मूंग की फसल में कट वर्म, पोड बोरर इल्ली का कहर, कृषि वैज्ञानिकों ने नियंत्रण के लिए किसानों को दी यह सलाह..

मूंग की फसल में रोग नियंत्रण के लिए कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को यह (Mung Crop Advice) समसामयिक सलाह दी है…

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Mung Crop Advice | मध्य प्रदेश में पिछले कुछ सालों से मूंग की फसल को तीसरी फसल के रूप में प्रमुखता से लगाया जा रहा है। मार्च अप्रैल माह में किसान साथी मूंग की बुवाई करते हैं। एमपी के कुछ स्थानों पर जल्दी बुवाई करने वाली मूंग की फसल पककर तैयार हो चुकी है। मंडी में भी नए मूंग की आवक होने लगी है। इसी बीच वर्तमान मौसम के दौरान मूंग की फसल पर कीट रोग अधिक फैलने लगा है।

कृषि वैज्ञानिक बताते हैं कि मौसम में लगातार हो रहे में बदलाव के कारण फसल पर कीट और रोगों का खतरा बढ़ गया है। हाल ही में साइक्लोनिक सर्कुलेशन सक्रिय होने से दिन में तेज गर्मी और शाम को बादल छाने जैसी स्थिति बन रही है। बदलते मौसम का सीधा असर मूंग की फसल (Mung Crop Advice) पर देखने को मिल रहा है। जिससे मूंग की पैदावार प्रभावित होने की संभावना बढ़ गई है। ऐसे में किसान साथियों को कौन-कौन से उपाय करना होंगे आइए जानते हैं..

फलियों को चट करने वाली इल्लियों का प्रकोप

Mung Crop Advice | इस समय खेतों में कट वर्म और पोड बोरर इल्लियों का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। कट वर्म इल्लियां मूंग की पत्तियों

को खाकर फसल को नुकसान पहुंचा रही हैं, जबकि पोड बोरर फलियों और बीजों को चट कर उत्पादन को प्रभावित कर रही है। इसके अलावा फफूंदजनित रोग भी फैल रहा है, जिससे पौधे पीले पड़ने लगे हैं और सूखने की स्थिति में पहुंच रहे हैं। इन समस्याओं ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है।

कीट और रोग नियंत्रण के सुझाव | Mung Crop Advice

मध्य प्रदेश के लगभग सभी कृषि विज्ञान केंद्रों के विशेषज्ञों मूंग के खेतों का भ्रमण करके स्थिति का जायजा ले रहे हैं। इसके साथी कृषि वैज्ञानिक किसानों को कीट और रोग नियंत्रण के लिए सुझाव दे रहे हैं। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को इल्लियों के नियंत्रण के लिए इमामेक्टिन बेंजोएट 5 प्रतिशत एसजी 100 ग्राम प्रति एकड़ या स्पिनोसैड 45 प्रतिशत एससी के उपयोग की सलाह दी गई है। : Mung Crop Advice

वहीं फली छेदक इल्लियों के लिए क्लोरेंट्रानिलिप्रोल या इंडोक्साकार्ब का छिड़काव प्रभावी बताया है। इसके अलावा बोपलानीलाइड का भी उपयोग करने की सिफारिश की है। फफूंद रोग की रोकथाम के लिए थायोफेनेट मिथाइल 70 प्रतिशत डब्ल्यूपी का प्रयोग करना चाहिए। साथ ही फसल की पोषण आवश्यकता को पूरा करने के लिए 19:19 माइक्रोन्यूट्रिएंट का छिड़काव करने की सलाह दी गई है।

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कीट-रोग नियंत्रण के लिए जारी पूरी एडवाइजरी देखें

Mung Crop Advice | मूंग की फसल में कई प्रकार के कीट और रोगों का प्रकोप देखने को मिलता है, जो समय पर नियंत्रण न होने पर उत्पादन को काफी नुकसान पहुंचा सकते हैं. इसे ध्यान में रखते हुए दलहन विकास निदेशालय ने किसानों के लिए विस्तृत एडवाइजरी जारी की है, जिसमें प्रमुख कीट-रोगों की पहचान और उनके नियंत्रण के उपाय बताए गए हैं। यह है यह उपाय :–

2–3 वर्ष के अंतराल में गर्मी के मौसम में गहरी जुताई करें. – समय पर बुवाई और कम अवधि वाली किस्मों का चयन करें। : Mung Crop Advice

5% फेरोमोन ट्रैप का उपयोग करें – वयस्क पतंगों को आकर्षित करने के लिए प्रकाश ट्रैप लगाएं – एन.पी.वी 250 मि.ली/हेक्टेयर – 0.017% टी फॉस + 0.5% गुड़ मिलाकर दो बार छिड़काव – फेनोफॉस 50% EC @ 1250 मि.ली/हेक्टेयर छिड़काव – सफेद मक्खी फसल का रस चूसकर पौधों को कमजोर कर देती है और वायरस रोग फैलाने का भी काम करती है।

खेत और मेड़ों को खरपतवार मुक्त रखें थायमेथॉक्झाम 25 WG @ 100 ग्राम/हेक्टेयर छिड़काव करें। : Mung Crop Advice

पीला मोजेक वायरस रोग से बचाव के लिए रोगरोधी किस्मों का चयन करें संक्रमित पौधों को तुरंत उखाड़कर नष्ट करें।

पाउडरी मिल्ड्यू रोग में पत्तियों और अन्य भागों पर सफेद पाउडर जैसा दिखाई देता है। अधिक संक्रमण होने पर पत्तियां पीली होकर गिर जाती हैं और फसल समय से पहले पक जाती है, जिससे उपज घटती है। इस रोग से फसल को बचाने के लिए कार्बेन्डाजिम @ 1 ग्राम/लीटर पानी या केराथोन @ 1 मि.ली/लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। : Mung Crop Advice

कृषि अधिकारियों ने किसानों को यह भी सलाह दी है कि कीटनाशकों के छिड़काव सुबह एवं शाम के समय करें।

(नोट :– यह कृषि सलाह कृषि वैज्ञानिकों एवं कृषि अधिकारियों के द्वारा जारी की गई सूचना पर आधारित (Mung Crop Advice) है। किसान साथी एक बार उपयोग करने के पहले स्वयं भी इसकी जांच कर लें। चौपाल समाचार किसी भी अप्रिय स्थिति के लिए जिम्मेदार नहीं रहेगा।)

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