कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को चेताया..धान की नर्सरी में भूलकर भी यह गलती न करें, देखें डिटेल..

किसान साथी धान की नर्सरी लगा चुके हैं, अच्छी पैदावार के लिए धान की नर्सरी मैं कौन-कौन सी जरूरी कार्य (Rice Nursery Care) करना होंगे जानें..

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Rice Nursery Care | खरीफ सीजन में सबसे अधिक धान की खेती की जाती है। देश में मानसून के आगमन के साथ धान की खेती के लिए अंतिम तैयारी को मूर्त रूप दिया जाता है धान की खेती करने वाले किसान इस समय धान की नर्सरी लगा चुके हैं। इस समय धान की खेती करने वाले किसानों के खेतों में हलचल बढ़ गई है। धान की खेती के संबंध में कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों के लिए जरूरी सलाह जारी की है। कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक धान की नर्सरी में कुछ जरूरी उपाय (Rice Nursery Care) करने से धान की पैदावार बढ़ जाएगी, आईए जानते हैं पूरी डिटेल..

धान की नर्सरी पर निर्भर है अच्छी पैदावार

कृषि विशेषज्ञ बताते हैं कि किसान धान की खेती के लिए इस समय बिचड़ा डाल चुके हैं या तो डालने की तैयारी में हैं। किसानों की उम्मीद अब अच्छी पैदावार के लिए नर्सरी में तैयार हो रही पौध (Rice Nursery Care) पर टिकी हुई है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि धान की फसल की मजबूत शुरुआत स्वस्थ नर्सरी से होती है। यदि नर्सरी में समय पर सिंचाई, बीजोपचार और खरपतवार नियंत्रण पर ध्यान दिया जाए तो रोपाई के बाद पौधे तेजी से बढ़ते हैं और फसल का उत्पादन भी बेहतर मिलता है।

नर्सरी लगाने के शुरुआती दिनों में ध्यान देना जरूरी

कृषि विभाग की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार किसानों को सलाह दी जा रही है कि वे नर्सरी तैयार करने के शुरुआती दिनों से ही विशेष सावधानी (Rice Nursery Care) बरतें ताकि खेत में रोपाई के समय उन्हें मजबूत और स्वस्थ पौधे मिल सकें।

बीजोपचार जरूर करें

कृषि विभाग का कहना है कि जिन किसानों ने अभी बिचड़ा नहीं बोया है वो बीज बोने से पहले बीजोपचार अवश्य करें। कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक बीजोपचार से बीज जनित रोगों का खतरा कम हो जाता है और अंकुरण क्षमता बेहतर होती है। उपचारित बीजों से उगे पौधे अधिक मजबूत होते हैं, जिससे बाद धान की फसलों में रोगों का प्रकोप कम देखने को मिलता है। (Rice Nursery Care)

समय-समय पर सिंचाई करना जरूरी

कृषि वैज्ञानिक बताते हैं कि धान की नर्सरी में समय पर सिंचाई भी बेहद जरूरी है। पौधों को पर्याप्त नमी मिलती रहे इसके लिए खेत में पानी का उचित प्रबंधन करना चाहिए। अधिक पानी या पानी की कमी दोनों ही स्थितियां पौधों के विकास पर नकारात्मक असर डाल सकती हैं।

इसलिए मौसम के अनुसार सिंचाई की मात्रा तय करने से पौधों की बढ़वार बेहतर होती है। ऐसे में बीज बोने के बाद शुरुआती 3-5 दिन क्यारियों को सिर्फ नम रखें। इसके बाद, जब पौधे 1-2 इंच के हो जाएं तो क्यारियों में लगभग 1 से 1.5 सेमी पानी भर कर रखें. मिट्टी को सूखने या दरारें पड़ने न दें। (Rice Nursery Care)

खरपतवार नियंत्रण पर भी जरूर ध्यान दें

कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को नियमित रूप से नर्सरी का निरीक्षण करने और समय रहते खरपतवार हटाने की सलाह दी है। कृषि विशेषज्ञ बताते हैं कि खरपतवार नियंत्रण को भी नर्सरी प्रबंधन का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। खरपतवार पौधों के साथ पोषक तत्वों, पानी और धूप को पौधों तक नहीं पहुंचने देते हैं। जिससे धान की पौध कमजोर हो सकती है। जरूरत पड़ने पर खरपतवारनाशी का भी उपयोग किया जा सकता है। (Rice Nursery Care)

इसके साथ-साथ धान की नर्सरी में रोग और कीटों की निगरानी भी लगातार करनी चाहिए। किसी भी प्रकार के संक्रमण या कीट के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत कृषि विभाग या कृषि वैज्ञानिकों की सलाह लेकर नियंत्रण उपाय अपनाने चाहिए। इससे नुकसान को शुरुआती चरण में ही रोका जा सकता है। (Rice Nursery Care)

(नोट :– यह जानकारी कृषि वैज्ञानिकों द्वारा जारी की गई सलाह के आधार पर दी जा रही है। किसान साथी एक बार अपने क्षेत्र कृषि अधिकारियों एवं विशेषज्ञों से सलाह लेकर कार्य करें। किसी भी अप्रिय स्थिति के लिए चौपाल समाचार की कोई जिम्मेदारी नहीं रहेगी।)

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