उन्नतशील बीज से मिलेगा फायदा, देखें धान, मक्का, उड़द एवं सोयाबीन के उन्नत वैरायटियों की जानकारी..

खरीफ सीजन की प्रमुख फसलों की किस्मों (Kharif Improved Varieties) की जानकारी एक साथ यहां देखें..

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Kharif Improved Varieties | मानसून की आमद के साथ खरीफ सीजन की शुरुआत हो चुकी है। देश के कई क्षेत्रों में खरीफ फसलों की बुवाई का कार्य चल रहा है। हालांकि कई राज्यों में मानसून पूरी तरह सक्रिय नहीं हो पाया। जिसके कारण बुवाई का कार्य प्रभावित हो रहा है। इधर दूसरी ओर कई किसानों को अब भी उन्नतशील बीज (Kharif Improved Varieties) की तलाश है।

कृषि वैज्ञानिक बताते हैं कि किसानों की कमाई का महत्वपूर्ण जरिया उन्नतशील बीज है। खेत में बोया गया उन्नत और शुद्ध बीज उत्पादन को 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ाने की ताकत रखता है। ऐसे में लिए जानते हैं खरीफ फसल प्रमुख रूप से धान मक्का उड़द अरहर और सोयाबीन (Kharif Improved Varieties) किस्मों की जानकारी..

बंपर पैदावार देने वाली मक्का की उन्नत किस्में 

कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक पूसा बायोफोर्टिफाइड हाइब्रिड-2 खरीफ की अगेती मक्का किस्म है, जो 89 से 91 दिनों में पकती है और पत्ती झुलसा रोग प्रतिरोधी होने के साथ प्रो- विटामिन A व लाइसिन से भरपूर मानी जाती है। पूसा जवाहर हाइब्रिड मक्का-3 मध्यम-देर से पकने वाली किस्म है, जो 115 से 125 दिनों में तैयार होकर 75 से 82 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन देने की क्षमता रखती है।

कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक कम पानी वाले इलाकों के लिए प्रकाश (हाइब्रिड ) उपयुक्त मानी जाती है, जो 80 से 82 दिनों में पककर विपरीत मौसम में भी 40 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक स्थिर उत्पादन देती है। वहीं जवाहर मक्का (जे.एम.-216) सूखारोधी किस्म है, जो 95 से 100 दिनों में तैयार होती है। (Kharif Improved Varieties)

कम पनी में अधिक उत्पादन देने वाली धान की किस्में

मानसून की कम बारिश का अंदेशा बना हुआ है। धान की खेती करने वाले किसानों के लिए कम पानी और सूखे वाले क्षेत्रों में पूसा-1882 बासमती किस्म बेहतर विकल्प मानी जा रही है, जो 134 दिनों में पककर स्थिर पैदावार देती है। (Kharif Improved Varieties)

अधिक उत्पादन चाहने वाले किसान पूसा-1824 लगा सकते हैं, जो 127 दिन की मध्यम अवधि में 88 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक रिकॉर्ड बासमती उत्पादन देने की क्षमता रखती है। (Kharif Improved Varieties)

जल्दी बुवाई के लिए पूसा-1509 सबसे उपयुक्त है, जो केवल 118 दिनों में पकने वाली स्वादिष्ट बासमती किस्म है। वहीं झुलसा और ब्लास्ट रोग प्रभावित इलाकों में पूसा बासमती-1847 किसानों के लिए राहत बन सकती है, जो 125 से 128 दिनों में तैयार होकर रोग प्रतिरोधकता के साथ 57 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक पैदावार देती है।

धान की यह वैरायटियों भी देगी अच्छी पैदावार

बासमती – 1886 – 140 दिन – 55 क्विंटल प्रति हेक्टेयर। फफूंद रोग झुलसा, एवं ब्लास्ट के प्रति दुगुनी रोग प्रतिरोधकता ।

जेआर 10 – 120 दिन – 52 क्विंटल प्रति हेक्टेयर। मुख्य रोग जैसे झुलसा एवं ब्लास्ट के प्रति पूरी तरह प्रतिरोधी।

जेआर-206 -122 दिन – 58 क्विंटल प्रति हेक्टेयर। मोटा दाना, पोहे हेतु अत्यधिक उपयुक्त एवं रोग प्रतिरोधी ।

जेआर-21 – 128 दिन – 55 – क्विंटल प्रति हेक्टेयर। मोटा दाना, पोहे बनाने हेतु अधिक उपयुक्त एवं रोग प्रतिरोधी।

उड़द और अरहर की उन्नत किस्में

उड़द में टीजेयू – 130 अगेती किस्म है, जो 62 दिनों में पककर पीला मोजेक वायरस प्रतिरोधी होने के साथ 11 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन देती है। टीजेयू -339 65 दिनों में तैयार होती है और पीला मोजेक रोगरोधी गुणों के साथ 12 क्विंटल तक उपज देती है। वहीं आईपीयू-19-10 किस्म पाउडरी मिल्ड्यू प्रतिरोधी मानी जाती है, जो 74 दिनों में पककर औसतन 11 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादन देती है। (Kharif Improved Varieties)

अरहर में पूसा जवाहर अरहर 21-29 सूखारोधी किस्म है, जो 170 दिनों में तैयार होकर 20 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक पैदावार देती है। आईपीए 15-06 सूखा प्रभावित इलाकों के लिए उपयुक्त मानी जाती है और 177 दिनों में 16 क्विंटल तक स्थिर उत्पादन देती है। वहीं पूसा जवाहर अरहर 22-02 केवल 150 दिनों में तैयार होकर पीला मोजेक रोग से सुरक्षा के साथ 18 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उपज देती है। (Kharif Improved Varieties)

सोयाबीन की उन्नत किस्में

कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार सोयाबीन में जेएस- 2303, जेएस- 9560 और जेएस- 2309 किस्म केवल 90 से 93 दिनों में पककर औसत रूप से 25 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उपज देती है और सोयाबीन की यह वैरायटी या नवीन वैरायटी है, जो की रोग सहनशील मानी जाती है, इनमें से 91 दिन में तैयार होने वाली एनआरसी -150 जीवाणु और पत्ती दाग रोग प्रतिरोधी होने के कारण देरी से बुवाई के लिए सबसे भरोसेमंद विकल्प है। किसान एनआरसी – 157 भी चुन सकते हैं, जो 92 दिन में पकती है और पत्ती दाग व जीवाणु रोगों के खिलाफ मजबूत सुरक्षा देती है।

कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक RVSM2011-35 किस्म 98 दिन में तैयार होकर 30 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उपज देती है। यह वैरायटी ज्यादा उपज देने वाली है और रोगों के प्रति अत्यधिक सहनशील है। जेएस- 2172 95 दिनों में पकती है और इसकी उत्पादन क्षमता 28 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है।इसके अलावा राजसोया-24 किस्म 96 दिन में पककर 20 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक वायरस और बहुरोगों से सुरक्षा के साथ स्थिर उत्पादन देती है। (Kharif Improved Varieties)

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2 thoughts on “उन्नतशील बीज से मिलेगा फायदा, देखें धान, मक्का, उड़द एवं सोयाबीन के उन्नत वैरायटियों की जानकारी..”

  1. आप का बहुत खूबसूरत प्रयास है आप के प्रयास की बहुत ज्यादा किसान को जरुरत है आप को मेरी ओर से बहुत बहुत शुभकामनायें

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