उज्जैन के छोटे से गांव के रहने वाले किसान ने किया कमाल, एमपी राजस्थान के कई किसानों को सिखा रहे खेती की बारीकी

उज्जैन जिले के निवासी किसान ने बैंक में सेल्स की नौकरी से लेकर बीज बैंक तक सफर किया तय, जानिए इनकी सफलता (Success Farmer) की कहानी।

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Success Farmer | “कौन कहता है आसमान में सुराग नहीं होता, एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारो।” हिंदी साहित्य के प्रख्यात कवि दुष्यंत कुमार की इन पंक्तियों को उज्जैन जिले के एक छोटे से गांव के रहने वाले युवा कृषक ने साबित कर दिया। युवा कृषक ने अपनी मेहनत, लगन और हौसलें की बदौलत न सिर्फ खुद अच्छा मुकाम हासिल किया, बल्कि हजारों किसानों को खेती की नई-नई तकनीक और बारीकियां सीखाकर और उन्नत बीज देकर खेती को लाभ का धंधा बनाने का काम किया। इससे कई किसानों को फायदा मिल रहा है।

खेती की बागडोर मिलते ही किया नवाचार

उज्जैन जिले की तराना तहसील के गांव सामानेरा के ऊर्जावान कृषक उद्यमी धीरज सुरेश चंद्र पंड्या ने जब खेती की बागडोर अपने हाथों में ली तो उन्होंने इस जिम्मेदारी को पारंपरिक तरीके से बदलकर नवाचार की ओर ले जाने का सोचा और सकारात्मक सोच के साथ इसकी शुरुआत की। उनका यह सफर काफी लंबा होना था।

खेती के मूल बिंदु पर किया काम

हमारे देश में खेती परंपरागत तरीके से की जाती है इस दौरान किसान साथी बीज पर अधिक ध्यान नहीं देते। युवा कृषक धीरज पंड्या ने सर्वप्रथम इसी बिंदु पर काम किया। उन्होंने

खेती में आधुनिकरण के साथ सबसे बहुमूल्य बिंदु उन्नत बीज पर अपना पूरा ध्यान केंद्रित किया। युवा कृषक धीरज पंड्या ने इस बात को समझा की मेहनत तो बराबर हो रही है, लेकिन बीज में नवाचार ना होने के कारण अपेक्षित उत्पादन नहीं आ पा रहा है।

उन्नत बीज की उपलब्धता को लेकर शुरू हुई यात्रा

धीरज पंड्या की यही से उन्नत कृषि के क्षेत्र में एक लंबी यात्रा की शुरुआत हुई। इसके लिए उन्होंने ठाना की उन्नत बीज स्वयं अपनाना और किसानों को भी देना है। इसके लिए इस युवा कृषक मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु सोयाबीन एवं गेहूं के नए बीज के लिए अनुसंधान केन्द्रों पर जाना शुरू किया।

गेहूं एवं सोयाबीन अनुसंधान केंद्र और कृषि विज्ञान केंद्रों पर जाकर धीरज पांडे ने कृषि विशेषज्ञों और कृषि वैज्ञानिकों से परामर्श लेना शुरू किया। इसके साथ ही उन्होंने अनुसंधान संस्थाओं द्वारा बनाई गई नई किस्म थोड़ी थोड़ी मात्रा में अपने खेत पर लगाकर उनमें अपना शोध शुरू किया, जिसमें उन्हें यह पता चला कि उस किस्म में क्या विशेषताएं हैं क्या कमियां है और उनकी जलवायु में वह कैसे अधिक उत्पादन दे सकती है।

एमपी और अन्य राज्यों के किसान भी उठा रहे फायदा

युवा कृषक धीरज पंड्या के द्वारा एक युवा सोच से शुरू हुआ कारवां आज इस जज्बे के साथ काम करते हुए इतना बड़ा हो चुका है कि उज्जैन जिले के एक छोटे से गांव के किसान के गेहूं सोयाबीन और लहसुन के बीज की मांग इतनी है की पूरे मध्य प्रदेश ओर राजस्थान के किसानों द्वारा उनका बीज लिया जा रहा है और साथ ही उनसे उन्नत कृषि के लिए परामर्श भी लिया जा रहा है।

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सोशल मीडिया का भरपूर सहयोग मिला

युवा कृषक धीरज पंड्या ने अपने ज्ञान को और प्रकाशित करने के लिए सोशल मीडिया को माध्यम बनाते हुए श्री गायत्री बीज बैंक, उज्जैन के नाम से एक फेसबुक और कई व्हाट्सएप ग्रुप भी बनाये है, जिसमें 25000 से ज्यादा किसान साथी जुड़े हैं और सोशल मीडिया के द्वारा ही सभी किसान युवा कृषक धीरज पंड्या के द्वारा दिए जा रहे सुझाव अनुसार अपनी खेती करने लगे।

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भविष्य की खेती को सुनहरा बनाने का सपना

चर्चा के दौरान धीरज पंड्या बताते हैं कि खेती में अभी कहीं और उपलब्धियां बाकी हैं, केवल हमें संकल्पित होकर एवं विस्तृत दृष्टिकोण रखते हुए नित निरंतर खेती को अध्ययन करना है और भविष्य में खेती को बहुत सुनहरा बनाना है। उन्होंने बताया कि व्यवस्थित तरीके से खेती को किया जाए तो खेती का भविष्य बहुत सुनहरा है। युवा कृषक का मानना है कि आने वाले 2050 तक खेती से बड़ा कोई रोजगार नहीं होगा।

इस वर्ष भी लगाई गेहूं की नवीन किस्में

युवा कृषक उद्यमी धीरज पंड्या ने इस वर्ष भी अपने खेत पर गेहू की बहुत सारी नवीन किस्में लगाई। युवा कृषक उद्यमी का कहना है के पिछले साल गेहू अनुसंधान केंद्र द्वारा नोटिफाई की गई किस्म का चपाती स्कोर 8.3 है, जो कि काफी अच्छा माना जाता है। इस किस्म के गेहू का कलर काफी अच्छा होने से किसानों को मंडी में रेट भी अच्छे मिलेंगे।

युवा किसान ने बताया कि ये किस्म हीट टॉलरेंट भी है यानी कि गर्मी का असर भी इस किस्म में नहीं होगा अगर न्यूट्रेशन की बात करे तो ये किस्म पोषक तत्वों से भरी पड़ी है। ये किस्म प्रधानमंत्री जी का जो सपना है। कुपोषण मुक्त भारत का उसमे ये उन्नत किस्म बहुत बड़ा योगदान देगी। गेंहू की कई किस्में Gw 543, HD 3385, DBW 377 करण बोल्ड, Hi 8830 पूसा कीर्ति, Hi 1650 पूसा ओजस्वी, MACS 4135, Hi- 8737 पूसा अनमोल इत्यादि जो की मध्यप्रदेश के किसानों के लिए वरदान बनेगी।

इस वर्ष खरीफ सीजन के लिए सोयाबीन की उपलब्ध नई किस्में

युवा कृषक धीरज पंड्या बताते हैं कि इस वर्ष खरीफ सीजन 2026 के लिए उनके पास सोयाबीन की कई नई वैरायटियां एवं पुरानी प्रचलित किस्में है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष उनके पास अच्छी पैदावार देने वाली सोयाबीन की नवीनतम किस्में संपूर्ण 95 ( रिसर्च किस्म ), JS-2172, JS-2303, JS-2433, JS-2506, NRC 150, NRC-142, NRC-268, JS 2218, JS 2309 आदि किसानों के लिए उपलब्ध है। किसान साथी बीज और खेती से संबंधित जानकारी प्राप्त करने के लिए धीरज पंड्या के मोबाइल नंबर 9479739947 पर संपर्क कर सकते हैं।

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