खरीफ फसलों की बुवाई के पहले किसानों को किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए आइए Agriculture Advisory को देखते हैं..
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Agriculture Advisory | जून महीने से ही खरीफ सीजन की शुरुआत हो चुकी है। कपास की बुवाई हो चुकी है इसके अलावा धान की फसल के लिए नर्सरी तैयार की जा रही है। मौसम विभाग ने इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम मानसून के सामान्य से कम 90 से 95 प्रतिशत रहने की सम्भावना जताई है।
म.प्र. में मानसून आने की सम्भावना 20 से 22 जून तक है, इसको देखते हुये क्षेत्र की जलवायु, पानी, मिट्टी के पोषक तत्व व अन्य बातों को ध्यान में रखते हुये फसल का चुनाव, किस्म का चुनाव कैसे करें और खरीफ फसलों की बुवाई के पहले किन-किन बातों का ध्यान रखें इसे लेकर कृषि विशेषज्ञ में एडवाइजरी Agriculture Advisory जारी की है आईए देखते हैं पूरी डिटेल..
इस समय अंकुरण की जांच करें
कृषि वैज्ञानिक बताते हैं कि खरीफ फसलों की बुवाई के पहले किसान साथी घरों में रखे हुए बीजों को बुवाई के पूर्व अंकुरण की जांच अवश्य कर लें। इसके लिये जूट के बोरों के टुकड़े को गीलाकर व निचोड़ कर उसमें गिनती कर लाईन से 50 दाने रख दें एवं जूट के बोरे के टुकड़े को रोल बनाकर, ठण्डे एवं छायादार स्थान पर रख दें एवं आवश्यकतानुसार हल्का पानी का छिड़काव करते रहें। 8-10 दिन में दानों का अंकुरण हो जायेगा। तब उसे परीक्षण करें 50 दाने में से 35 से अधिक दानों में अंकुरण यदि हो जाये तो वह बीज बुवाई के लिये उपयुक्त है। (Agriculture Advisory)
धान के रोपे की तैयारी करें
कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक इस समय किसान धान के रोपे की तैयारी कर सकते हैं। धान के रुपए की तैयारी हर हाल में 15 से 20 जून तक कर ली जाए। जितने क्षेत्र में धान लगाना हो उसका 1/10 हिस्से में धान का रोपा लगाना चाहिए। एक मीटर चौड़ी एवं 15 सेंमी उठी हुयी क्यारियां बनाकर रोपाई करें। एक एकड़ के लिये धान का बीज 8-10 किलो पर्याप्त है।
धान के बीज को 10-12 घण्टे भिगोकर, फिर उसे निकालकर जूट के बोरे में 2-3 दिन तक रखें एवं अंकुरित धान का फफूंदनाशक दवा से बीजोपचार कर बीज को उठी हुयी क्यारियों में डालें एवं धान की नर्सरी खेत के ऊपरी स्थान पर रखें जहां जल भराव न होता हो एवं उसकी देखभाल करें। (Agriculture Advisory)
सोयाबीन की बुवाई के लिए खेत तैयार करें
किसान साथी इस समय सोयाबीन की बुवाई के लिए खेत को तैयार कर लें। सोयाबीन की फसल के लिए अच्छी जुताई जरूरी है। बुवाई से 20-25 दिन पहले कम्पोस्ट – गोबर डालें। कृषि वैज्ञानिकों की Agriculture Advisory के मुताबिक बीज उपचार सोयाबीन की खेती का सबसे जरूरी कदम माना जाता है। इससे बीजों को शुरुआती फंगस और बीमारियों से सुरक्षा मिलती है।
अगर बीजोपचार न किया जाए, तो पौधों में शुरुआत से ही रोग लगने का खतरा बढ़ जाता है। बुवाई से एक दिन पहले बीजों को जैविक या रासायनिक उपचार से तैयार करें। किसान ट्राइकोडर्मा, राइजोबियम कल्चर या नीम आधारित उत्पादों का इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे पौधों की जड़ें मजबूत बनती हैं और अंकुरण भी तेजी से होता है। (Agriculture Advisory)
ऐसे करें खरीफ प्याज की तैयारी
सोयाबीन धान के साथ-साथ करीब सीजन में कई किसान प्याज की खेती भी करते हैं। कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक खरीफ प्याज की उन्नत किस्म भीमा रेड, भीमा सुपर, एन- 53 किस्मों का चयन करें एवं उठी हुयी क्यारियों में फफूंदनाशक दवा से उपचार कर रोपा डालें।
जल संरक्षण वर्षा जल के संचयन के लिये खेत के निचले स्थान पर पोखर या पांड का निर्माण करें एवं खेत के चारों ओर मेढ़ बंधान, बोरी बंधान या गेवियन स्ट्रक्चर का उपयोग कर संचयन करें जल स्तर में बढ़ोत्तरी हो । (Agriculture Advisory)
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नमस्कार किसान साथियों….
मेरा नाम जयदीप मालवीय है और मैं एक कॉलेज छात्र हुं। मुझे 10वीं से ही खेती किसानी पर कंटेंट लिखने में गहरी रुचि है। साथियों, हम देखते है कि कई किसान भाइयों को खेती में कम उत्पादन एवं लागत ज्यादा आती है, जिससे उन्हें मुनाफा कम होता है। इसका प्रमुख कारण अभी भी खेती का परंपरागत तरीका अपनाया जाना है। किसान साथी खेती के परंपरागत तरीके से निकल कर आधुनिक तरीके अपनाएं, तभी खेती मुनाफे का सौदा साबित होगी। किसानों को नई नई जानकारी मिलते रहे और कम लागत में उनकी आय में बढ़ोतरी हो यही मेरा मकसद है। इसी को देखते हुए मैं डिजिटल वेबसाइट के जरिए किसानों को सटीक एवं सही जानकारी देने का प्रयास करता हुं। हमारा तरीका सरल और समझने योग्य होता है, ताकि हमारे किसान भाइयों को आसानी से अच्छी-अच्छी जानकारी मिलती रहे और उन्हें किसी भी प्रकार की कोई तकलीफ ना हो। मैं पिछले 4 साल से किसानों के लिए कंटेंट लिख रहा हूं और यही चाहता हुं की मैं आगे भी ज्यादा से ज्यादा किसानों को नई नई जानकारी से अवगत करवाता रहूं।
आपके साथ के लिए धन्यवाद …





