दलहनी फसलों पर फफूंद का साया, विशेषज्ञों ने दिए फसल सुरक्षा के लिए खास टिप्स, देखें पूरी जानकारी..

खरीफ सीजन में दलहनी फसलों को फफूंद एवं अन्य बीमारियों से कैसे बचाएं, आइए कृषि विशेषज्ञों से (Pulse Crop Experts Advice) जानते हैं..

Pulse Crop Experts Advice | मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों में खरीफ के मौसम में अरहर, उर्द और मूंग बड़े पैमाने पर बोई जाती हैं। खरीफ सीजन में बोई जाने वाली इन दलहनी फसलों पर मानसून की बेरुखी के कारण फफूंद एवं अन्य बीमारियां की संभावना होने लगी है। कृषि विशेषज्ञ बताते हैं कि इस मौसम में नमी और गर्मी की वजह से फसलों पर कई तरह के फफूंद और वायरस का हमला बढ़ जाता है, इन फसलों पर उकठा, तना विगलन और पीला मोज़ेक जैसी खतरनाक बीमारियों का हमला हो जाता है।

इन बीमारियों की वजह से न सिर्फ पौधों की तरक्की रुक जाती है, बल्कि पैदावार को भी भारी नुकसान पहुँचता है। अगर वक्त रहते इन रोगों की सही पहचान और मुकम्मल इलाज न किया जाए, तो किसानों की पूरी मेहनत पर पानी फिर जाता है। इसलिए,फसल को बीमारियों से सुऱक्षित रखने के लिए शुरुआती दौर में ही सही कदम उठाना उचित रहता है, ताकि बेहतर पैदावार हासिल की जा सके। बीमारी होने की दशा में शुरुआती कौन-कौन से उपाय करना होंगे आइए (Pulse Crop Experts Advice) जानते हैं..

अरहर की फसल उकठा रोग की संभावना

अरहर की फसल को सबसे ज्यादा नुकसान ‘उकठा रोग’ यानि विल्ट और ‘तना विगलन’ यानि स्टेम रॉट से पहुंचता है। उकठा रोग में जमीन के अंदर की फफूंद पौधों की नसों को बंद कर देती है, जिससे पानी का बहाव रुक जाता है और पत्तियाँ पीली पड़कर सूखने लगती हैं। (Pulse Crop Experts Advice)

उकठा रोग से बचाव के उपाय 

पौध सुरक्षा विशेषज्ञ एवं केवीके हेड, नरकटियागंज, पश्चिम चम्पारण के डॉ आर. पी. सिंह मुताबिक, इसकी रोकथाम के लिए बुवाई से पहले बीजों को ट्राईकोडर्मा पाउडर 5-10 ग्राम प्रति किलो से बीज उपचार करना चाहिए। तना विगलन से बचाव के लिए अरहर की बुवाई हमेशा मेड़ों उठी हुई क्यारियों पर करें ताकि जल-जमाव न हो, वहीं खेतों में अरहर के साथ ज्वार या बाजरे की सह-फसली खेती करने से उकठा रोग का असर काफी कम हो जाता है। (Pulse Crop Experts Advice)

उर्द और मूंग में ‘येलो मोज़ेक का प्रकोप

कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक उर्द और मूंग की फसलों में ‘येलो मोज़ेक का प्रकोप सबसे खतरनाक माना जाता है, जिसे सफेद मक्खियाँ फैलाती हैं और इससे पत्तियाँ सुनहरी पीली पड़ जाती हैं। डॉ. आर. पी. सिंह के अनुसार इनसे निजात पाने के लिए किसानों को इमिडाक्लोप्रिड या नीम आधारित दवाओं का छिड़काव करना चाहिए। जिससे इसके रोग बाहक कीट सफेद मक्खियाँ खत्म हो जाए। इसके अलावा लीफ स्पॉट और एन्थ्रेक्नोज के कारणपत्तियों पर गहरे भूरे धब्बे उभर आते हैं। इस रोग के नियंत्रण के लिए क्लोरोथैलोनील 2 ग्राम प्रति लीटर पानी का 10 दिनों के अंतराल पर 2-3 बार छिड़काव करना सबसे बेहतर इलाज साबित होता है। (Pulse Crop Experts Advice)

कृषि विशेषज्ञों ने किसानों के लिए यह सलाह जारी की

कृषि विशेषज्ञ ने बताया कि इन तमाम खतरनाक बीमारियों से सही तौर पर निपटने के लिए किसानों को समेकित रोग प्रबंधन का तरीका अपनना चाहिए। सबसे पहले खेतों की गर्मी में गहरी जुताई करें ताकि छुपे हुए कीटाणु और फफूंद तेज धूप से खुद-ब-खुद मर जाएं। (Pulse Crop Experts Advice)

पौध सुरक्षा विशेषज्ञ डॉ. आर. पी. सिंह यह खास सलाह देते हैं कि किसानों को हमेशा नरेंद्र अरहर-1, मालवीय चमत्कार, पंत उर्द-31 या नरेंद्र मूंग-1 जैसी रोग-प्रतिरोधी और सेहतमंद किस्मों के बीजों का ही चुनाव करना चाहिए। इसके साथ ही, खेत को खरपतवारों से बिल्कुल पाक-साफ रखें ताकि इन बीमारियों को फैलने का कोई जरिया न मिल सके।

कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक फसलों की अच्छी सेहत के लिए खेत में जल निकासी का माकूल इंतजाम होना बेहद जरूरी है। खड़ी फसल में जब भी किसी बीमारी के लक्षण दिखाई दें, तो प्रभावित पौधों को जड़ समेत उखाड़कर फौरन खेत से दूर ले जाकर नष्ट कर देना चाहिए, ताकि संक्रमण बाकी स्वस्थ पौधों में न फैले। (Pulse Crop Experts Advice)

डॉ. आर. पी. सिंह का मानना है कि जैविक और रासायनिक उपायों के इस सही तालमेल को अपनाकर किसान अपनी दलहनी फसलों को हर तरह की आफत से सुरक्षित रख सकते हैं। इन समझदारी भरे कदमों से न सिर्फ फसलों का बचाव होगा, बल्कि किसानों को बेहद शानदार और भरपूर पैदावार भी हासिल होगी। (Pulse Crop Experts Advice)

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