कम पानी और कम अवधि में बंपर पैदावार देने वाली पहली थ्री-वे हाइब्रिड बाजरा किस्म विकसित, देखें डिटेल..

कृषि वैज्ञानिकों बाजरे की एक ऐसी किस्म (Hybrid Millet Varieties) को विकसित की है, जो बहुत फायदेमंद रहेगी, देखें इस किस्म की खासियतें और पैदावार ..

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Hybrid Millet Varieties | केंद्र सरकार देशभर में श्री अन्न की खेती को बड़ा हुआ देने के लिए किसानों को प्रोत्साहित कर रही है इसके लिए सरकार अभियान चला रही है। सरकार की इसी श्री अन्न (Millets) को बढ़ावा देने की मुहिम के बीच जयपुर के कृषि वैज्ञानिकों ने बाजरे की ऐसी हाइब्रिड किस्म विकसित की है, जो कम बारिश वाले क्षेत्रों में भी अधिक उत्पादन देने के साथ सूखे और बीमारियों के प्रति प्रतिरोधी है।

कृषि वैज्ञानिकों द्वारा विकसित की गई बाजरे की यह (Hybrid Millet Varieties) वैरायटी किसानों के लिए बहुत फायदेमंद साबित होगी। आईए जानते हैं इस वैरायटी की प्रमुख विशेषताएं, पैदावार और अवधि संबंधी सभी जानकारी..

बाजरा किस्म आरएचबी-273 विकसित

जयपुर स्थित राजस्थान कृषि अनुसंधान ‘संस्थानं (रारी) ने इक्रीसैट के सहयोग से देश की पहली थ्री-वे हाइब्रिड बाजरा किस्म ‘आरएचबी-273’ विकसित किया है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने इस वर्ष जारी 184 उन्नत फसल किस्मों में इसे भी शामिल किया है। Hybrid Millet Varieties

क्या है थ्री-वे हाइब्रिड बाजरा वैरायटी

कृषि वैज्ञानिक बताते हैं कि थ्री-वे हाइब्रिड किस्म तीन अलग-अलग पेरेंट लाइनों के संयोजन से तैयार की जाती है। पहले दो शुद्ध किस्मों से एक हाइब्रिड विकसित किया जाता है, फिर उसे तीसरी लाइन के साथ क्रॉस कर अंतिम बीज तैयार किया जाता है। इसे ही थ्री-वे हाइब्रिड किस्म कहा जाता है। Hybrid Millet Varieties

बाजरा किस्म आरएचबी-273 की पैदावार

कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक बाजरे की यह वैरायटी प्रति हेक्टेयर औसतन 23 क्विंटल बाजरा और 48 क्विंटल सूखा चारा उत्पादन देने वाली है। Hybrid Millet Varieties

यह है प्रमुख विशेषताएं

कृषि वैज्ञानिकों द्वारा विकसित की गई यह वैरायटी 400 मिमी से कम वर्षा वाले क्षेत्रों में भी बेहतर उत्पादन देने वाली है। बाजरे की हाइब्रिड किस्म की यह वैरायटी मात्र 75 से 76 दिनों में तैयार हो जाएगी। जिसके चलते सूखे और प्रतिकूल मौसम के लिए यह वैरायटी अधिक सहनशील है। Hybrid Millet Varieties

इन क्षेत्रों के लिए हुई अनुशंसित

रारी, जयपुर के निदेशक डॉ. सुरेंद्र सिंह ने बताया कि इस किस्म को देश के ‘ए जोन’ के लिए स्वीकृति मिली है। इससे राजस्थान के साथ हरियाणा, गुजरात, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, दिल्ली और पंजाब के किसानों को लाभ मिलेगा। इन राज्यों के किसान इस वैरायटी को बोकर अच्छा लाभ कमा सकते हैं। Hybrid Millet Varieties

कैसे करें बाजरे की खेती

बाजरे की खेती खरीफ सीजन में की जाती है यह फसल कम वर्षा और शुष्क क्षेत्र के लिए अच्छी रहती है। बाजरे की खेती के लिए सामान्यतः 25 से 35°C तापमान अनुकूल रहता है। Hybrid Millet Varieties

इसकी खेती अच्छी जल निकासी वाली वाले दो मिनट मिट्टी से लेकर मध्य दोमट मिट्टी में की जाती है। बाजरे की बीज दर 3 से 5 किग्रा प्रति हेक्टेयर उचित रहती है और कतार से कतार की दूरी 45 सेमी एवं पौधे से पौधे की दूरी 10 से 15 सेंटीमीटर रखने पर आदर्श उपज मिलती है।

कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक बाजरे की फसल को गोबर की सड़ी खाद 8–10 टन, नाइट्रोजन 60–80 किग्रा, फॉस्फोरस 30–40 किग्रा देने पर अच्छी पैदावार होती है। सड़ी खाद बुवाई के पहले खेत में डालना चाहिए, वही आधी नाइट्रोजन और पूरी फॉस्फोरस बुवाई के समय, शेष नाइट्रोजन 25–30 दिन बाद दें। बाजरे की फसल में खरपतवार नियंत्रण के लिए 20-25 दिन बाद निदाई-गुड़ाई करें। Hybrid Millet Varieties

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