरह तैयार कर लेना चाहिए। कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक के मुताबिक कपास की बिजाई के समय खेत में बत्तर का होना जरूरी है। इसके लिए खेत में अच्छा पलेवा करें। गीले बत्तर में 2 जुताइयां करके सुहागा लगाएं व खेत को एकसार कर लें। पौधों की सही संख्या के लिए बीज की सही मात्रा प्रयोग में लाएं।
अप्रैल में बिजाई के लिए यह वैरायटियां रहेगी अच्छी | Cotton Sowing
हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बीआर काम्बोज ने बताया कि बीकानेरी नरमा जैसी उन्नत किस्में एचएस-6, एच-1098, एच-1117, एच-1226, एच-1098, एच-1236, एच-1300 व संकर किस्म एचएचएच 223 व एचएचएच 287 को अप्रैल माह में बोने की सिफारिश की जाती है।
हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बीआर काम्बोज ने यह भी बताया कि किसान साथी देसी कपास की बिजाई के लिए एचडी -107, एचडी-123, एचडी-324, एच डी-432 व संकर किस्म एएएच-1 बोएं। इसके अतिरिक्त केवल अनुमोदित की गई बीटी संकर किस्में ही लगाएं। : Cotton Sowing
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बीजोपचार जरूरी, बीज दर यह रखें
Cotton Sowing | कृषि वैज्ञानिक बताते हैं कि 1 एकड़ के लिए अमेरिकन कपास में 6-8 किग्रा रोएं रहित तथा 8-10 किग्रा रोएंदार बीज पर्याप्त होते हैं। देसी कपास के लिए 5 किग्रा बीज प्रति एकड़ प्रयोग करें। ड्रिल से बुवाई करते समय यदि रोएं रहित बीज उपलब्ध न हों, तो 6 किग्रा रोएंदार बीज को बोने से पहले बारीक मिट्टी, गोबर या राख में रगड़ लें, ताकि बीज समान रूप से गिरें।
बीटी संकर कपास के लिए 850 ग्राम बीज प्रति एकड़ पर्याप्त है और इसकी बुवाई एक खूड़ वाली ड्रिल से कतारों में करें। कतार दूरी 67.5 सेमी तथा पौध दूरी 30-60 सेमी रखें। बुवाई अच्छी नमी में 4-5 सेमी गहराई पर करें। संकर कपास के लिए 1.2-1.5 किग्रा बीज प्रति एकड़ उपयुक्त रहता है।
कपास की फसल में ऐसे करें उर्वरक प्रबंधन
Cotton Sowing | कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक अमेरिकन कपास की उन्नत किस्म, यदि गेहूं काटने के बाद बोनी है तो बिजाई के समय खेत में 38 किलोग्राम यूरिया व 75 किलोग्राम सुपरफास्फेट प्रति एकड़ बो दें और रेतीली जमीन में 10 किलोग्राम जिंक सल्फेट बिजाई के समय अवश्य डालें। इतनी ही यूरिया खाद बाद में पौधों को छिद्दा करते समय डालें।
कृषि वैज्ञानिक बताते हैं कि किसान साथी पोटाश की कमी वाले खेतों में 20 किलोग्राम म्यूरेट ऑफ पोटाश बिजाई के समय अवश्य बिखेर दें। यदि कपास खाली पड़ी जमीन में बोनी है तो बिजाई के समय सुपरफास्फेट तथा पोटाश ही डालें। बाद में पौधे छिद्दा करते समय व फूल आते समय ऊपर बताई यूरिया की मात्रा दें। : Cotton Sowing
हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों के मुताबिक देसी कपास में 22 किलोग्राम प्रति एकड़ यूरिया खाद 45 दिन बाद डालें। 22 किलोग्राम प्रति एकड़ यूरिया खाद 75 दिन बाद डालें। हाईब्रिड कपास में बिजाई के समय 50 किलोग्राम यूरिया, 150 किलोग्राम सिंगल सुपर फास्फेट, 40 किलोग्राम म्यूरेट ऑफ पोटाश व 10 किलोग्राम जिंक सल्फेट ड्रिल करें। इसके बाद 50 किलोग्राम यूरिया बिजाई के 45 दिन बाद व 50 किलोग्राम यूरिया बिजाई के 75 दिन बाद डालें। : Cotton Sowing
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नमस्कार किसान साथियों….
मेरा नाम जयदीप मालवीय है और मैं एक कॉलेज छात्र हुं। मुझे 10वीं से ही खेती किसानी पर कंटेंट लिखने में गहरी रुचि है। साथियों, हम देखते है कि कई किसान भाइयों को खेती में कम उत्पादन एवं लागत ज्यादा आती है, जिससे उन्हें मुनाफा कम होता है। इसका प्रमुख कारण अभी भी खेती का परंपरागत तरीका अपनाया जाना है। किसान साथी खेती के परंपरागत तरीके से निकल कर आधुनिक तरीके अपनाएं, तभी खेती मुनाफे का सौदा साबित होगी। किसानों को नई नई जानकारी मिलते रहे और कम लागत में उनकी आय में बढ़ोतरी हो यही मेरा मकसद है। इसी को देखते हुए मैं डिजिटल वेबसाइट के जरिए किसानों को सटीक एवं सही जानकारी देने का प्रयास करता हुं। हमारा तरीका सरल और समझने योग्य होता है, ताकि हमारे किसान भाइयों को आसानी से अच्छी-अच्छी जानकारी मिलती रहे और उन्हें किसी भी प्रकार की कोई तकलीफ ना हो। मैं पिछले 4 साल से किसानों के लिए कंटेंट लिख रहा हूं और यही चाहता हुं की मैं आगे भी ज्यादा से ज्यादा किसानों को नई नई जानकारी से अवगत करवाता रहूं।
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