कम पानी में जल्दी पकने वाली और अच्छी उपज देने वाली वाली धान की प्रमुख किस्मों Major Rice Varieties की जानकारी यहां देखें..
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Major Rice Varieties | देश में करीब सीजन की शुरुआत हो चुकी है। मानसून की बारिश के साथ ही किसान करीब फसलों की बुवाई के कार्य में जुट जाता है। इस वर्ष मानसून की लेट लाती थी से खरीफ फसलों की बुवाई का कार्य धीरे हो रहा है। देश में अधिकांश धान की खेती की जाती है। धान भारत की सबसे जरूरी फसलों में से एक है।
धान की खेती करने वाले किसान चाहता है कि उसकी फसल जल्दी तैयार हो, कम खर्च आए और ज्यादा पैदावार मिले। ऐसे में अब किसान पुराने बीज छोड़कर नई और उन्नत किस्मों की तरफ बढ़ रहे हैं। ऐसे में लिए जानते हैं धान की कुछ प्रमुख किस्मों (Major Rice Varieties) की जानकारी जो कम पानी और कम अवधि में भी अच्छी पैदावार देगी..
धान की नई वैरायटियां रहेगी फायदेमंद
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि अगर किसान सही किस्म का चुनाव करें, तो कम मेहनत में भी अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं। धान की नवीन किस्में (Major Rice Varieties) कम समय में ज्यादा उत्पादन देती हैं और कई बीमारियों से भी फसल को बचाती हैं।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि अच्छी खेती के लिए सही बीज का चुनाव बहुत जरूरी है। अगर किसान उन्नत किस्मों का इस्तेमाल करें, तो कम खर्च में ज्यादा उत्पादन पा सकते हैं। आज के समय में मौसम तेजी से बदल रहा है। ऐसे में ऐसी किस्में (Major Rice Varieties) चुनना जरूरी है जो कम समय में तैयार हों और बीमारियों से सुरक्षित रहें।
धान वैरायटी CSR-10
कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक CSR-10 धान की एक खास किस्म है। यह उन जगहों के लिए बहुत अच्छी मानी जाती है जहां जमीन में नमक ज्यादा हो या खेत में पानी भर जाता हो। कई बार किसान ऐसी जमीन में अच्छी खेती नहीं कर पाते, लेकिन यह किस्म वहां भी अच्छा उत्पादन देती है। यह धान करीब 120 से 125 दिनों में तैयार हो जाती है।
इसकी पैदावार लगभग 50 से 55 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक होती है। इसके दाने छोटे, चमकदार और सफेद होते हैं, इसलिए बाजार में इसकी अच्छी कीमत मिलती है। पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे कई राज्यों में किसान इसकी खेती कर रहे हैं। कम खराब होने वाली यह किस्म किसानों को अच्छा फायदा देती है। (Major Rice Varieties)
धान वैरायटी NDR-359
कृषि विशेषज्ञ बताते हैं कि धान की NDR-359 किस्म बहुत लोकप्रिय है। यह जल्दी पकने वाली फसल मानी जाती है। किसान इसे इसलिए पसंद करते हैं क्योंकि यह सिर्फ 115 से 120 दिनों में तैयार हो जाती है। इसकी पैदावार भी काफी अच्छी होती है। एक हेक्टेयर में करीब 50 से 55 क्विंटल धान मिल सकता है।
इसके पौधे ज्यादा लंबे नहीं होते, इसलिए तेज हवा और बारिश में गिरने का डर कम रहता है। यह वैरायटी कई खतरनाक बीमारियों से लड़ने की ताकत रखती है। उत्तर प्रदेश, बिहार और ओडिशा के किसान इसकी खेती बड़े पैमाने पर कर रहे हैं। कम समय में अच्छी कमाई करने के लिए यह किस्म बहुत फायदेमंद मानी जाती है। (Major Rice Varieties)
अनामिका धान
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार धान की अनामिका वैरायटी काफी प्रचलित है। अनामिका धान की ऐसी किस्म है जिसे पूर्वी भारत में बहुत पसंद किया जाता है। बिहार, पश्चिम बंगाल, असम और ओडिशा के किसान इसकी खेती ज्यादा करते हैं।
यह धान करीब 130 से 135 दिनों में तैयार होती है। इसकी पैदावार लगभग 50 से 55 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक होती है। इसके दाने लंबे और मोटे होते हैं। पकने के बाद इसका चावल स्वादिष्ट और हल्का चिपचिपा बनता है। अच्छे स्वाद की वजह से बाजार में इसकी मांग हमेशा बनी रहती है।(Major Rice Varieties)
धान वैरायटी WGL-32100
धान की यह WGL-32100 वैरायटी करीब 125 से 130 दिनों में तैयार हो जाती है। इसकी पैदावार 55 से 60 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक हो सकती है। इसके पौधे ज्यादा ऊंचे नहीं होते। इसलिए तेज हवा और बारिश में फसल गिरती नहीं है। इसके दाने छोटे और पतले होते हैं। जिन्हें बाजार में काफी पसंद किया जाता है। अच्छी गुणवत्ता और मजबूत पौधों की वजह से यह किस्म किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है। (Major Rice Varieties)
धान वैरायटी IR-36
कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक कम बारिश वाले इलाकों के लिए IR-36 धान की एक पुरानी लेकिन भरोसेमंद किस्म है। धान की यह किस्म करीब 115 से 120 दिनों में तैयार हो जाती है। इसकी पैदावार 40 से 45 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक होती है। यह सूखा सहन करने वाली किस्म है, इसलिए कम पानी में भी अच्छी फसल दे देती है। इसके अलावा यह कई कीटों और बीमारियों से भी लड़ने की ताकत रखती है। यही वजह है कि किसान आज भी इस किस्म पर भरोसा करते हैं।(Major Rice Varieties)
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नमस्कार किसान साथियों….
मेरा नाम जयदीप मालवीय है और मैं एक कॉलेज छात्र हुं। मुझे 10वीं से ही खेती किसानी पर कंटेंट लिखने में गहरी रुचि है। साथियों, हम देखते है कि कई किसान भाइयों को खेती में कम उत्पादन एवं लागत ज्यादा आती है, जिससे उन्हें मुनाफा कम होता है। इसका प्रमुख कारण अभी भी खेती का परंपरागत तरीका अपनाया जाना है। किसान साथी खेती के परंपरागत तरीके से निकल कर आधुनिक तरीके अपनाएं, तभी खेती मुनाफे का सौदा साबित होगी। किसानों को नई नई जानकारी मिलते रहे और कम लागत में उनकी आय में बढ़ोतरी हो यही मेरा मकसद है। इसी को देखते हुए मैं डिजिटल वेबसाइट के जरिए किसानों को सटीक एवं सही जानकारी देने का प्रयास करता हुं। हमारा तरीका सरल और समझने योग्य होता है, ताकि हमारे किसान भाइयों को आसानी से अच्छी-अच्छी जानकारी मिलती रहे और उन्हें किसी भी प्रकार की कोई तकलीफ ना हो। मैं पिछले 4 साल से किसानों के लिए कंटेंट लिख रहा हूं और यही चाहता हुं की मैं आगे भी ज्यादा से ज्यादा किसानों को नई नई जानकारी से अवगत करवाता रहूं।
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